BJP ने Karnataka Cabinet विस्तार में मंत्री पद बिक्री के आरोप पर Congress को घेरा
नयी दिल्ली, सात अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक में हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पदों की कथित ‘‘नीलामी’’ के आरोपों को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी से स्पष्टीकरण की मांग की। भाजपा की कर्नाटक इकाई के नेता सी. नारायणस्वामी के बुधवार को किए गए दावे के बाद यह मांग उठी। उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई के दो नेताओं के बीच कथित ऑडियो बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि राज्य में मंत्रिमंडल के पद आर्थिक प्रभाव के आधार पर हासिल किए गए।
नारायणस्वामी ने दावा किया कि कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग से संकेत मिलता है कि जिन ‘‘ईमानदार’’ विधायकों के पास रुपये नहीं थे, उन्हें मंत्री पद से वंचित कर दिया गया। उन्होंने कर्नाटक में 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि जनजाति विकास निगम घोटाले में आरोपी बी. नागेंद्र को दोबारा राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाए। भाजपा नेता ने चेतावनी दी कि अगर नागेंद्र पद पर बने रहते हैं तो पार्टी विरोध प्रदर्शन करेगी।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस में किसी व्यक्ति का कद और पद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिए जाने वाले चढ़ावे (आर्थिक पेशकश) से तय होता है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, बल्कि कांग्रेस नेताओं के बीच हुई बातचीत से ये गंभीर आरोप सामने आए हैं।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने दावा किया कि कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, कर्नाटक मंत्रिमंडल में 80 प्रतिशत मंत्रियों ने इस तरह के चढ़ावे देकर मंत्रिपद हासिल किए। उन्होंने सवाल किया, ‘‘वाल्मीकि जनजाति विकास निगम घोटाले में आरोपी और अब भी ईडी के मामले का सामना कर रहे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया गया?
क्या दलितों के लिए निर्धारित धन का गबन करने वाले व्यक्ति ने भुगतान के आधार पर नए मंत्रिमंडल में जगह हासिल की?’’ भाजपा नेता ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ये गंभीर आरोप हैं। खरगे, राहुल गांधी और के.सी. वेणुगोपाल को इन आरोपों का जवाब देना होगा।
UP के Brijesh Pathak का Akhilesh Yadav पर पलटवार, कहा- ब्राह्मण हितैषी बनने का स्वांग न रचें
लखनऊ, आठ अगस्त उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ‘‘भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा ब्राह्मणों को निशाना बनाए जाने’’ संबंधी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर शनिवार को पलटवार किया और कहा कि सपा प्रमुख ब्राह्मण समाज का हितैषी होने का ‘‘स्वांग’’ रच रहे हैं। पाठक ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन तथ्यों का जवाब तथ्यों से दिया जाना चाहिए, न कि भ्रम, कटुता और निराधार आरोपों से। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स’ खाते पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित एक लंबी ‘पोस्ट’ में कहा, ‘‘राजनीति में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाता है, व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से नहीं।’’ उप मुख्यमंत्री ने समाजवादी चिंतक और नेता दिवंगत डॉ. राममनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया।
उन्होंने लिखा, ‘‘डॉ. लोहिया परिवारवाद के सबसे बड़े विरोधी थे। वह कहते थे, जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा। उनका मानना था कि जब परिवार सबसे शक्तिशाली हो जाता है, तब समाज कमजोर हो जाता है।’’ पाठक ने कहा, ‘‘आज जो लोग लोहिया के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने उनके विचारों को सबसे पहले त्यागा है।
लोहिया यदि आज होते, तो परिवारवाद को राजनीति का आधार बनाने वालों को कठोर सवालों के कटघरे में सबसे पहले खड़ा करते।’’ इससे पहले, अखिलेश यादव ने दिवंगत समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा के प्रबुद्ध सम्मेलन (ब्राह्मण सम्मेलन) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पाठक ने यादव पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘आप आज ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग रच रहे हैं, जबकि आपके मुख से ‘मिश्राजी कुछ तो शर्म करो’ जैसा वाक्य और पत्रकारों की जाति पूछना समाज की छाती में आज भी बरछी की तरह चुभता है। आपका पूरा राजनीतिक विमर्श एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है।
उन्होंने कहा कि समाज का उत्थान किसी एक परिवार को सत्ता दिलाने से नहीं, बल्कि हर वर्ग को समान अवसर, न्याय और सम्मान देने से होता है। पाठक ने कहा, ‘‘जहां तक मेरे सार्वजनिक जीवन का सवाल है, उसका मूल्यांकन जनता करती है। मैंने संगठन, संविधान और जनसेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा है।
व्यक्तिगत आरोप, अपशब्द और दुष्प्रचार न सत्य बदल सकते हैं और न ही जनता का विश्वास।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय पर आधारित है जबकि परिवारवादी राजनीति का उद्देश्य सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखना है तथा जनता इस अंतर को अच्छी तरह समझती है।
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