Parle-G खाकर गुजारे दिन, कॉफी शॉप में किया काम, अब करोड़ों का मालिक है ये नेशनल अवार्ड विनर
Bollywood Actor Struggle: बॉलीवुड इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं है. हर कोई एक्टिंग की दुनिया में स्टार बनने का सपना लेकर आता है. लेकिन इनमें से कुछ सर्पोटिंग एक्टर, कुछ बस चंद भर के लिए ही फिल्मों में दिख पाते हैं. वहीं, कुछ को तो एक्टिंग में कदम रखने का भी मौका नहीं मिल पाता. हम आज एक ऐसे एक्टर की बात करने जा रहे हैं, जो एक नेशनल अवॉर्ड विनर हैं. लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी मुसीबतों का सामना किया है.
कौन है ये नेशनल अवॉर्ड विनर?
हम बात कर रहे हैं, '12वीं फेल' फेम विक्रांत मैसी की. एक्टर 3 अप्रैल को अपना 39वां जन्मदिन (Vikrant Massey Birthday) मना रहे हैं. विक्रांत ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टीवी से की थी. इसके बाद वो फिल्मों में साइड रोल में नजर आते थे और धीरे-धीरे उन्हें लीड रोल मिलने लगे. लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था. उन्होंने अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष किए हैं. घर की तंगी के चलते उन्होंने 16 साल की छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था.
कॉफी शॉप में काम करते थे एक्टर
विक्रांत मैसी ने एक पुराने इंटरव्यू में अपने स्ट्रग्ल के दिनों के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था- 'मैं 16 साल का था, जब पहली बार मैंने कैमरा फेस किया था. मुझे आज भी वो तारीख याद है. वो 19 दिसंबर 2004 का दिन था. कैमरे के सामने आने से पहले, विक्रांत ने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मुंबई में एक कॉफी शॉप में कर्मचारी के रूप में काम किया था.' वहीं, विक्रांत ने ये भी बताया था कि वो श्यामक डावर के डांस ग्रुप में एक असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर का भी काम कर चुके हैं.
Parle-G खाकर गुजारा किया
विक्रांत मैसी ने बताया था कि वो 16 साल के थे जब हर दिन 4 लोकल ट्रेनें बदलकर सफर करते थे और दिन में 16 घंटे काम करते थे. एक्टर ने कहा था- 'मैं अक्सर Parle-G खाकर और सिर्फ पानी पीकर गुजारा करता था. कोई भी अपनी मर्जी से ऐसा नहीं करता है. खासकर एक कम उम्र का लड़का तो ये सब नहीं करता. मैंने किया, क्योंकि मुझे करना पड़ा.' एक्टर ने इस दौरान ये भी बताया कि उन्होंने एक फैंटेसी शो पर काम किया था, लेकिन प्रोग्राम को प्लान के मुताबिक कभी एयर नहीं किया गया.
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टीवी से फिल्मों के लिए खुले रास्ते
इसके बाद विक्रांत मैसी ने टेलीविजन में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने टीवी शो 'धूम मचाओ धूम' (2007) से शुरुआत कर बालिका वधू से पहचान बनाई. फिर फिल्मों में आने का रास्ता बनाया और 2013 में फिल्म लुटेरा से बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद 'दिल धड़कने दो' और 'ए डेथ इन द गंज' जैसी फिल्मों में काम किया. विक्रांत ने ओटीटी पर मिर्जापुर' और 'क्रिमिनल जस्टिस' जैसी वेब सीरीज भी की. फिर एक्टर की लाइफ में बदलाव आया और उन्हें 'छपाक', 'हसीन दिलरुबा', 'लव हॉस्टल' जैसी फिल्में मिली.
'12वीं फेल' से चमकी किस्मत
साल 2023 में आई फिल्म '12वीं फेल' ने तो विक्रांत मैसी की किस्मत बदल दी. 12वीं फेल के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड मिला. इतना ही नहीं, इसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया. कड़ी मेहनत कर आज एक्टर करोड़ों की नेटवर्थ (Vikrant Massey Net worth) के मालिक है. रिपोर्ट्स के मुताबकि, उनके पास 25-26 करोड़ की संपत्ति है. एक्टर एक्टिंग के अलावा ब्रांड एंडोर्समेंट से भी कमाई करते हैं. विक्रांत की अपकमिंग फिल्म की बात करे तो वो 'व्हाइट' में श्री श्री रविशंकर के रोल में नजर आएंगे.
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आर्टेमिस 2 में 'स्पेस प्लंबर' बनीं क्रिस्टीना कोच, जानें स्पेस में कैसे काम करता है टॉयलेट
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए मजेदार जानकारी दी। वीडियो में आर्टेमिस 2 मिशन की एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना हैमक कोच ने एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने खुद को ‘स्पेस प्लंबर’ कहकर पुकारा और बताया कि स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट में आई खराबी को उन्होंने ही ठीक किया।
नासा ने वीडियो में क्रिस्टीना को यह कहते हुए दिखाया कि “मैं ही स्पेस प्लंबर हूं और मुझे इस पर गर्व है।”
आर्टेमिस 2 मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स चांद की यात्रा पर गए हैं। इस दौरान स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट में थोड़ी समस्या आई। क्रिस्टीना ने बताया, “शुरू में हमें लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में पता चला कि यह ‘प्राइमिंग’ की छोटी-सी दिक्कत थी। अब सब ठीक है और हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।”
लंबे समय से सवाल रहा है कि अंतरिक्ष में टॉयलेट कैसे काम करता है? वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण की वजह से कचरा नीचे गिर जाता है, लेकिन अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने से यह संभव नहीं है। इसलिए स्पेस एजेंसी का यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (यूडब्ल्यूएमएस) हवा के बहाव का इस्तेमाल करता है। हवा का तेज प्रवाह पेशाब और मल को शरीर से दूर खींचकर सही जगह पर जमा कर देता है।
यूडब्ल्यूएमएस को आर्टेमिस के लिए और बेहतर बनाया गया है। इसमें ढक्कन उठाते ही हवा का बहाव अपने आप शुरू हो जाता है, जिससे बदबू नहीं फैलती। यह सिस्टम पहले तैयार टॉयलेट से 65 प्रतिशत छोटा और 40 प्रतिशत हल्का है। आर्टेमिस 2 जैसे छोटे मिशनों में कचरे को केमिकल से ट्रीट नहीं किया जाता, बल्कि उसे बाद में ठिकाने लगाने के लिए जमा कर लिया जाता है।
टॉयलेट का डिजाइन महिला एस्ट्रोनॉट्स के सुझावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें एक खास आकार का फनल और नली का इस्तेमाल पेशाब के लिए किया जाता है, जबकि मल त्याग के लिए सीट का इस्तेमाल होता है। दोनों को एक साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सीट छोटी और नुकीली लगती है, लेकिन कम गुरुत्वाकर्षण में यह शरीर से पूरी तरह सटकर बैठती है, जिससे सब कुछ सही जगह पर जाता है।
नासा स्पेस स्टेशन पर पानी के लगभग 90 प्रतिशत लिक्विड को रीसायकल करता है, जिसमें यूरिन और पसीना भी शामिल है। यूडब्ल्यूएमएस इस रीसाइक्लिंग सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जुड़ता है, जिससे ज्यादा पानी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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