ईरान-इज़रायल युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), पर लगी अघोषित पाबंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है। इस संकट के समाधान के लिए ब्रिटेन (UK) गुरुवार को एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक की मेजबानी करने जा रहा है, जिसमें 35 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है, जो ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल युद्ध के चलते काफी हद तक ठप पड़ गया था। तेल के इस महत्वपूर्ण मार्ग के बंद होने से वैश्विक बाज़ार पहले ही हिल गए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने पुष्टि की कि विदेश सचिव यवेट कूपर की अध्यक्षता में होने वाली यह वर्चुअल बैठक उन "सभी संभावित कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों" की पहचान करने पर केंद्रित होगी, जो इस जलमार्ग को फिर से खोलने, फंसे हुए चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने और दुनिया भर में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति फिर से शुरू करने में मदद कर सकें।
ईरान के हमलों से वैश्विक शिपिंग ठप, तेल की कीमतों में भारी उछाल
वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों और आगे की कार्रवाई की उसकी चेतावनियों ने इस जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को लगभग पूरी तरह से ठप कर दिया है। फ़ारसी खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से जोड़ने वाले एक प्रवेश द्वार के रूप में, इसके बंद होने से दुनिया के तेल प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा अवरुद्ध हो गया है, जिससे ऊर्जा संकट और गहरा गया है।
अमेरिका बैठक से बाहर, ट्रंप बोले - सहयोगी देश अपने तेल की सुरक्षा खुद करें
अमेरिका इस बैठक का हिस्सा नहीं है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मार्ग की सुरक्षा करना अमेरिका की ज़िम्मेदारी नहीं है; उन्होंने सहयोगी देशों से कहा है कि वे "जाकर अपना तेल खुद हासिल करें।" उनके इस रुख ने यूरोपीय और एशियाई साझेदारों पर बढ़ते संकट को संभालने में आगे बढ़कर नेतृत्व करने का दबाव बढ़ा दिया है।
गुरुवार को व्हाइट हाउस में अपने संबोधन के दौरान, ट्रंप ने इस बात को दोहराया कि अमेरिका के पास घरेलू तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं और वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निर्भर नहीं है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, ट्रंप ने उन देशों से भी आह्वान किया जो तेल की आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर बहुत अधिक निर्भर हैं, कि वे इस मार्ग की "रक्षा और संरक्षण" करें।
तत्काल कोई सैन्य कार्रवाई नहीं, लेकिन योजना पर काम जारी
चूंकि सक्रिय संघर्ष अभी भी जारी है, इसलिए कोई भी देश इस जलडमरूमध्य को ज़बरदस्ती फिर से खोलने के लिए तैयार नहीं है, जबकि ईरानी सेनाएं मिसाइलों, ड्रोन, बारूदी सुरंगों और हमलावर नौकाओं से जहाजों को निशाना बनाने में सक्षम बनी हुई हैं। हालांकि, स्टारमर ने कहा कि कई देशों के सैन्य योजनाकार जल्द ही उन तरीकों पर चर्चा करेंगे जिनसे शत्रुता कम होने के बाद सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके।
35 देशों के गठबंधन ने जलडमरूमध्य को खोलने की मांग की
UK, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा, जापान और UAE सहित 35 देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में ईरान से आग्रह किया गया है कि वह इस जलमार्ग को अवरुद्ध करने के अपने प्रयासों को रोक दे। इन देशों ने "सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने" का संकल्प लिया है, और गुरुवार की बैठक के बाद वे एक कार्य योजना तैयार करने के लिए तकनीकी-स्तर की चर्चाएँ करेंगे।
यूरोप का लक्ष्य एकता दिखाना है
यह ध्यान देने योग्य है कि यह समन्वित प्रयास, यूक्रेन के सुरक्षा ढाँचे का समर्थन करने के लिए बनाए गए "इच्छुक देशों के गठबंधन" (coalition of the willing) की संरचना को दर्शाता है। यूरोपीय नेता इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अधिक ज़िम्मेदारी उठाने की अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के एक अवसर के रूप में भी देखते हैं—विशेष रूप से ऐसे समय में, जब ट्रंप ने एक बार फिर NATO से अमेरिका के हटने की संभावना का संकेत दिया है।
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बीते एक महीने से चल रही ईरान जंग अब सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। एक तरफ अमेरिका अपनी शर्तों पर समझौता करना चाहता है तो दूसरी तरफ ईरान झुकने को तैयार नहीं है। इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा असर जिस जगह पर पड़ा है, वह स्टेट ऑफ हुर्मूज है। इस जगह को दुनिया की तेल सप्लाई की लाइफलाइन कहा जाता है। यहां हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि कभी भी बड़ा टकराव हो सकता है और यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट से लेकर आम लोगों तक सबकी नजर इसी रस्ते पर टिकी है। हालांकि होर्मोस्टेट में बढ़ते बवाल को देखते हुए इस हफ्ते ब्रिटेन की मेजबानी में करीब 35 देशों की एक बड़ी मीटिंग होने जा रही है। ऐसे माहौल में ब्रिटेन ने खुद को सीधे जंग से दूर रखते हुए एक अलग रास्ता चुना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के स्टारमबर ने साफ कर दिया है कि उनका देश इस जंग में शामिल नहीं होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। बल्कि उन्होंने हॉर्मोज को दोबारा खोलने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है।
इसी के तहत इस हफ्ते ब्रिटेन की मेजबानी में करीब 35 देशों की एक मीटिंग होने जा रही है। जिसे ग्लोबल होमोस समिट कहा जा रहा है। इस बैठक का मकसद साफ है किसी भी तरह इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित और चालू रखना। दरअसल होरमोस को लेकर बवाल इसलिए मचा हुआ है क्योंकि यह रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल पहुंचाने का मुख्य जरिया है और अगर यह बंद होता है तो सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है। पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। सप्लाई चेन टूट सकती है और कई देशों में आर्थिक संकट गहरा सकता है और यही वजह है कि अब यह सिर्फ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहा बल्कि ग्लोबल संकट बन चुका है। अच्छा आपको यह भी बता दें कि स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस पर बवाल इसलिए बढ़ा है क्योंकि इज़राइल अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया। यहां से उन्हीं देशों के जहाज गुजर सकते हैं जिनके रिश्ते ईरान से अच्छे हैं और जो देश अमेरिका या इजराइल के पक्ष में खड़े हैं उन देशों के जहाजों का गुजरना इस रास्ते से इस वक्त असंभव हो चुका है।
ब्रिटेन भी इस खतरे को समझ रहा है। ब्रिटेन पीएम ने साफ कहा कि इस जंग का असर ब्रिटेन के भविष्य पर पड़ सकता है। लेकिन उनकी प्राथमिकता अपने नागरिकों का हित है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे कितना भी दबाव क्यों ना हो ब्रिटेन इस जंग में नहीं कूदेगा। एक तरह से केस स्टारमर का यह जवाब ट्रंप के लिए था क्योंकि ट्रंप लगातार यूके, फ्रांस अपने नेटो सहयोगियों को इस जंग में शामिल होने के लिए दबाव डाल रहे हैं। हालांकि इस बीच ब्रिटेन ने भी अपना संदेश साफ तौर पर ट्रंप के लिए पहुंचा दिया है। कुल मिलाकर नेटो देशों ने अमेरिका का साथ देने से इंकार कर दिया है। अमेरिका चाहता है कि नेटो देश अपनी वॉरशिप भेजकर होमोस को खुलवाने में मदद करें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार सख्त रुख दिखा रहे हैं और ईरान पर दबाव बढ़ाने की बात भी कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भी चेतावनी दे चुकी है कि यह जंग अब सीमित नहीं रही बल्कि पूरे वेस्ट एशिया के लिए एक बड़ा आर्थिक खतरा बन चुकी है। स्टेट ऑफ होमोस पर बढ़ते तनाव के बाद ही ब्रिटेन की मेजबानी में करीब 35 देशों की मीटिंग होने जा रही है।
इसके साथ ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने साफ कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन को ‘‘घसीटा नहीं जाएगा’’ और उन्होंने घोषणा की कि वे इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सभी व्यवहार्य कूटनीतिक तथा राजनीतिक उपायों पर चर्चा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। स्टार्मर ने डाउनिंग स्ट्रीट में एक प्रेसवार्ता की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाटो पर की गई हालिया टिप्पणियों को एक तरह का हल्ला कहकर खारिज करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध का प्रभाव ‘‘हमारे देश के भविष्य को प्रभावित करेगा’’, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया यह तूफान कितना भी भयंकर क्यों न हो, हम इसका सामना करने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।’’ इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ईरान से उनके युद्ध में सहयोगी देशों द्वारा शामिल न होने के बाद वह नाटों से अमेरिका के बाहर होने जैसे फैसले पर विचार कर रहे हैं।
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