ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के सीजफायर वाले प्रस्ताव को किया खारिज: रिपोर्ट
तेहरान, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के सीजफायर वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। फार्स ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि यह प्रस्ताव गुरुवार को एक मित्र देश के जरिए ईरान को दिया गया।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने सूत्र के हवाले से बताया कि खासकर कुवैत के बुबियान आइलैंड पर अमेरिकी मिलिट्री फोर्स डिपो को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले के बाद, वाशिंगटन ने सीजफायर सुनिश्चित करने के लिए अपनी डिप्लोमैटिक कोशिशें तेज कर दी हैं।
फार्स के मुताबिक, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह प्रस्ताव इलाके में संकट के बढ़ने और ईरान की सैन्य क्षमता को कम आंकने की वजह से अमेरिकी फोर्स के लिए गंभीर दिक्कतें पैदा होने के बाद पेश किया गया।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ईरान ने इस ऑफर पर लिखकर जवाब नहीं दिया, बल्कि लड़ाई के मैदान में हमले जारी रखकर जवाब दिया।
इस बीच, ईरानी सेना ने पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान के दक्षिणी समुद्री इलाके के ऊपर होर्मुज स्ट्रेट के पास एक यूएसए-10 वॉर्थोग अटैक प्लेन को मार गिराया, जिससे एयरक्राफ्ट फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया।
इससे पहले आईआरजीसी ने दावा किया कि सेंट्रल ईरानी एयरस्पेस में एक यूएसएफ-35 फाइटर जेट को मार गिराया था। बाद में शुक्रवार को, ईरान की सेमी-ऑफिशियल मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि एक यूएस ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी एयरस्पेस में एक प्रोजेक्टाइल से टकरा गया था, जब वह गिरे हुए यूएस फाइटर जेट के पायलट को ढूंढ रहा था।
कोगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के गवर्नर यादोल्लाह रहमानी ने कबायली और ग्रामीण इलाकों के लोगों से दुश्मन पायलटों का पता लगाने में अधिकारियों की मदद करने को कहा।
बता दें, इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को तेहरान और ईरान के कई दूसरे शहरों पर मिलकर हमले किए। इसमें ईरान के उस समय के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, सीनियर मिलिट्री कमांडर और आम लोग मारे गए। ईरान ने जवाब में मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
--आईएएनएस
केके/एएस
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Strait of Hormuz Crisis: बहरीन ने सुरक्षा परिषद में टाला मतदान, रूस-चीन के विरोध से फंसा पेंच
खाड़ी देश बहरीन, जो इस माह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अध्यक्षता संभाल रहा है, ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर पेश किए गए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान फिलहाल टाल दिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य विश्व के इस सबसे अहम जलमार्ग को फिर से सुचारू रूप से खोलना और वहां ईरान के बढ़ते प्रभुत्व को चुनौती देना था। संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ राजनयिकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिषद की बैठकें गोपनीय होने के कारण इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अब इस पर मतदान अगले सप्ताह होने की संभावना है।
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हालांकि, रूस और चीन के कड़े विरोध के कारण पहले ही इस प्रस्ताव की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे थे। बहरीन प्रायोजित इस मसौदा प्रस्ताव को शनिवार को मतदान के लिए पेश किए जाने की उम्मीद थी जिसमें केवल रक्षात्मक कदमों की अनुमति देने का प्रावधान है, जबकि शुरुआत में खाड़ी देश और अमेरिका आक्रामक कार्रवाई के पक्ष में थे।
प्रस्ताव का मकसद इस अहम जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। बहरीन ने सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन मतदान टलने से स्पष्ट है कि यह मसौदा अब भी रूस और चीन को स्वीकार्य नहीं है।
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क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेल मार्ग है।
दुनिया के कुल कच्चे तेल के परिवहन का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है।
आगे की राह
शनिवार को होने वाला मतदान अब अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। बहरीन इस बीच अन्य सदस्य देशों के साथ मध्यस्थता कर रहा है ताकि किसी ऐसे समझौते पर पहुँचा जा सके जो सुरक्षा परिषद में पारित हो सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन के कड़े रुख के बीच बिना बड़े समझौतों के इस प्रस्ताव का भविष्य धुंधला नजर आ रहा है।
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