Goa में Sub Registrar ऑफिस से होगी संपत्ति रजिस्ट्री, NGDRS से मिला विकल्प
पणजी, सात अगस्त गोवा सरकार ने हाल ही में एक सुविधा शुरू की है, जिसके तहत नागरिक अपने जिले के किसी भी उप-निबंधक (सब रजिस्ट्रार) कार्यालय में संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण करा सकेंगे। राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) के तहत शुरू की गई ‘जिले के भीतर कहीं भी रजिस्ट्रीकरण’ सुविधा को लागू करने वाला गोवा देश का तीसरा राज्य बन गया है। इस पहल का उद्देश्य रजिस्ट्रीकरण सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान बनाना और प्रतीक्षा समय कम करना है।
गोवा में दो जिले हैं, दक्षिण गोवा और उत्तर गोवा। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 29 जुलाई को इस पहल की शुरुआत करते हुए कहा था कि यह पारदर्शी, प्रभावी और प्रौद्योगिकी आधारित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उप-निबंधक कार्यालयों में आधुनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत करती रहेगी।
जिला निबंधक (दक्षिण) सूरज वेर्णेकर ने पीटीआई-से कहा कि यह सुविधा संपत्ति रजिस्ट्रीकरण की बढ़ती संख्या को देखते हुए शुरू की गई थी (खासकर तटीय इलाकों में) जिससे बारदेज, सालसेटे और तिसवाड़ी के उप-निबंधक कार्यालय पर दबाव बढ़ गया था।
Telangana High Court ने मुफ़्त योजनाओं पर जताई चिंता, कहा खजाने पर पड़ रहा वित्तीय बोझ
हैदराबाद, सात अगस्त तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने शुक्रवार को कल्याणकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं और अपात्र लाभार्थियों को मिल रहे लाभों से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर चिंता जताई। अदालत में पेश हुए राज्य के प्रधान सचिव (वित्त) संदीप कुमार सुल्तानिया के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति नागेश भीमपाका ने पाया कि कर्मचारियों के वेतन, कर्ज के भुगतान और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के बाद सरकारी निधि में काफी कमी आ जाती है। उन्होंने तेलुगु में अपनी टिप्पणी में कहा, “बहुत सारी गैर-जरूरी मुफ्त योजनाएं (लागू की जा रही हैं)।
हां, (कल्याणकारी कार्यक्रम) लागू होने चाहिए। कई लोग बिना पात्रता के भी इनका फायदा उठा रहे हैं। ‘रायतू बंधु’ (किसानों के लिए निवेश सहायता योजना) जैसी योजनाएं हैं।
क्या करोड़पति भी इनका फायदा नहीं उठा रहे हैं? इससे राज्य पर कितना बोझ पड़ता है।” उन्होंने कहा कि जहां पहले की पीढ़ियों के लोग महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरित होकर देश के लिए योगदान देने को उत्सुक रहते थे, वहीं आज लोगों में यह प्रवृत्ति है कि वे सवाल करते हैं कि उन्हें सरकार से क्या व्यक्तिगत लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अगर किसी एक भी लाभार्थी का पीडीएस राशन कार्ड हटाया जाता है, तो इससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि वे किसी की आलोचना नहीं कर रहे हैं, लेकिन राज्य में खेती के काम करने वालों की कमी के कारण गांवों में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर राज्य के खेतों में काम कर रहे हैं। इस बात पर जोर देते हुए कि वह कोई राजनीतिक भाषण नहीं दे रहे हैं और न ही सरकार की आलोचना कर रहे हैं, न्यायमूर्ति भीमपाका ने कहा कि इन मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है।
गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के परिवारों के लिए बड़ी संख्या में पीडीएस राशन कार्ड और दूसरी मुफ़्त सुविधाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मुफ़्त सुविधाओं और अपात्र लोगों को फ़ायदे देने पर भारी खर्च का यह सिलसिला जारी रहा, तो एक दिन भगवान कुबेर (धन के देवता) भी “कंगाल” हो जाएंगे। अदालत ने कहा कि किसी अधिकारी को अदालत में बुलाना दुखद है, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों की वजह से ऐसा करना पड़ा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त के लिए तय की।
अदालत ने 10 जुलाई को सुल्तानिया के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया और शहर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे उन्हें “जहां भी मिलें” गिरफ्तार करें और शुक्रवार को अदालत में पेश करें। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगर वरिष्ठ अधिकारी 5,000 रुपये का निजी बॉन्ड भरते हैं और यह भरोसा दिलाते हैं कि वे शुक्रवार को अदालत में पेश होंगे, तो उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi










