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गर्मियों का सुपरफ्रूट : बढ़ती गर्मी में तन को सुकून और चेहरे को निखार देता है खरबूजा

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने और स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए खरबूजा एक बेहतरीन फल है। आयुर्वेद के अनुसार, खरबूजा गर्मियों के लिए वरदान से कम नहीं है। यह न सिर्फ प्यास बुझाता है बल्कि शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है।

खरबूजे में लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाता है। इसमें उच्च मात्रा में फाइबर, विटामिन ए, विटामिन सी और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक साबित होते हैं।

आयुर्वेद में खरबूजे को ठंडा और पित्त शामक माना गया है। गर्मी में यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है। इसे कटकर, जूस बनाकर या सलाद के रूप में रोजाना शामिल किया जा सकता है।

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, गर्मियों में खरबूजे का सेवन न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है बल्कि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध फल भी है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर से सलाह के बाद ही सेवन करना चाहिए। खरबूजे को गर्मियों का सुपर फ्रूट कहा जाता है और इसके सेवन से शरीर को एक-दो नहीं कई फायदे मिलते हैं। इसके सेवन से शरीर हाइड्रेट रहता है, गर्मी में पसीना ज्यादा आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। खरबूजा प्राकृतिक रूप से पानी की पूर्ति करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।

खरबूजा में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुधारता है, कब्ज की समस्या दूर करता है और पेट साफ रखता है। विटामिन सी से भरपूर खरबूजा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है, जिससे गर्मी में होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। वजन को नियंत्रित करने में भी खरबूजा कारगर है। कम कैलोरी वाला यह फल फाइबर से भरा होता है, जिसके कारण पेट भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार खाने की आदत पर लगाम लगती है।

खरबूजा में विटामिन ए और सी पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं। गर्मी में धूप और पसीने से जो त्वचा प्रभावित होती है, खरबूजा उसे निखारने में सहायक है। खरबूजा आंखों की सेहत के लिए भी अच्छा है। विटामिन ए आंखों की रोशनी बनाए रखने और आंखों की थकान कम करने में मदद करता है।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र में 2015 से अब तक हुआ 39,272 करोड़ रुपए का निवेश, समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात हुआ दोगुना

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि भारत का मत्स्य पालन क्षेत्र (फिशरीज सेक्टर) अब खाद्य सुरक्षा, रोजगार और निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला क्षेत्र बन गया है। साल 2015 से अब तक इस सेक्टर में रिकॉर्ड 39,272 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अनुसार, यह सेक्टर प्राथमिक स्तर पर करीब 3 करोड़ मछुआरों और मछली पालकों को रोजगार देता है, जबकि पूरी वैल्यू चेन में इससे लगभग दोगुने लोगों को रोजगार मिलता है।

मंत्रालय के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक मछली उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है।

देश में मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया है, जो औसतन करीब 7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाता है।

समुद्री उत्पादों का निर्यात भी पिछले दशक में दोगुना से ज्यादा हो गया है। यह 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपए पहुंच गया है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान झींगा (श्रिम्प) निर्यात का है, जिसकी कीमत 43,334 करोड़ रुपए रही।

भारत अब करीब 130 वैश्विक बाजारों में 350 से ज्यादा तरह के समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। 2024-25 में कुल निर्यात मूल्य का 36.42 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को गया, इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व का स्थान रहा।

निर्यात में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई है और इसकी कुल कीमत 742 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।

इस बीच, कुछ चुनिंदा उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत ट्यूना, सीबास, कोबिया, मड क्रैब, टाइगर श्रिम्प और समुद्री शैवाल (सीवीड) जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ ही कोल्ड-चेन नेटवर्क, आधुनिक मछली पकड़ने के बंदरगाह और डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम में निवेश किया जा रहा है।

भारत को 2025 में अमेरिका के समुद्री स्तनधारी संरक्षण अधिनियम (एमएमपीए) के तहत कम्पैरेबिलिटी का दर्जा भी मिला है, जिससे उसके सबसे बड़े बाजार में समुद्री उत्पादों का निर्यात बिना रुकावट जारी रहेगा।

सरकार ने बताया कि तटीय राज्यों में झींगा पकड़ने वाले ट्रॉलर में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइसेस (टीईडी) लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है।

नियामकीय स्तर पर, सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बना दिया गया है और इसे नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ दिया गया है, जिससे मंजूरी का समय 30 दिनों से घटकर सिर्फ 72 घंटे रह गया है।

आने वाले पांच वर्षों में सरकार वैल्यू-एडेड निर्यात को और बढ़ाने, इनलैंड एक्सपोर्ट हब विकसित करने और यूके, यूरोपीय संघ, एसियन (एएसईएएन) और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में भारत की मौजूदगी मजबूत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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