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क्या अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा, ईरान ने बनाया खतरनाक प्लान?

क्या अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा? खाड़ी देशों के किसी वाटर प्लांट पर हमला होता है, तो इसके नतीजे कुछ ही घंटों में दिखने लगेंगे. कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में रणनीतिक जल भंडार केवल कुछ ही दिनों के लिए होते हैं. प्लांट रुकते ही शहरों में हाहाकार मच सकता है. मिडिल ईस्ट में कई प्लांट पानी के साथ बिजली भी पैदा करते हैं. यानी बिजली भी गुल हो जाएगी..ऐसे में बिना पानी के रियाद, दुबई या अबू धाबी जैसे महानगरों में रहना असंभव हो जाएगा

ईरान ने बनाया खतरनाक प्लान, बूंद-बूंद को तरसेंगे खाड़ी देश के सुल्तान

क्या ईरान ने खतरनाक प्लान बना लिया है. क्या बूंद-बूंद पानी के लिए खाड़ी के सुल्तान तरसने वाले हैं.? इस डर की वजह है.मिडिल ईस्ट के डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला.  युद्ध के बीच ईरान ने दावा किया कि इजरायल ने उसके डिसेलिनेशन प्लांट पर धमाका किया है. जिसका जवाब ईरान ने भी मिडिल ईस्ट में डिसेलिनेशन प्लांट पर अटैक करके दिया है.

- कुवैत के एक पावर एंड वाटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ईऱान की ओर से हमला किया गया
- कुवैत की एनर्जी मिनिस्ट्री ने बताया कि हमले के दौरान उसके डीसैलिनेशन प्लांट के कैंपस की एक इमारत को नुकसान पहुंचा है
- ये लगभग 11 करोड़ गैलन पानी का उत्पादन करता है. इससे कुवैत की जल आपूर्ति पर गंभीर दबाव बढ़ गया है.

लेकिन ईरान यहीं नहीं रुका.उसने बहरीन में भी डिसेलिनेशन प्लांट को टारगेट किया.बहरीन के गृह मंत्रालय ने एक्स पर लिखा.  ईरानी आक्रामकता ने नागरिक लक्ष्यों पर बिना भेदभाव के हमला किया और एक ड्रोन हमले के बाद एक वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचाया. 

यानी मीठे पानी पर हमले दोनों तरफ से शुरू हो चुके हैं.आशंका इस बात की है कि कहीं ये वाटर वार तेजी से फैल ना जाए. क्योंकि तुर्किए के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप एर्दोगान ने पहले ही इशारा कर दिया है कि अगली बड़ी जंग पानी को लेकर हो सकती है. 

अगले बड़े युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि पानी के लिए 

हमारे आसपास के संघर्षों में इसके शुरुआती संकेत अभी से दिखने लगे हैं.  ईरान के डिसेलिनेशन प्लांट पर अटैक की शुरुआत अमेरिका ने की..जिसका बदला लेने के लिए ईरान ने खाड़ी के तमाम देशों को बूंद-बूंद के लिए तरसाने की तैयारी कर ली है. 

ये खतरा तेजी से बढ़ रहा है कि  ईरान मध्य पूर्व में सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन, ओमान के वॉटर प्लांट को तबाह कर सकता है. क्योंकि ईरान के पास एक गुप्त प्रलयकारी योजना है.जिसके तहत वो खारे पानी को मीठा करने वाले डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला कर मिडिल ईस्ट को प्यासा मार सकता है. इसीलिए ईरान अब ड्रोन और मिसाइलों को वॉटर प्लांट को टारगेट करके दाग रहा है. सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत को निशाना बनाकर भेजे गए ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया. इसका निशाना सऊदी अरब के डिसेलिनेशन प्लांट थे. 

क्या होता है डिसेलिनेशन प्लांट?

डिसेलिनेशन प्लांट के जरिए समुद्र के खारे पानी को साफ कर पीने योग्य मीठा पानी बनाया जाता है. डिसेलिनेशन का मतलब है पानी से नमक और दूसरे खनिजों को अलग कर देना.  डिसेलिनेशन प्लांट उन देशों में ज्यादा हैं. जहां पर बारिश बेहद की कम होती है. नदियां नहीं होती और ग्राउंड वाटर सीमित होता है.जैसे कि खाड़ी के देश. इन देशों में 50 से लेकर 95फीसदी पानी की जरूरत डिसेलिनेशन प्लांट से ही पूरी होती है. मिडिल ईस्ट वो इलाका है..जहां पानी तेल से भी कीमती है.

- सऊदी अरब में दुनिया का सबसे बड़ा डिसेलिनेशन नेटवर्क है
- यूएई में पीने के पानी का बड़ा हिस्सा समुद्र से बनता है
- कतर और कुवैत जैसे देशों में पीने का पूरा पानी डिसेलिनेशन से ही आता है 

इसलिए ईरान जिस रास्ते पर निकल पड़ा है.वो खाड़ी देशों को प्यासा मारने की तरफ लेकर जाता है. क्योंकि  वाटर प्लांट पर हमले बढ़े तो इससे पूरे खाड़ी में अराजकता फैल सकती है. क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में करीब 95 फीसदी पानी डिसेलिनेशन से आता है. अगर ईरान भी वाटर प्लांट पर हमले तेज करता है तो पूरा खाड़ी क्षेत्र ठप हो सकता है.

इसमें कोई शक नहीं कि ये हाइब्रिड वॉरफेयर का दौर है यानी दुश्मन को हराने के लिए अब केवल सेना को मारना जरूरी नहीं बल्कि उसके रिसोर्सेज  को खत्म करना भी मकसद होता है. अगर ईरान का वॉटर प्लांट फेल होते हैं तो वहां सिविल वॉर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और इसी तरह अगर खाड़ी के देशो में वाटर प्लांट पर हमले होते हैं..तो पूरा मिडिल ईस्ट तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा. क्योंकि पानी का कोई विकल्प नहीं होता. न इसका कोई रणनीतिक भंडार होता है, न ही ऐसा कोई बाजार जहां से इसकी कमी को पूरा किया जा सके.

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दक्षिण कोरिया-फ्रांस ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जताई सहमति

सियोल, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने होर्मुज स्‍ट्रेट के माध्यम से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने और मध्य पूर्व में युद्ध के व्यापक प्रभाव को कम करने के लिए साथ काम करने पर सहमति जताई है।

ली ने मैक्रो के साथ शिखर वार्ता के दौरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितताओं को लेकर अपनी चिंताओं को साझा किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों को गहरा करने और सुरक्षा मामलों में समन्वय मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

ली ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा, राष्ट्रपति मैक्रो और मैंने यह सहमति जताई कि हम नीतिगत अनुभव और रणनीतियों को साझा करेंगे ताकि मध्य पूर्व युद्ध से उत्पन्न आर्थिक और ऊर्जा संकट का संयुक्त रूप से समाधान किया जा सके। हमने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता कम करने के लिए साथ काम करने पर भी सहमति जताई।

उन्होंने कहा, हमने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परमाणु और समुद्री पवन ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और होर्मुज स्‍ट्रेट के माध्यम से सुरक्षित समुद्री परिवहन मार्ग सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, मैक्रो ने भी इस बात पर जोर दिया कि फ्रांस और दक्षिण कोरिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलसंधि को फिर से खोलने और मध्य पूर्व में संघर्ष को कम करने के लिए सहयोग करना चाहिए।

ली ने कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी सहमति जताई और 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया, जो पिछले वर्ष 15 बिलियन डॉलर था।

क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

उन्होंने उन्नत तकनीकों और भविष्य के उद्योगों (कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक) में सहयोग बढ़ाने और विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर मंत्रीस्तरीय संयुक्त समिति स्थापित करने का भी संकल्प लिया।

दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग पर एक पत्र पर भी हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दक्षिण कोरिया की विनिर्माण क्षमताओं को फ्रांस की प्रसंस्करण तकनीक और बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ना है।

राज्य-स्वामित्व वाली कोरिया हाइड्रो एंड न्यूक्लियर पावर ने फ्रांसीसी परमाणु कंपनियों ओरानो और फ्रमैटोम के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। साथ ही फ्रांस की ईडीएफ के साथ एक अलग एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसमें दक्षिण-पश्चिमी शहर यॉन्गग्वांग में एक समुद्री पवन ऊर्जा संयंत्र के संयुक्त विकास पर काम किया जाएगा।

ली ने उम्मीद जताई कि ये समझौते दक्षिण कोरिया के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए कच्चे माल की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और वैश्विक बाजार में संयुक्त प्रवेश का आधार तैयार करेंगे।

उन्होंने अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया और दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत एजेंसियों के बीच हस्ताक्षरित एमओयू के मद्देनजर सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों का वादा किया।

वार्ता के दौरान ली ने कहा कि उन्होंने सियोल की प्रयासों के बारे में बताया ताकि प्योंगयांग के साथ संवाद फिर से शुरू किया जा सके और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा दिया जा सके, जबकि मैक्रो ने प्रायद्वीप पर शांति और स्थिरता के प्रति पेरिस के समर्थन की पुष्टि की।

ली ने कहा, हम दोनों नेताओं ने गहन समझ साझा की कि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति का असर न केवल उत्तर पूर्व एशिया और यूरोप में बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी है।

ली ने कहा कि सियोल और पेरिस ने भविष्य की रणनीतिक उद्योगों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और रक्षा, और अंतरराष्ट्रीय मंच पर समन्वय को गहरा करने की आशा व्यक्त की।

उन्होंने कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के जिम्मेदार सदस्य के रूप में दोनों देश वैश्विक परिदृश्य में तेजी से बदलावों का जवाब देने के लिए भी साथ काम कर रहे हैं।

ली ने कहा कि मैक्रो ने जून में फ्रांस के एवियन में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में औपचारिक आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। यदि वह इसमें शामिल होते हैं तो यह उनका कनाडा में पिछले साल के बाद लगातार दूसरा जी7 शिखर सम्मेलन होगा।

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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