वित्त वर्ष 2026 में पैसेंजर व्हीकल और ट्रैक्टर सेक्टर ने दर्ज की मजबूत वृद्धि, 2027 में ग्रोथ स्थिर रहने का अनुमान: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया है। शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी सीजन में मजबूत मांग, जीएसटी दरों में कटौती और कई नए मॉडलों के लॉन्च के कारण पैसेंजर व्हीकल (पीवी) उद्योग में इस दौरान 7-9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज किए जाने का अनुमान है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में यह ग्रोथ थोड़ी धीमी होकर 4-6 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जिसकी मुख्य वजह मौजूदा उच्च आधार और बदलती आर्थिक परिस्थितियां हैं।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन के बाद भी पैसेंजर व्हीकल और ट्रैक्टर सेक्टर वित्त वर्ष 2027 में स्थिर स्थिति में रहेंगे। मजबूत मांग और कंपनियों की बेहतर वित्तीय स्थिति इन सेक्टर्स को सपोर्ट करती रहेगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑटो सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। खासकर यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की हिस्सेदारी कुल बिक्री में करीब 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो प्रीमियम वाहनों की बढ़ती मांग को दर्शाता है। इसके अलावा सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी भी बाजार को नया आकार दे रही है।
वहीं, ट्रैक्टर सेक्टर में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में ट्रैक्टर की थोक बिक्री में 22.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे अच्छे मानसून, बेहतर कृषि उत्पादन और ट्रैक्टर पर जीएसटी में कमी जैसे कारक अहम रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ट्रैक्टर उद्योग की बिक्री रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 में इसकी ग्रोथ 1-4 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है, क्योंकि मांग सामान्य स्तर पर लौट सकती है।
इसके बावजूद, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों की वित्तीय स्थिति कम कर्ज, बेहतर नकदी स्थिति और संचालन में सुधार के चलते मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पैसेंजर व्हीकल कंपनियां नए प्रोडक्ट और इलेक्ट्रिक वाहन प्लेटफॉर्म पर निवेश बढ़ाती रहेंगी, जबकि ट्रैक्टर कंपनियों को स्थिर लागत और बेहतर संचालन का लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वित्त वर्ष 2027 में भले ही ग्रोथ सामान्य हो जाए, लेकिन मजबूत मांग और बेहतर वित्तीय आधार के चलते ऑटो और ट्रैक्टर सेक्टर भविष्य में भी स्थिर प्रदर्शन बनाए रखने की स्थिति में हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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असम में गरजे अमित शाह, लाकर रहेंगे UCC, नहीं कर पाएगा कोई 4-4 शादी
असम के राजनीतिक परिदृश्य में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर कई अहम बातें कहीं. असम के गोलपाड़ा जिले में आयोजित एक चुनावी रैली में उन्होंने UCC को न केवल कानूनी सुधार बताया, बल्कि इसे सामाजिक संतुलन और सुरक्षा से भी जोड़ा.
UCC और घुसपैठ पर सख्त रुख
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि UCC लागू होने से कथित घुसपैठियों की बढ़ती आबादी पर रोक लगाई जा सकेगी. उनका कहना था कि यह कानून बहुविवाह जैसी प्रथाओं को सीमित करेगा, जिससे जनसंख्या असंतुलन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में एक जरूरी कदम बताया और कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
जनजातीय विकास, सरकार का फोकस
शाह ने रैली में यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर जनजातीय समुदायों के विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार कर रही हैं. उन्होंने नरेंद्र मोदी और हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य में दोबारा बीजेपी सरकार बनना जरूरी है.
#WATCH | Kamrup, Assam: Union Home Minister Amit Shah says, "... In 1962, when China attacked, the then-PM Jawaharlal Nehru left Assam... Today, I am saying that no one can seize even a single inch of Assam's land... We have worked to bring peace to Assam by signing 13… pic.twitter.com/v1Q6rCOwYC
— ANI (@ANI) April 3, 2026
UCC से बाहर रहेंगे जनजातीय क्षेत्र
एक अहम बिंदु पर जोर देते हुए शाह ने कहा कि UCC के दायरे से जनजातीय क्षेत्रों को बाहर रखा जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जनजातीय परंपराओं और अधिकारों का सम्मान करती है. उनका यह बयान उन चिंताओं को शांत करने की कोशिश माना जा रहा है, जो UCC को लेकर आदिवासी समुदायों में उठ रही थीं.
आदिवासी सशक्तिकरण का उदाहरण
शाह ने अपने भाषण में आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश को पहली बार एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिली हैं द्रौपदी मुर्मू. उन्होंने इसे केंद्र सरकार की समावेशी नीति का प्रतीक बताया और पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर इस दिशा में प्रयास न करने का आरोप लगाया.
मेघालय में घुसपैठ का मुद्दा
शाह ने पड़ोसी राज्य मेघालय का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि घुसपैठियों ने वहां राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है. उन्होंने दावा किया कि जनजातीय महिलाओं से विवाह के जरिए सत्ता पर पकड़ बनाने के प्रयास हुए, जिससे क्षेत्र में तनाव पैदा हुआ.
बीजेपी का वादा, घुसपैठ खत्म करेंगे
यही नहीं घुसपैठ को लेकर भी अमित शाह सख्त नजर आए. रैली के दौरान अमित शाह ने यह भी दोहराया कि यदि बीजेपी दोबारा सत्ता में आती है, तो घुसपैठ के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे पार्टी को एक और मौका दें, ताकि राज्य को सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सके.
विकास और सुरक्षा का संतुलन
अमित शाह का यह भाषण साफ करता है कि बीजेपी UCC, जनसंख्या नियंत्रण, और घुसपैठ जैसे मुद्दों को चुनावी रणनीति के केंद्र में रख रही है. साथ ही, जनजातीय विकास और सामाजिक संतुलन को भी समान महत्व दिया जा रहा है. आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इन मुद्दों को किस तरह से लेती है और किसे अपना समर्थन देती है.
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