Iran-US War: ईरान ने मार गिराया अमेरिका का दूसरा F-35? कुवैत में तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना, मची तबाही
Middle East Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को 'पत्थर युग' में भेजने की धमकी के बाद ईरान ने अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ा दी है। ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) ने कुवैत की एक बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाते हुए कई ड्रोन दागे।
चश्मदीदों के अनुसार, धमाके इतने जोरदार थे कि रिफाइनरी के बड़े हिस्से में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए स्थानीय दमकल टीमें संघर्ष कर रही हैं। ईरान का यह हमला सीधे तौर पर इजरायल के सहयोगियों और खाड़ी क्षेत्र में तेल की वैश्विक सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश मानी जा रही है।
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— FalconUpdatesHQ (@FalconUpdatesHQ) April 3, 2026
???????? Kuwait oil refinery damaged in an Iranian drone attack
⚡️????Iran also warns of strikes on regional energy and telecom firms if the US hits power plants
???????????????? US and Israel tensions with Iran continue to escalate pic.twitter.com/gptcs7h7M2
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका को तगड़ा झटका: एक और F-35 फाइटर जेट गिराने का दाव
कुवैत पर हमले के बीच, ईरान ने एक और बड़ी सैन्य सफलता का दावा कर दुनिया को चौंका दिया है। ईरानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने खाड़ी के ऊपर उड़ रहे अमेरिका के सबसे आधुनिक और महंगे 'स्टेल्थ' फाइटर जेट F-35 को मार गिराया है।
यह एक हफ्ते के भीतर अमेरिका का दूसरा बड़ा नुकसान बताया जा रहा है। हालांकि, पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि उनके पास विमान के मलबे और पायलट के पैराशूट के साथ वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।
ट्रंप की धमकियों के बाद 'सुसाइडल' मोड में ईरान की जवाबी कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब उस स्थिति में पहुंच गया है जहां वह 'आर-पार' की लड़ाई के लिए तैयार है। ट्रंप ने हाल ही में ईरान के 37 हजार करोड़ के ब्रिज को तबाह करने के बाद उसे समझौते का अल्टीमेटम दिया था, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत में इजरायली हितों और अमेरिकी सैन्य उपकरणों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि अमेरिका उनके देश के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाएगा, तो वे पूरे खाड़ी क्षेत्र की शांति और अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर देंगे। ईरान के इन हमलों ने खाड़ी में तैनात अमेरिकी बेड़ों को हाई अलर्ट पर रहने को मजबूर कर दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और मिडिल ईस्ट में परमाणु युद्ध का बढ़ता खतरा
कुवैत की रिफाइनरी पर हमले और अमेरिकी जेट के गिरने से मिडिल ईस्ट का संकट अब बेकाबू होता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही तनाव में है, और अब कुवैत जैसे तटस्थ क्षेत्र में हमलों से वैश्विक तेल कंपनियों के बीच डर का माहौल है।
यदि अमेरिका इस नुकसान का बदला लेने के लिए ईरान के परमाणु ठिकानों पर सीधा हमला करता है, तो यह संघर्ष पूर्ण पैमाने के महायुद्ध में बदल सकता है।
Custom Rules: विदेश से ला रहे गोल्ड या महंगे गैजेट? तो किन बातों को जानना जरूरी, नोट कर लें
Custom Rules: विदेश से भारत लौटते समय सोना, ज्वेलरी या महंगे गैजेट्स साथ लाने को लेकर यात्रियों में अक्सर भ्रम बना रहता है। कई लोग डरते हैं कि कहीं एयरपोर्ट पर परेशानी न हो जाए। दरअसल, ज्यादातर मामलों में समस्या सामान लाने पर नहीं, बल्कि नियमों की सही जानकारी न होने और डिक्लेरेशन न करने पर होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रोजमर्रा के इस्तेमाल की ज्वेलरी पर आमतौर पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। अगर वह सामान्य मात्रा में पहनी हुई हो। जैसे कुछ सोने के गहने, शादी का सेट या नियमित उपयोग के आभूषण। लेकिन अगर ज्वेलरी ज्यादा मात्रा में हो या पैक करके लाई जा रही हो, तो कस्टम अधिकारियों को शक हो सकता कि यह व्यक्तिगत उपयोग के बजाय व्यापार या निवेश के लिए लाई जा रही। ऐसे मामलों में पूछताछ हो सकती।
महंगे गहने का रिकॉर्ड जरूरी है
महंगे गहनों के साथ यात्रा करते समय उनकी खरीद की रसीद या पहले से मालिकाना हक का कोई प्रमाण साथ रखना फायदेमंद हो सकता है। इससे जरूरत पड़ने पर आप आसानी से अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
सोने की ईंट को लेकर नियम ज्यादा सख्त
सोने की ईंट (गोल्ड बार) या सिक्कों के मामले में नियम ज्यादा सख्त हैं। इन्हें बुलियन माना जाता है और इन पर कस्टम ड्यूटी लागू होती। साथ ही, इन्हें लाने के लिए कुछ शर्तें भी होती हैं, जैसे विदेश में रहने की अवधि और व्यक्ति की रेजिडेंसी स्थिति।
विदेश से बिना घोषणा के गोल्ड बार लाए तो फंस सकते
अगर कोई यात्री बिना डिक्लेयर किए बड़ी मात्रा में गोल्ड बार या सिक्के लाता है, तो सामान जब्त हो सकता है और जुर्माना भी लग सकता है। कई मामलों में एयरपोर्ट पर ही ड्यूटी भरनी पड़ती है।
इलेक्ट्रॉनिक आयटम को लेकर भी सावधानी जरूरी
इलेक्ट्रॉनिक सामान को लेकर भी सावधानी जरूरी है। एक लैपटॉप या एक कैमरा व्यक्तिगत उपयोग के लिए सामान्य माना जाता है, लेकिन अगर कोई यात्री कई महंगे गैजेट्स या सील पैक बॉक्स में सामान लाता है, तो कस्टम जांच बढ़ सकती है। प्रोफेशनल उपकरण के मामले में संबंधित दस्तावेज साथ रखना बेहतर रहता है।
यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गिफ्ट आइटम- जैसे मोबाइल, घड़ी या अन्य महंगे सामान, भी बैगेज वैल्यू में गिने जाते हैं। तय सीमा से ज्यादा होने पर ड्यूटी देनी पड़ सकती है।
सामान नया है या इस्तेमाल किया हुआ, इससे भी फर्क पड़ता है। इस्तेमाल किए गए सामान को आमतौर पर पर्सनल इफेक्ट माना जाता है, जबकि नए और पैक सामान को हाल ही में खरीदा गया माना जा सकता है।
अगर किसी को नियमों को लेकर संदेह है, तो सबसे सुरक्षित तरीका है कि एयरपोर्ट पर स्वेच्छा से डिक्लेरेशन कर दिया जाए। ड्यूटी देना भले थोड़ा असुविधाजनक लगे, लेकिन सामान जब्त होने या जुर्माने से बचना ज्यादा जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा को आसान बनाने के लिए पहले से नियमों की जानकारी लेना और जरूरी दस्तावेज साथ रखना जरूरी है। इससे कस्टम जांच एक सामान्य प्रक्रिया बन जाती है, न कि तनाव का कारण।
(प्रियंका कुमारी)
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