सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे
सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने हाल ही में बताया कि सैफ कई बार उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में दे देते थे। यह बात उन्होंने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब शो में बताई। सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा पटौदी ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा पटौदी परिवार के महल में बिताया। हालांकि, सोहा ने बताया कि घर में उन्हें कभी शाही जिंदगी जैसा एहसास नहीं कराया गया। उनके पिता पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को खर्चों की अहमियत समझाते थे। सोहा ने कहा कि उनके पिता घर में बिजली बचाने पर जोर देते थे और पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स पर लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में दोस्तों के घर जाने की अनुमति कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि पेट्रोल पर फालतू का खर्च नहीं होना चाहिए। 100 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने पॉकेट मनी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें और सोहा को 100 रुपए मिलते थे। वहीं, उस समय सैफ अली खान इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान सोहा ने हंसते हुए कहा कि सैफ पैसे चुरा लेते थे। इस पर सबा ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तो उन्हें 5 पाउंड मिलते थे, जिन्हें सैफ अक्सर उधार ले लेते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सैफ उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में वापस दे देते थे। सैफ की पहली शादी में नहीं पहुंचीं बहनें इसी इंटरव्यू में सोहा और सबा ने बताया कि वे भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। सबा पटौदी ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी।
पंजाब- दोस्त बनाकर कारोबारी की हत्या:पठानकोट में 2 भाइयों ने शराब पिलाई, ₹95 हजार लूटे, फिर नहर में धक्का दिया
पठानकोट में कर्नाटक के कारोबारी (50) की हत्या मामले में नए खुलासे हुए हैं। कारोबारी लक्ष्मण एम कर्नाटक से अमृतसर के लिए निकले थे। अमृतसर में जहाज से उतरकर उन्हें बटाला में सीएनसी मशीन देखने के लिए जाना था। लेकिन, उससे पहले वह पठानकोट में रहने वाले अपने दोस्त से मिलने के लिए अमृतसर से सीधा पठानकोट आ पहुंचे। जहां उन्हें ऑटो ड्राइवर सुनील कुमार मिल गया। जिसके बाद इस शातिर ऑटो ड्राइवर ने अपने भाई प्रवीण को साजिश में शामिल किया और कारोबारी के खाते से 95 हजार निकलवाकर उसे नहर में धक्का दे दिया। उसके अगले दिन कारोबारी की लाश सुंदरचक्क में नहर के पौने में फंसी मिली। इस बीच आरोपी ठाठ से अपने घर पहुंचा और ऐसे दिखाया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। अब मर्डर की पूरी कहानी पढ़िए… बिजनेस डील के लिए पंजाब का सफर कर्नाटक के मैसूर शहर के रहने वाले 50 वर्षीय व्यवसायी लक्ष्मण एम. 18 जुलाई की दोपहर करीब 1:30 बजे अपने घर से निकले। उन्होंने अपने परिजनों को बताया कि वे पंजाब के बटाला जा रहे हैं, जहां उन्हें अपने बिजनेस के सिलसिले में एक सीएनसी वर्टिकल टर्निंग लेंथ मशीन का निरीक्षण करना था। वे बेंगलुरु एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़कर अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचे। अमृतसर से पठानकोट आया, ऑटो ड्राइवर से मुलाकात अमृतसर से सीधा आगे बढ़ते हुए लक्ष्मण एम. ने बटाला में अगले दिन जाने का प्लान बनाया। इससे पहले वो अपने दोस्त से मिलने के लिए पठानकोट पहुंचे। पठानकोट के चक्की पुल पर उनकी मुलाकात लोकल ऑटो ड्राइवर सुनील से हुई। लक्ष्मण एम. ने पठानकोट में घूमने और अपने काम के लिए प्रवीन का ऑटो किराए पर (हायर) किया। बातों में फंसाकर पिलाई शराब पुलिस के मुताबिक लक्ष्मण एम. शराब के शौकीन थे। इसी बात का फायदा उठाते हुए सफर के दौरान ऑटो ड्राइवर सुनील ने कारोबारी को अपनी मीठी बातों में फंसा लिया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और उन्होंने मिलकर शराब पीने की योजना बनाई। प्रवीन उन्हें चक्की पार हिमाचल के इलाके में ले गया। जहां दोनों ने बैठकर शराब पी। शराब के नशे में कारोबारी लक्ष्मण एम. अपनी सुधबुध खो गया। मन में लालच आया, भाई को साजिश में किया शामिल कारोबारी को नशे की हालत में देखकर ऑटो ड्राइवर सुनील के मन में लालच आ गया। उसने अपना ऑटो एक सुरक्षित स्थान पर पार्क किया और तुरंत मामून में बार्बर का काम करने वाले अपने भाई प्रवीण को फोन करके बुला लिया। दोनों भाइयों ने कारोबारी से बड़ी रकम ऐंठने की साजिश रची। वे अपनी निजी ऑल्टो कार लेकर आए और कारोबारी लक्ष्मण एम. को कार में बैठाकर सुंदरचक्क रोड की ओर निकल पड़े। इस दौरान उन्होंने लक्ष्मण एम. को बातों में उलझाकर 5 हजार का पेट्रोल अपनी कार में डलवाया। धोखे से UPI पासवर्ड लिया और उड़ाए ₹95,000 गाड़ी में घूमते-घूमते आरोपियों ने मौका पाकर कारोबारी का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद तीनों ने घरोटा में एक बार फिर कार रोककर शराब पी। जिससे कारोबारी को और नशा चढ़ गया। नशे और दबाव का फायदा उठाकर दोनों ने धोखे से उसके बैंक खातों और गूगल पे का पासवर्ड हासिल कर लिया। परिवार का दावा है कि आरोपियों ने लक्ष्मण के साथ मारपीट की और जबरदस्ती कारोबारी के दो अलग-अलग बैंक खातों से पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर लिए। मृतक भाई के खाते में डलवाए पैसे थाना सुजानपुर प्रभारी अरुण ने बताया कि सुनील का एक अन्य भाई सुशील कुमार भी था। जिसकी मौत 25 नवंबर को हो गई थी। सुनील के पास उसके मोबाइल की सिम थी। जो कि, सुशील के बैंक अकाउंट के साथ अटैच थी। सुनील ने इसी बात का फायदा उठाया और सुशील के नंबर पर 50 हजार ट्रांसफर कर दिए। वहीं, साथ मौजूद अपने दूसरे भाई प्रवीण के बैंक अकाउंट में 40 हजार डलवा दिए। इस तरह कुल 95 हजार की ठगी की गई। भेद खुलने के डर से UBDC नहर में दिया धक्का पैसे ट्रांसफर करने के बाद दोनों भाइयों के मन में यह खौफ बैठ गया कि होश में आते ही कारोबारी पुलिस के पास जाएगा, जिससे उनकी पहचान उजागर हो जाएगी और वे पकड़े जाएंगे। इसी डर के कारण दोनों ने सुंदरचक रोड के पास बहती यूबीडीसी (UBDC) नहर के किनारे गाड़ी रोकी और कारोबारी लक्ष्मण एम. को नहर में धक्का दे दिया, जिससे डूबने से उनकी मौत हो गई। शव की पहचान के बाद ऐसे खुला कत्ल का राज
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