Pakistan Fuel Crisis: पाकिस्तान में गिरा 'फ्यूल बम', पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये के पार, जनता में मचा भारी हाहाकार
पड़ोसी देश पाकिस्तान में महंगाई ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। गुरुवार देर रात सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि का ऐलान किया।
नई घोषणा के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर पर पहुँच गई है।
Petrol hiked to Rs458.40, diesel Rs520.35 per litre
— The News (@thenews_intl) April 2, 2026
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सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान की आम जनता के बीच गहरा रोष है, क्योंकि एक ही झटके में पेट्रोल में 137.24 रुपये और डीजल में 184.49 रुपये का इजाफा किया गया है।
मिडिल ईस्ट संकट और IMF की शर्तें बनीं भारी वृद्धि की वजह
सरकार ने इस बेतहाशा बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो कारण बताए हैं। पहला, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं। दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ हुआ समझौता है।
पाकिस्तान को आर्थिक मदद हासिल करने के लिए पेट्रोलियम लेवी में रिकॉर्ड वृद्धि करनी पड़ी है। वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान पर भारी वित्तीय दबाव है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण सब्सिडी देना अब मुमकिन नहीं रह गया है, जिसके चलते यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।
ट्रांसपोर्टेशन ठप और बढ़ती महंगाई से अवाम में हाहाकार
डीजल की कीमतों में 184 रुपये की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि का सीधा असर पाकिस्तान के परिवहन और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला है। डीजल ₹520 प्रति लीटर होने से माल ढुलाई की लागत दोगुनी हो सकती है, जिससे फल, सब्जी और अनाज जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छूने लगे हैं।
आम आदमी की रसोई भी इससे अछूती नहीं है, क्योंकि केरोसिन तेल की कीमतों में भी करीब 34 रुपये का इजाफा कर इसे 467 रुपये प्रति लीटर तक पहुँचा दिया गया है।
पाकिस्तान के प्रमुख शहरों कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे 'आर्थिक कत्लेआम' करार दे रहे हैं।
दोपहिया वाहनों के लिए राहत की कोशिश और सरकार का बचाव
भारी आलोचना के बीच सरकार ने मध्यम वर्ग को कुछ राहत देने के लिए एक 'टारगेटेड सब्सिडी प्रोग्राम' का ऐलान किया है। वित्त मंत्री औरंगजेब के अनुसार, दोपहिया वाहनों और रिक्शा चालकों के लिए 100 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है ताकि उन पर बोझ कम किया जा सके।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी व्यापक महंगाई के बीच यह छोटी राहत ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार का तर्क है कि समय पर लिए गए इन फैसलों से कम से कम तेल की आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी, अन्यथा देश में 'ड्राय आउट' जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी।
US Attack on Iran: ईरान का सामरिक सेतु ध्वस्त, 37 हजार करोड़ का घाटा और ट्रंप की नई धमकी से दहला पूरा खाड़ी क्षेत्र
Middle East Conflict: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया है। अमेरिकी वायुसेना ने एक सटीक स्ट्राइक में ईरान के सबसे महत्वपूर्ण और महंगे बुनियादी ढांचे में शामिल 37 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले रणनीतिक B1 ब्रिज को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।
यह ब्रिज न केवल ईरान की आर्थिक लाइफलाइन माना जाता था, बल्कि इसके जरिए सैन्य रसद की आपूर्ति भी सुगम होती थी। ट्रंप ने इस हमले के जरिए संदेश दिया है कि अमेरिका ईरान की कमर तोड़ने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
Another angle of the B1 bridge in Karaj posted by Trump. The bridge was cut in two in a precision strike leaving the suspending wires and columns still standing. https://t.co/QyhGKYCD7r https://t.co/CkCwEFt5Ln pic.twitter.com/E2lun3nFIl
— OSGINT (@posted_news) April 2, 2026
इस हमले के बाद ईरान की परिवहन और सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे तेहरान में हड़कंप मचा हुआ है।
'समझौता कर लो वरना...', ट्रंप ने ईरान को दिया आखिरी अल्टीमेटम
हमले के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा, "ईरान के पास अब भी थोड़ा वक्त बचा है, मेरी शर्तों पर समझौता कर लो, वरना जो बचा है वह भी नहीं रहेगा।
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) April 2, 2026
" ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे और न ही अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत देंगे। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि वह ईरान के साथ किसी भी नरम नीति के पक्ष में नहीं हैं।
उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने अपनी हरकतों से बाज नहीं आए, तो अगला हमला इससे भी ज्यादा विनाशकारी होगा, जिससे उबरना ईरान के लिए नामुमकिन होगा।
ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य रसद पर अमेरिका की बड़ी चोट
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ब्रिज का तबाह होना ईरान के लिए केवल एक आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक हार भी है। 37 हजार करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट ईरान के 'विज़न' का हिस्सा था। इस पुल के टूटने से ईरान के भीतर हथियारों की आवाजाही और तेल के परिवहन पर सीधा असर पड़ा है।
ट्रंप की इस रणनीति का मकसद ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाना है ताकि वह युद्ध लड़ने की स्थिति में ही न रहे। इस हमले ने यह भी साबित कर दिया है कि अमेरिकी खुफिया तंत्र और मिसाइल तकनीक ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों को भी निशाना बनाने में पूरी तरह सक्षम है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता परमाणु हमले और पूर्ण युद्ध का खतरा
ट्रंप की इस नई धमकी और कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक डरे हुए हैं कि अगर ईरान ने इस हमले का पलटवार किया, तो डोनाल्ड ट्रंप परमाणु ठिकानों या तेल की मुख्य रिफाइनरियों पर हमला कर सकते हैं।
इजरायल पहले से ही ईरान के खिलाफ मोर्चेबंदी कर रहा है, और अब अमेरिका के इस सीधे हस्तक्षेप ने युद्ध को एक निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। दुनिया भर की नजरें अब ईरान के सुप्रीम लीडर के अगले कदम पर टिकी हैं- क्या वे ट्रंप की शर्तों पर झुकेंगे या फिर मिडिल ईस्ट एक ऐसी तबाही का गवाह बनेगा जिसे रोकना किसी के बस में नहीं होगा।
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