Earthquake News: भूकंप के तेज झटकों से हिला दिल्ली-NCR, 5.9 की तीव्रता...डर के मारे घर से निकले लोग
Earthquake News: भूकंप का केंद्र 36.52 डिग्री उत्तर अक्षांश और 71.01 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके झटके पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में भी महसूस किए गए।अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान की सीमा के आस-पास भूकंप का केंद्र बताया गया
क्या अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा, ईरान ने बनाया खतरनाक प्लान?
क्या अगला महायुद्ध पानी के लिए होगा? खाड़ी देशों के किसी वाटर प्लांट पर हमला होता है, तो इसके नतीजे कुछ ही घंटों में दिखने लगेंगे. कतर, कुवैत और यूएई जैसे देशों में रणनीतिक जल भंडार केवल कुछ ही दिनों के लिए होते हैं. प्लांट रुकते ही शहरों में हाहाकार मच सकता है. मिडिल ईस्ट में कई प्लांट पानी के साथ बिजली भी पैदा करते हैं. यानी बिजली भी गुल हो जाएगी..ऐसे में बिना पानी के रियाद, दुबई या अबू धाबी जैसे महानगरों में रहना असंभव हो जाएगा
ईरान ने बनाया खतरनाक प्लान, बूंद-बूंद को तरसेंगे खाड़ी देश के सुल्तान
क्या ईरान ने खतरनाक प्लान बना लिया है. क्या बूंद-बूंद पानी के लिए खाड़ी के सुल्तान तरसने वाले हैं.? इस डर की वजह है.मिडिल ईस्ट के डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला. युद्ध के बीच ईरान ने दावा किया कि इजरायल ने उसके डिसेलिनेशन प्लांट पर धमाका किया है. जिसका जवाब ईरान ने भी मिडिल ईस्ट में डिसेलिनेशन प्लांट पर अटैक करके दिया है.
- कुवैत के एक पावर एंड वाटर डिसेलिनेशन प्लांट पर ईऱान की ओर से हमला किया गया
- कुवैत की एनर्जी मिनिस्ट्री ने बताया कि हमले के दौरान उसके डीसैलिनेशन प्लांट के कैंपस की एक इमारत को नुकसान पहुंचा है
- ये लगभग 11 करोड़ गैलन पानी का उत्पादन करता है. इससे कुवैत की जल आपूर्ति पर गंभीर दबाव बढ़ गया है.
लेकिन ईरान यहीं नहीं रुका.उसने बहरीन में भी डिसेलिनेशन प्लांट को टारगेट किया.बहरीन के गृह मंत्रालय ने एक्स पर लिखा. ईरानी आक्रामकता ने नागरिक लक्ष्यों पर बिना भेदभाव के हमला किया और एक ड्रोन हमले के बाद एक वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचाया.
यानी मीठे पानी पर हमले दोनों तरफ से शुरू हो चुके हैं.आशंका इस बात की है कि कहीं ये वाटर वार तेजी से फैल ना जाए. क्योंकि तुर्किए के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप एर्दोगान ने पहले ही इशारा कर दिया है कि अगली बड़ी जंग पानी को लेकर हो सकती है.
अगले बड़े युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि पानी के लिए
हमारे आसपास के संघर्षों में इसके शुरुआती संकेत अभी से दिखने लगे हैं. ईरान के डिसेलिनेशन प्लांट पर अटैक की शुरुआत अमेरिका ने की..जिसका बदला लेने के लिए ईरान ने खाड़ी के तमाम देशों को बूंद-बूंद के लिए तरसाने की तैयारी कर ली है.
ये खतरा तेजी से बढ़ रहा है कि ईरान मध्य पूर्व में सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन, ओमान के वॉटर प्लांट को तबाह कर सकता है. क्योंकि ईरान के पास एक गुप्त प्रलयकारी योजना है.जिसके तहत वो खारे पानी को मीठा करने वाले डिसेलिनेशन प्लांट पर हमला कर मिडिल ईस्ट को प्यासा मार सकता है. इसीलिए ईरान अब ड्रोन और मिसाइलों को वॉटर प्लांट को टारगेट करके दाग रहा है. सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत को निशाना बनाकर भेजे गए ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया. इसका निशाना सऊदी अरब के डिसेलिनेशन प्लांट थे.
क्या होता है डिसेलिनेशन प्लांट?
डिसेलिनेशन प्लांट के जरिए समुद्र के खारे पानी को साफ कर पीने योग्य मीठा पानी बनाया जाता है. डिसेलिनेशन का मतलब है पानी से नमक और दूसरे खनिजों को अलग कर देना. डिसेलिनेशन प्लांट उन देशों में ज्यादा हैं. जहां पर बारिश बेहद की कम होती है. नदियां नहीं होती और ग्राउंड वाटर सीमित होता है.जैसे कि खाड़ी के देश. इन देशों में 50 से लेकर 95फीसदी पानी की जरूरत डिसेलिनेशन प्लांट से ही पूरी होती है. मिडिल ईस्ट वो इलाका है..जहां पानी तेल से भी कीमती है.
- सऊदी अरब में दुनिया का सबसे बड़ा डिसेलिनेशन नेटवर्क है
- यूएई में पीने के पानी का बड़ा हिस्सा समुद्र से बनता है
- कतर और कुवैत जैसे देशों में पीने का पूरा पानी डिसेलिनेशन से ही आता है
इसलिए ईरान जिस रास्ते पर निकल पड़ा है.वो खाड़ी देशों को प्यासा मारने की तरफ लेकर जाता है. क्योंकि वाटर प्लांट पर हमले बढ़े तो इससे पूरे खाड़ी में अराजकता फैल सकती है. क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में करीब 95 फीसदी पानी डिसेलिनेशन से आता है. अगर ईरान भी वाटर प्लांट पर हमले तेज करता है तो पूरा खाड़ी क्षेत्र ठप हो सकता है.
इसमें कोई शक नहीं कि ये हाइब्रिड वॉरफेयर का दौर है यानी दुश्मन को हराने के लिए अब केवल सेना को मारना जरूरी नहीं बल्कि उसके रिसोर्सेज को खत्म करना भी मकसद होता है. अगर ईरान का वॉटर प्लांट फेल होते हैं तो वहां सिविल वॉर जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और इसी तरह अगर खाड़ी के देशो में वाटर प्लांट पर हमले होते हैं..तो पूरा मिडिल ईस्ट तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा. क्योंकि पानी का कोई विकल्प नहीं होता. न इसका कोई रणनीतिक भंडार होता है, न ही ऐसा कोई बाजार जहां से इसकी कमी को पूरा किया जा सके.
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