Bengal Politics: अमित शाह ने फूंका चुनावी बिगुल, 'मां-माटी-मानुष' के नारे पर किया प्रहार, 15 दिन के प्रवास से बदलेगा समीकरण?
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर पहुंचे। भारी सुरक्षा और कार्यकर्ताओं के जोश के बीच शाह ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।
उन्होंने सीधे तौर पर ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा कि भवानीपुर की जनता अब बदलाव चाहती है। शाह के रोड शो में उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दे दिया कि आगामी चुनावों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है।
भवानीपुर में उमड़ा यह जनसैलाब बंगाल में परिवर्तन का प्रतीक है। TMC सरकार की विदाई निश्चित है।
— Amit Shah (@AmitShah) April 2, 2026
ভবানীপুরে উপচে পড়া এই জনসমুদ্রই বাংলায় পরিবর্তনের প্রতীক। তৃণমূল কংগ্রেস সরকারের বিদায় এখন নিশ্চিত।#BhabanipurChayBJP https://t.co/pcjy7jHNif
उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी ने बंगाल को विकास की दौड़ में पीछे धकेल दिया है और अब राज्य की जनता भारतीय जनता पार्टी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।
'15 दिन बंगाल में रहूंगा'- शाह के इस ऐलान से टीएमसी खेमे में खलबली
अमित शाह ने अपने संबोधन में एक बड़ा रणनीतिक ऐलान किया जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा, "मैं अगले 15 दिनों तक बंगाल में ही रहूंगा और हर जिले, हर बूथ तक बीजेपी के संदेश को पहुंचाऊंगा।"
शाह का यह बयान दर्शाता है कि बीजेपी इस बार बंगाल को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इन 15 दिनों के प्रवास के दौरान शाह कई रैलियां, सांगठनिक बैठकें और जनसंपर्क अभियान करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाह की उपस्थिति से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा।
तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 'दीदी' को घेरा
भवानीपुर की धरती से अमित शाह ने ममता सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में 'मां-माटी-मानुष' की सरकार अब केवल भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण का पर्याय बनकर रह गई है।
शाह ने केंद्र सरकार की योजनाओं को बंगाल में लागू न होने देने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दीदी ने केवल राजनीति के लिए गरीबों का हक मारा है। उन्होंने संदेशखाली जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए।
शाह ने दावा किया कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और घुसपैठियों को संरक्षण देकर राज्य की डेमोग्राफी बदली जा रही है, जिसे बीजेपी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
'सोनार बांग्ला' का संकल्प और कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र
अपने भाषण के समापन पर अमित शाह ने 'सोनार बांग्ला' के निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देते हुए कहा कि वे बिना डरे हर घर तक पहुंचें और सरकार के कुशासन को उजागर करें।
शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बंगाल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस बार हिंसा और डर की राजनीति को खत्म कर विकास के पक्ष में मतदान करें।
शाह की इस आक्रामक शैली और बंगाल में लंबे प्रवास की घोषणा ने साफ कर दिया है कि बीजेपी ने ममता बनर्जी के किले में सेंध लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
IPL 2026: आईपीएल के बीच हुआ विवाद, क्रिकेटर ने अपने बोर्ड पर ही ठोक दिया केस
आईपीएल 2026 के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के श्रीलंकाई तेज गेंदबाज नुवान तुषारा ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तुषारा को आईपीएल खेलने के लिए जरूरी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट बोर्ड की तरफ से नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्होंने यह कानूनी कदम उठाया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका क्रिकेट ने तुषारा को फिटनेस मानकों पर खरा न उतरने की वजह से एनओसी देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, तुषारा का कहना है कि उनकी फिटनेस हमेशा की तरह ही है और इससे पहले इसी स्तर की फिटनेस के साथ उन्हें कभी रोका नहीं गया।
तुषारा ने श्रीलंका क्रिकेट को कोर्ट में घसीटा
तुषारा ने अपनी याचिका में श्रीलंका क्रिकेट के शीर्ष अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया है। इसमें बोर्ड के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा , सचिव बांदुला दिसानायके, कोषाध्यक्ष और सीईओ एश्ले डिसिल्वा के नाम शामिल हैं।
आईपीएल के लिए नहीं मिला था एनओसी
इस मामले की सुनवाई 9 अप्रैल को कोलंबो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में तय की गई है। तुषारा ने कोर्ट से मांग की है कि SLC को निर्देश दिया जाए कि उन्हें आईपीएल 2026 में खेलने की अनुमति दी जाए।
तुषारा का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च को खत्म
रिपोर्ट के अनुसार, तुषारा का श्रीलंका क्रिकेट के साथ केंद्रीय अनुबंध 31 मार्च को खत्म हो गया था। उन्होंने पहले ही बोर्ड को यह जानकारी दे दी थी कि वह अपना कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाना चाहते और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी बनाना चाहते हैं।
तुषारा का यह भी कहना है कि अगर उन्हें एनओसी नहीं मिलता है, तो इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ करियर के बड़े मौके भी गंवाने पड़ेंगे। आईपीएल जैसे बड़े मंच पर खेलने का मौका किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद अहम होता है।
गौरतलब है कि तुषारा को 2025 में आरसीबी ने 1.6 करोड़ रुपये में खरीदा था। उन्होंने उस सीजन में एक मैच खेला था, जिसमें टीम ने खिताब भी जीता था। वहीं, आईपीएल 2026 में आरसीबी ने शानदार शुरुआत करते हुए अपने पहले मुकाबले में सनराइजर्स हैदराबाद को हराया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है और क्या तुषारा को आईपीएल में खेलने का मौका मिल पाता है या नहीं।
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