ईरान की मिसाइल ताकत से कांपा मिडिल ईस्ट, अंडरग्राउंड ‘मिसाइल सिटी’ का बड़ा खुलासा
मिडिल ईस्ट में ईरान की मिसाइलें तबाही मचा रही हैं.अमेरिका के बेस को लगातार ईरान टारगेट कर रहा है. ईरान की मिसाइलों से दुनिया खौफ खा रही है, लेकिन अमेरिका ने जो खुलासा किया है कि उससे ईरान के दुश्मन कांप जाते हैं...क्योंकि ईरान के मिसाइलों का जखीरा बहुत ज्यादा है.
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान ताबड़तोड़ हमला भी कर रहा है. तो रणनीति के साथ अमेरिका को उलझाने की कोशिश भी कर रहा है. एक तरफ तो ईरान लगातार मिडिल ईस्ट के उन देशों को टारगेट कर रहा है जहां पर अमेरिका के बेस हैं. ईरान लगातार इन देशों पर मिसाइल दाग रहा है.
ईरान की मिसाइलों को मार गिरना का दावा
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच शुक्रवार को इजरायल पर एक बार फिर ईरान ने मिसाइलों से हमला कर दिया. इजरायली सेना ने बताया कि ईरान की ओर से कई मिसाइलें दागी गई हैं. हालांकि इजरायल का दावा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइलों को आसमान में ही तबाह कर दिया है.
यह घटना दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव में एक और बढ़ोतरी का संकेत देता है...ईरान के हमलों की वजह से पूरी दुनिया परेशान है... क्योंकि ईरान ने मिडिल ईस्ट के देशों की ओर अपनी मिसाइलों का मुंह खोल दिया है...
रिपोर्टस के मुताबिक अब तक...
- ईरान में यूएई पर 245 मिसाइलें दागी हैं..
- जबकि कुवैत पर ईरान ने 243 मिसाइल अटैक किया
- बहरीन पर ईरान ने 103 मिसाइल हमला किया है.
- बहरीन में अमेरिका नेवी के 5वीं फ्लीट की हेडक्वार्टर है..जिसको ईरान लगातार टारगेट कर रहा है.
- कतर पर ईरान ने 145 मिसाइल दागी है.
- सऊदी अरब पर ईरान ने 21 मिसाइल दागी.
बैलिस्टिक मिसाइलों से ईरान का प्रहार
ये जो आकंड़े हैं. इनमें केवल बैलेस्टिक मिसाइलें शामिल हैं. ईरान ने क्रूज मिसाइलों से भी खूब हमला किया है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर भी खूब हमला किया है. जिससे दोनों देश परेशान हैं. ईरान ने मिसाइलों ने इजरायल को भी धुंआ धुंआ कर दिया है. ईरान की मिसाइलों की मार से पूरी मिडिल ईस्ट कराह रहा है. अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि ईरान के पास अभी भी 50 फीसदी से ज्यादा मिसाइले हैं...
यानि ईरान अभी हार नहीं मानने वाला है जबकि ट्रंप ने दावा किया था कि मिसाइल भंडारों को खत्म कर दिया गया है. एक नए इंटेलिजेंस आकलन में दावा किया गया है कि ईरान के लगभग 50% मिसाइल लॉन्चर और कामिकाजे ड्रोन अभी भी सुरक्षित हो सकते हैं. सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि ईरान के पास अभी भी मिडिल ईस्ट में भयानक तबाही मचाने के साजोसामान मौजूद है.
मिसाइल भंडार तक नहीं पहुंचा अमेरिका
आकलन में बताया गया है कि ईरान के कई मिसाइल भंडार तक अभी तक अमेरिकी पहुंचे भी नहीं हैं जबकि कई ऐसे मिसाइल भंडार ऐसे हैं जिनपर हमले तो हुए हैं लेकिन वो मिसाइलें मिट्टी के अंदर दब गये हैं लेकिन उनके अभी भी सुरक्षित होने की संभावना है. विभिन्न खुफिया अनुमानों के मुताबिक ईरान के पास मध्य पूर्व में बैलिस्टिक मिसाइलों का सबसे बड़ा जखीरा है, जो संख्या में लगभग 3000 के बीच हो सकती है.
इसमें मुख्य रूप से कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें यानि SRBM और MRBM शामिल हैं. जिन्हें अंडरग्राउंड ठिकानों सुरक्षित रखा गया है. हलांकि ये आकंड़े इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसी के मुताबिक है. लेकिन ईरान जितना दुनिया को बताता है...उससे कहीं ज्यादा हथियारों का खेप उसके पास है.
मिसाइल सिटी ऑफ ईरान
ये ईरान के मिसाइलों का शहर है. जिसको अभी कुछ दिन पहले ही ईरान की ओर से दिखाया गया था. यहां पर ईरान ने अंडरग्राउंड मिसाइलें छिपा रखी है. ईरान की ये सुविधाएं पहाड़ी इलाकों में 500 मीटर तक गहरी हैं. ये दुनिया की सबसे उन्नत भूमिगत सैन्य संरचनाओं में से एक हैं. ये ईरान के रणनीतिक मिसाइल आर्सेनल को सबसे उन्नत एयरस्ट्राइक से भी बचाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.
इन अंडरग्राउंड ठिकानों को केवल भंडारण बंकर के लिए नहीं इस्तेमाल किया जाता... बल्कि ये पूरी तरह से लॉन्च हब के रूप में काम करते हैं. इन अंडरग्राउंड टनल में कई एग्जिट प्वाइंट हैं...जहां जरूरत के हिसाब से लॉन्चर के जरिए मिसाइल लॉन्च किया जाता है.
मिसाइलों को जल्दी से रेल नेटवर्क के जरिए एग्जिट प्वाइंट पर लाया जाता है. उसके बाद वहां से लॉन्च किया जाता है. फौरन ही अंडरग्राउंड ठिकानों में वापस चले जाते हैं. माना जाता है कि इनमें खोर्रमशहर-4 और हाज कासेम जैसे लंबी दूरी के सिस्टम सहित हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें भी सुरक्षित रखी हुई हैं.
ईरान की ओर से लगातार विनाशकारी मिसाइलों से हमला किया जा रहा है. इससे पहले 2 मार्च को ईरान ने दावा किया था कि उसने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय और इजरायली वायु सेना कमांडर के ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया था, जिसमें उसने खुर्रमशहर-4 से मिसाइल से हमला किया था.
ईरान की मिसाइल ताकत, खोर्रमशहर-4
खोर्रमशहर-4 मिसाइल को खैबर के नाम से भी जाना जाता है. ये अपने दुश्मनों पर 2000 किलोमीटर तक वार करती है. इसकी रेंज सेज्जिल से थोड़ा कम है. ये वायुमंडल के बाहर 16 मैक और अंदर 8 मैक की गति तक उड़ान भर सकती है.
खोर्रमशहर-4 इस मिसाइल की चौथी पीढ़ी है. जो 1500 किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम है. ईरान को अपनी मिसाइल ताकत पर काफी भरोसा है..जिसके दम पर वो मिडिल ईस्ट का बेताज बादशाह बनना चाहता है. ईरान के जखीरे में ऐसी 9 मिसाइलें हैं जो इजरायल तक हमला कर सकती हैं....जिसमें पहले नंबर पर है सेजिल मिसाइल है. ये मिसाइल 17000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से अपने दुश्मनों पर हमला कर सकती है. साथ ही इसकी रेंज 2500 किलोमीटर है...मतलब की ये अपने दुश्मनों को बचने का मौका तक नहीं देती है.
- ईरान के जखीरे में शहाब-3 मिसाइल है
- ये दुश्मनों पर 2000 किलोमीटर तक हमला करने में सक्षम है
- 8643 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से जब ये हमला करती है तो बचने का मौका तक नहीं देती
- ये अपने साथ 1200 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जा सकती है.
110 कद्र मिसाइल
ईरान के पास कद्र-110 मिसाइल है. इसकी रेंज 1950 किलोमीटर है. तो वहीं ये 9000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हमला करती है. इसकी पेलोड क्षमता 650 किलोग्राम से 1000 किलोग्राम तक है. खामनेई के हथियार भंडारण में खैबर शेकन मिसाइल भी है..इसकी रेंज 1450 किलोमीटर है.तो वहीं स्पीड 5000 किलोमीटर प्रति घंटा है.
ईरान के पास फतह-2 मिसाइल है. ये हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. इसकी रेंज 1450 किलोमीटर है. तो वहीं से 6000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हमला करने में सक्षम है.
ईरान के पास हज कासिम मिसाइल है....
इसकी रेंज 1400 किलोमीटर है. तो वहीं 6000-15000 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से हमला करने में सक्षम है. ये अपने सात 500 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जा सकती है. ईरान की इन मिसाइलों से पूरा मिडिल ईस्ट कांपता है.
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चीन ने मध्य पूर्व में तनाव कम करने का किया आग्रह
बीजिंग, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के साथ सहयोग पर गुरुवार को आयोजित एक खुली बैठक में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने कहा कि सुरक्षा परिषद पर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में सदस्य देशों को बल प्रयोग की अनुमति देना अवैध सैन्य कार्रवाई को वैध ठहराने के बराबर होगा, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा परिषद को सावधानी से कदम उठाते हुए तनाव कम करने और संवाद व वार्ता को फिर से शुरू कराने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
फू त्सोंग ने जोर देकर कहा कि बल के जरिए शांति हासिल नहीं की जा सकती, बल्कि राजनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा कि जीसीसी देशों के पास क्षेत्रीय संघर्षों की जड़ों को समझने में विशेष क्षमता और अनुभव है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए और उनकी रणनीतिक स्वतंत्रता तथा एकजुटता का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में मौजूदा संघर्ष का मुख्य कारण अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किया गया सैन्य हमला है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन है। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए आवश्यक है कि अमेरिका और इजरायल तुरंत अपनी सैन्य कार्रवाई बंद करें।
फू त्सोंग ने आगे बताया कि हाल ही में चीन और पाकिस्तान ने खाड़ी क्षेत्र और मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए पांच-सूत्रीय पहल पेश की है। इस पहल में शत्रुता समाप्त करने, शीघ्र शांति वार्ता शुरू करने, गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता बनाए रखने का आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह पहल पूरी तरह खुली है और इसमें सभी देशों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया और भागीदारी का स्वागत है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
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