ट्रंप का भाषण 'ओल्ड वाइन इन न्यू बॉटल', लोगों की संघर्ष से बाहर निकलने की टूटी उम्मीदें: पूर्व राजनयिक
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गुरुवार को दिया गया भाषण एक तरह से ओल्ड वाइन इन न्यू बॉटल की तरह ही रहा। युद्ध शुरू होने के बाद से यह उनका पहला संबोधन था जिससे लोगों को कई उम्मीदें थीं, जो पूरी नहीं हो पाईं। यह बात पूर्व राजनयिक महेश कुमार सचदेव ने कही।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम जो संदेश दिया है, उसमें कोई नई बात तो नहीं है। पिछले 9 मार्च से अब तक वो एक ही बात कहते आ रहे हैं, हमारी जीत हो चुकी है, ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है।
पूर्व राजनयिक ने कहा कि इस युद्ध को एक माह से ज्यादा हो गया है और इस युद्ध में बहुत देश संघर्ष कर रहे हैं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति ट्रंप का यह पहला संबोधन था, और कई लोगों को उम्मीद थी कि इसमें किसी नई पहल या इस संघर्ष से बाहर निकलने के किसी रास्ते की रूपरेखा पेश की जाएगी। यह उम्मीद पूरी नहीं हो पाई, जिसके चलते व्यापक निराशा फैली है।
पूर्व राजनयिक को कहना है कि ट्रंप के संबोधन में जो कुछ कहा वो तो मायने ही नहीं रखता। गौर तो उस बात पर करना है, जो उन्होंने कही ही नहीं।
पहली बात ये है कि इस बार ट्रंप ने नाटो के बारे में कुछ नहीं कहा। हर बार वो अपने बयान में नाटो पर झल्लाहट निकालते रहे हैं, लेकिन आज के बयान में उन्होंने उसका जिक्र नहीं किया। पहले तो नाटो को लेकर गुस्से में उन्होंने तो ये तक कह दिया था कि नाटो छोड़ देंगे, अमेरिका इस पर विचार कर रहा है। आज उस नाटो को लेकर अपनी आगे रणनीति का जिक्र तक नहीं किया।
दूसरा सबसे अहम और जरूरी मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, उसके बारे में भी ट्रंप ने आज कुछ नहीं कहा, जबकि यह इस समय एक वैश्विक समस्या बन गया है। पूरा विश्व इस समस्या से जूझ रहा है। तेल को लेकर बुरी स्थिति बनी हुई है।
इसके अलावा ट्रुप्स ऑन ग्राउंड के बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की। हालांकि, ईरान के विद्युत क्षेत्र ढांचे को खत्म करने की बात जरूर कही, लेकिन उसके एवज में ईरान की धमकियों पर उन्होंने कोई बात नहीं की। ईरान के जवाबी हमले से सुरक्षा पर उन्होंने कोई बात नहीं की। अगर अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान खाड़ी के अन्य देशों के विधुत ढांचे पर हमला करता है तो इसका बहुत व्यापक परिणाम हो सकता है।
--आईएएनएस
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इससे सस्ता कूलर नहीं! 1200 रुपये आएगा बनवाने का खर्च, एक घंटे में मनाली बना देगा कमरा!
Jugad Cooler: बाजार में एक से बढ़कर एक कूलर मिल रहे हैं. ब्रांडेड से लेकर जुगाड़ वाले भी, लेकिन खजुराहो के इस कूलर का तोड़ नहीं मिलेगा. खजुराहो के आस्था ग्रीन विलेज में अनोखा देसी जुगाड़ कूलर लोगों का ध्यान खींच रहा है. यहां के मैनेजर राजू गौतम ने कबाड़ का उपयोग कर बेहद सस्ते कूलर तैयार किए हैं, जो महंगे कूलरों को टक्कर दे रहे हैं. राजू गौतम बताते हैं कि इस देसी कूलर को तैयार करने में करीब 1200 रुपये खर्च आता है. इसमें 900 रुपये का ड्रम और 300 रुपये की किट शामिल है. इसमें एग्जॉस्ट फैन और वाटर पंप का उपयोग किया गया है. खास बात ये कि यह कूलर 48 डिग्री तापमान में भी कमरे को 26-28 डिग्री तक ठंडा कर देता है. पर्यटकों के बीच यह कूलर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. लोग ऐसे मॉडल को फॉलो कर रहे है.
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