ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन, ईरान जंग पर दिखे कन्फ्यूज, क्या बिना ठोस प्लानिंग के युद्ध में कूदा अमेरिका?
अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद आज पहली बार अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया. पूरी दुनिया की नजरें इस संबोधन पर टिकी थीं और उम्मीद की जा रही थी कि ट्रंप इस भीषण जंग को खत्म करने का कोई रास्ता बताएंगे. लेकिन ट्रंप के भाषण ने समाधान देने के बजाय उलझनें और बढ़ा दी हैं. उनके संबोधन से साफ झलका कि वह काफी कन्फ्यूज हैं. जिस तरह अमेरिका ने इस जंग में एंट्री ली थी, उसे देखकर अब लग रहा है कि उनके पास इससे बाहर निकलने की कोई ठोस प्लानिंग मौजूद नहीं है. ट्रंप के इस रुख से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं.
न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर विरोधाभासी दावा
ट्रंप ने अपने संबोधन में दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है. लेकिन इसी दावे के साथ उन्होंने एक ऐसी बात कही जिसने शक पैदा कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि वहां भारी मलबा लगा हुआ है और अगर ईरानी वहां यूरेनियम लेने के लिए अंदर जाने की कोशिश करते हैं, तो उनके लिए वहां जाना बहुत मुश्किल होगा. ट्रंप के इस बयान का सीधा मतलब यह निकलता है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और वहां अभी भी यूरेनियम का भंडार मौजूद हो सकता है. यह बयान ट्रंप के पिछले दावों को ही कटघरे में खड़ा करता है.
ईरान से जंग को लेकर Confused Trump | Strait of hormuz से पीछे हटे...अपने बयानों से पलटे#trumpspeech #iranuswar #trumpstatement #worldnews #geopolitics #middleeastwar @manoj_gairola pic.twitter.com/ecA5jjEqgp
— News Nation (@NewsNationTV) April 2, 2026
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से पीछे हटे ट्रंप
जंग के बीच ट्रंप ने एक और बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया है. उन्होंने साफ कह दिया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा करना अब अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो देश उस रास्ते से तेल का व्यापार करते हैं या तेल लेते हैं, यह उनकी अपनी सिरदर्दी है कि वे अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील इलाका है और अमेरिका का इस तरह हाथ खींच लेना दुनिया भर में तेल की सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है.
सत्ता परिवर्तन का इरादा नहीं
ट्रंप ने अपने भाषण में एक बात बहुत स्पष्ट तरीके से कही कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान में रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन करने का बिल्कुल भी नहीं है. इस बयान से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रंप अब इस जंग से बाहर निकलना चाहते हैं. हालांकि, वह ऐसी स्थिति में जंग को नहीं छोड़ना चाहते जिससे दुनिया के सामने यह संदेश जाए कि सुपरपावर अमेरिका की इस युद्ध में शर्मनाक हार हुई है. वह एक ऐसा रास्ता खोज रहे हैं जिससे अमेरिका की साख भी बची रहे और जंग से पीछा भी छूट जाए.
जंग का एक महीना और कोई समाधान नहीं
गौरतलब है कि पिछले महीने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इसके बाद से ही खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है. ईरान ने चुप बैठने के बजाय पलटवार किया और मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों और इजराइल को निशाना बनाया. ईरान ने उन देशों पर भी हमले किए जो अमेरिकी समर्थित हैं. इस जंग को शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन अब तक शांति का कोई ठोस रास्ता नजर नहीं आ रहा है. ट्रंप का आज का संबोधन इसी हताशा और अनिश्चितता को दर्शाता है.
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सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किए छह भारतीय जहाज, भारत यूके बैठक में लेगा भाग : एमईए
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को बताया कि एलपीजी, एलएनजी जैसे उत्पाद ले जा रहे छह भारतीय जहाज अब तक सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। साथ ही क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच नई दिल्ली भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अन्य देशों के संपर्क में बना हुआ है।
नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत, यूके की ओर से गुरुवार को आयोजित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बैठक में भाग लेगा।
फारस की खाड़ी में फंसे कच्चे तेल और एलपीजी ले जा रहे 18 भारतीय झंडे वाले जहाजों की आवाजाही में तेजी लाने के लिए ईरान और दूसरे देशों से बातचीत के सवाल पर जायसवाल ने कहा, हम ईरान और वहां के दूसरे देशों के संपर्क में हैं, ताकि यह देखा जा सके कि हम अपने जहाजों के लिए बिना रुकावट और सुरक्षित रास्ता कैसे पा सकते हैं, जिनमें एलपीजी, एलएनजी और दूसरे प्रोडक्ट शामिल हैं। पिछले कई दिनों से चल रही इस बातचीत के जरिए, हमारे छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर पाए हैं। हम इस मामले पर संबंधित पार्टियों के संपर्क में हैं।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, “यूके ने भारत सहित कई देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। हमारी ओर से विदेश सचिव इस बैठक में भाग ले रहे हैं।”
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
जब उनसे कुछ रिपोर्ट्स के बारे में पूछा गया, जिनमें कहा गया था कि भारत होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के ट्रांज़िट के लिए टोल दे रहा है, तो जायसवाल ने जवाब दिया, हमने इस मुद्दे को पहले भी साफ किया था। हमारे और ईरान के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई है।
पिछले महीने, ईरान ने घोषणा की थी कि वह भारत सहित पांच “मित्र” देशों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजर सकें, जबकि अन्य देशों के लिए पहुंच सीमित बनी हुई है।
ईरान की ऑफिशियल न्यूज एजेंसी ने अराघची के हवाले से कहा, दुश्मन को स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत देने का कोई कारण नहीं है। हमने कुछ ऐसे देशों को गुजरने की इजाजत दी है जिन्हें हम दोस्त मानते हैं; हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को ट्रांजिट करने की इजाजत दी है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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