भारत और रूस के बीच कुछ ना कुछ तो बहुत बड़ा चल रहा है। हमने आपको खबर बताई थी कि पुतिन के सबसे करीबी नेता और रूस के फर्स्ट डेपटी प्राइम मिनिस्टर डेनिस मंटूरोव भारत के दौरे पर हैं। व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, फर्टिलाइज़र्स, कनेक्टिविटी सभी को लेकर बातचीत चल रही है। लेकिन मामला तब दिलचस्प हुआ जब डेनिस मॉनटोरोव पीएम मोदी और भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल से मिलने पहुंच गए। पीएम मोदी ने डेनिस मॉनटोरोव को जो कहा वह शायद आज तक किसी नेता से नहीं कहा। दरअसल कई लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि भारत पाकिस्तान पर एक्शन लेगा। पीओके में कुछ ऑपरेशन करेगा। इसीलिए शायद रूस का एक डेलीगेशन भारत से मिलने आया है। लेकिन डिप्लोमेसी में ऐसा नहीं होता।
अगर भारत को कोई बड़ा ऑपरेशन करना होता तो भारत की टीम रूस पहुंचती। लेकिन यहां पर रूस भारत आया है। यानी साफ है कि इस वक्त रूस को भारत की जरूरत है। यहीं पर एंट्री होती है पीएम मोदी की। डेनिस मोंटरोव जब पीएम मोदी से मिलने पहुंचे तो पीएम मोदी ने कहा कि दूसरे घर में आपका स्वागत है। दूसरे घर में आपका विशेष स्वागत है। यानी पीएम मोदी ने रूसी डेलीगेशन से कहा कि भारत आपका दूसरा घर है। पीएम मोदी ने डेनिस मॉनटिरोव से कहा कि राष्ट्रपति पुतिन को मेरा संदेश भी पहुंचाइएगा। दरअसल इस वक्त रूस एक बड़ी दुविधा में फंसा है। इसीलिए रूस भारत को अपना दूसरा घर मानते हुए यहां पहुंचा है। रूस के पास पिछले 4 साल से चल रही जंग से हुए नुकसान की भरपाई का एक बड़ा मौका है। रूस दुनिया को तेल बेचकर जमकर पैसा कमाना चाहता है। लेकिन रूस की मजबूरी यह है कि वह सिर्फ कच्चा तेल बेच सकता है। मगर दुनिया की मजबूरी यह है कि वह रूस के कच्चे तेल को प्रोसेस नहीं कर सकती।
यानी बेचने वाला जो चीज बेचना चाहता है, खरीदने वाले को वह चीज नहीं चाहिए। इस वक्त दुनिया को कच्चे तेल से ज्यादा कच्चे तेल से तैयार होने वाला पेट्रोल और डीजल चाहिए। रूस मौजूदा स्थिति में कच्चे तेल से तैयार होने वाला पेट्रोल और डीजल नहीं बेच पा रहा है। इसकी पहली वजह यह है कि रूस के पास इतनी जल्दी और इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल बनाने के साधन नहीं है। दूसरा यह कि यूक्रेन ने रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर हमले कर दिए हैं। ऐसे में रूस ने भारत को अनलिमिटेड क्रूड ऑयल बेचने का ऑफर दिया है। बता दें कि भारत वो इकलौता देश है जिसके पास किसी भी प्रकार के कच्चे तेल को तुरंत और बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल में बदलने की टेक्नोलॉजी है। भारत रूस का तेल भी प्रोसेस कर सकता है और वेनेजुएला का भी।
इसीलिए पैसा कमाने के लिए रूस चाहता है कि भारत उसके कच्चे तेल को प्रोसेस करें और उससे बनने वाले फिनिश्ड प्रोडक्ट्स को अफ्रीका, यूरोप और चीन तक को बेच दे। बहरहाल अब रूस को भारत से कुछ चाहिए तो भारत ने भी कुछ ना कुछ मांगा होगा। यहीं पर एंट्री होती है एनएसए अजीत डोवाल की। सीढ़ियों से नीचे उतर रहे रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मोंटरोव अपने अधिकारियों के साथ एनएसए अजीत डोबाल से मिलने पहुंच गए। सबसे दिलचस्प बात यह है कि रूस के डेपुटी प्राइम मिनिस्टर बेसब्री से अजीत डोबाल का इंतजार करते दिखे। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो 83 साल के भारतीय धुरंधर की मुस्कुराहट बता रही है कि यहां पर किसी ना किसी की तो फील्डिंग सेट हो रही है। आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक अमेरिकी एजेंट मैथ्यु वेंडाइक था और बाकी के छह यूक्रेनी एजेंट्स थे। भारत इसी से जुड़ी कई और डिटेल्स रूस से मांग रहा है।
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भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ी बैठक हुई। बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज हमीदुल्लाह ने भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की और आपको बता दें यह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी। यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई जब पहले से दुनिया भर में हालात खराब हैं और खुद बांग्लादेश मुसीबत में फंसा हुआ है। बैठक में दोनों पक्षों ने साफ तौर पर यह संकेत दिए कि भारत और बांग्लादेश अब अपने रक्षा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं। खासतौर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैनिकों के आदान-प्रदान और नए रक्षा सहयोग के रस्ते पर गहन चर्चा हुई। इस मुलाकात के मायने इसलिए बड़े हैं क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। ऐसे में भारत और बांग्लादेश का एक साथ ताना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
एक तरफ रक्षा सहयोग मजबूत करने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ भारत लगातार मुश्किल वक्त में बांग्लादेश के साथ खड़ा भी नजर आ रहा है। हाल ही में ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश की मदद के लिए भारत ने कई कदम उठाए। भारत बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए हाई स्पीड डीजल की सप्लाई बढ़ाई गई। हजारों टन निधन भेजकर भारत ने यह दिखाया कि वह बांग्लादेश की मदद के लिए उसके साथ खड़ा है। दरअसल ईरान युद्ध के असर से बांग्लादेशी ऊर्जा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बिजली कटौती उद्योगों पर असर और आर्थिक दबाव इन सबके बीच भारत की मदद उसके लिए राहत बनकर आई है। अब अगर राजनीतिक एंगल देखें तो यह बदलाव और भी दिलचस्प हो जाता है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के हटने के बाद मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की कमान संभाली। उनके आने के साथ-साथ भारत बांग्लादेश के रिश्तों में खटास भी देखने को मिली।
यूनुस के राज में बॉयकॉट इंडिया जैसे अभियान और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। क्योंकि यूनुस आए दिन भारत के खिलाफ बयानबाजी करते नजर आते थे और उनके ही राज में बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों ने खूब उत्पात भी मचाया। लेकिन अब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने रुख बदलते हुए भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की है और यही वजह है कि आज दोनों देशों के बीच बातचीत सहयोग और भरोसा फिर से पटरी पर लौटता दिखाई दे रहा है और इसी बीच बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज हमीदुल्लाह ने भारत की सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की और देखा जाए तो यह मुलाकात भी एक बड़े बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।
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