Railway Ticket Cancellation Rules: रेल यात्रियों को बड़ा झटका! अब 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल नहीं की, तो मिलेगा 'जीरो' रिफंड; जानें नए नियम
Railway Ticket Cancellation Rules: भारतीय रेलवे के नए नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से ट्रेन छूटने के 8 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करने पर अब कोई रिफंड नहीं मिलेगा। रिफंड की राशि को समय के आधार पर तीन श्रेणियों (75%, 50%, और 0%) में बांटा गया है, जिससे यात्रियों को अब अपनी यात्रा रद्द करने का फैसला बहुत पहले लेना होगा।
कनाडा में मंदिरों के बाहर प्रदर्शन की योजना बना रहे खालिस्तानी संगठन, हिंदू समूहों ने की निंदा
ओटावा, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। दुनिया भर में हिंदू समर्थक कई संगठनों ने शुक्रवार को खालिस्तानी कट्टरपंथी ग्रुप सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के कनाडा में हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के आह्वान की कड़ी निंदा की।
संगठनों ने संभावित गड़बड़ी पर चिंता जताई और अधिकारियों से धार्मिक जगहों व समुदायों की सुरक्षा पक्का करने की अपील की।
एसएफजे ने हिंदू कैनेडियन फाउंडेशन (एचसीएफ) के विरोध में 5 अप्रैल को ब्रैम्पटन में त्रिवेणी मंदिर और सरे में लक्ष्मी नारायण मंदिर के सामने “खालिस्तान जिंदाबाद” रैलियों की घोषणा की।
एचसीएफ ने प्लान की गई रैलियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “भारत में उनकी पुरानी जड़ों या स्थानीय सांस्कृतिक पहचान की वजह से हिंदू समुदाय को टारगेट करना स्पष्ट रूप से जेनोफोबिया और हिंदूफोबिया है।”
संगठन ने कनाडाई पुलिस से 5 अप्रैल को मंदिर परिसर और भक्तों के लिए पूरे दिन सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। इसके साथ ही खालिस्तानी कट्टरपंथी समूहों के प्लान किए गए विरोध को लेकर संगठन ने कहा कि उनका हिंसक और कट्टरपंथी व्यवहार का इतिहास रहा है।
इस बीच, कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) ने भी एसएफजे के हिंदू मंदिरों के बाहर विरोध करने की योजना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस कट्टरपंथी समूह के हिंसा के पिछले रिकॉर्ड पर चिंता जताई। सीओएचएनए ने हिंदू भक्तों पर मध्ययुगीन तरीके का हमला और 3 नवंबर, 2024 को मंदिरों पर हमला किया।
संगठन ने कहा कि जो हिंदू भक्त प्रार्थना और आध्यात्मिक जुड़ाव के लिए मंदिरों में जाते हैं उन्हें अक्सर मंदिर के गेट पर जोरदार और गाली-गलौज वाले प्रदर्शनों के साथ-साथ हिंसक हालात और आतंकवाद के महिमामंडन का सामना करना पड़ता है।
सीओएचएनए ने कहा, यह कुछ और नहीं बल्कि धार्मिक कट्टरता और लक्षित उत्पीड़न है जिसे बोलने की आजादी और राजनीतिक अभिव्यक्ति के नाम पर दिखाया जाता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हिंदू कनाडाई फाउंडेशन को भी बोलने की आजादी है, और एक संगठन को चुप कराने के लिए पूरे समुदाय के खिलाफ विरोध की धमकी देना कनाडा के निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन है।
सीओएचएनए ने पील रीजनल पुलिस द्वारा ब्रैम्पटन में ‘पब्लिक न्यूसेंस डेमोंस्ट्रेशन से पूजा स्थलों की सुरक्षा’ से जुड़े बाय-लॉ को लागू करने के वादे का स्वागत किया और उसकी सराहना की। इसने कहा कि त्रिवेणी मंदिर के चारों ओर 100 मीटर का सेफ्टी जोन बनाकर, कनाडाई अधिकारियों ने आखिरकार यह मान लिया है कि बोलने के अधिकार में किसी जमात को शारीरिक या मानसिक तौर पर घेरने का अधिकार नहीं है।
संगठन ने सरे की पुलिस और अधिकारियों से तुरंत ध्यान देने और लक्ष्मी नारायण मंदिर के लिए भी ऐसे ही सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा।
--आईएएनएस
केके/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Moneycontrol
News Nation



















