हिमाचल में प्रीमियम शराब ₹105 तक महंगी:वाइन के शौकीन टूरिस्ट के बजट पर पड़ेगा असर, MPR से अधिक रेट पर नहीं बिकेगी
हिमाचल प्रदेश में शराब महंगी हो गई है। इसका असर लोकल लोगों के साथ देशभर से पहाड़ों पर घूमने आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ेगा। शराब के शौकीन टूरिस्ट और लोकल को राज्य में अब महंगे दाम पर शराब मिलेगी। एक्साइज डिपार्टमेंट ने 2026-27 के लिए शराब के रेट तय कर दिए है। अंग्रेजी शराब के रेट अधिकतम 105 रुपए प्रति बोलत तक बढ़ाए हैं, जबकि रेगुलर ब्रांड की शराब के दाम में 10 से 30 रुपए तक की बढ़ौतरी की गई है। ऑफिसर चॉइस शराब में सबसे कम 10 रुपए बढ़ाए गए। हिमाचल में पहले यह 535 रुपए की मिल रही थी, अब इसके 545 रुपए देने होंगे। रॉयल स्टैग की कीमत 750 से बढ़ाकर 770 रुपए प्रति बोतल की गई है। VAT 69 की कीमत में सबसे ज्यादा 105 रुपए बढ़ाए गए हैं। यानी प्रीमियम शराब के ज्यादा रेट बढ़ाए है। MRP में बिकेगी शराब एक्साइज डिपार्टमेंट ने 2026-27 के लिए एमआरपी के तहत ही ठेके नीलाम किए हैं। बीते वित्त वर्ष ही एमएसपी को समाप्त कर एमआरपी की व्यवस्था शुरू की गई थी। यानी अब कोई भी ठेका संचालक तय एमआरपी से अधिक दाम पर शराब नहीं बेच सकेगा। एमआरपी सिस्टम का फायदा यह है कि पर्यटकों को ओवरचार्जिंग से सुरक्षा मिलती है और वे तय कीमत से ज्यादा भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होते। प्रदेश में शराब ठेकों की पहली बार ऑनलाइन नीलामी की गई है। शराब ठेकों में रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य एक्साइज डिपार्टमेंट ने शराब के सभी ठेकों पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य किया है। इसे लेकर ठेका संचालकों को ऑक्शन के दौरान ही सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही विभाग ने अपने अधिकारियों को भी शराब ठेकों की रूटीन जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी शराब उपभोक्ता के साथ कोई धोखाधड़ी न हो। एक्साइज एंड टेक्सेशन इंस्पेक्टर का फोन नंबर भी लिखना होगा विभाग ने रेट लिस्ट पर संबंधित क्षेत्र के एक्साइज एंड टेक्सेशन इंस्पेक्टर का फोन नंबर भी लिखना अनिवार्य किया है। ऐसा नहीं करने वाले शराब कारोबारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में यदि कोई ठेका संचालक किसी उपभोक्ता से एमआरपी से अधिक रेट वसूलता है, तो वह संबंधित अधिकारी को फोन पर शिकायत कर सकेगा। होटल-बार में प्रीमियम शराब के रेट बढ़ेंगे प्रीमियम शराब महंगी होने से होटलों को अपने मेन्यू रेट में आंशिक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इससे हाई-एंड टूरिस्ट के खर्च में बढ़ोतरी होगी, लेकिन मध्यम वर्ग पर इस बढ़ौतरी का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। बाहर से दो बोतल से ज्यादा लाने की अनुमति नहीं हिमाचल में हर साल ढाई से 3 करोड़ टूरिस्ट घूमने आता है। इनमें ज्यादा टूरिस्ट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के होते है। ऐसे में शराब के रेट में बढ़ौतरी के बाद बाहर से भी टूरिस्ट अपने साथ शराब ला सकते हैं। मगर पर्सनल यूज के लिए 2 बोतल से ज्यादा शराब लाने की अनुमति नहीं है। -------------- यह खबर भी पढ़ें… हिमाचल में चिट्टा-तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक: विधानसभा में आज कानून बना रही सरकार, सोसायटी-बैंक डिफॉल्टर भी बाहर होंगे हिमाचल प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले चिट्टा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने जा रही है। राज्य में ऐसे लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित ठहराया जाएगा। (पूरी खबर पढ़ें)
हिमाचल में चिट्टा-तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक:विधानसभा में आज कानून बना रही सरकार, सोसायटी-बैंक डिफॉल्टर भी बाहर होंगे
हिमाचल प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव की घोषणा से पहले चिट्टा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने जा रही है। राज्य में ऐसे लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित ठहराया जाएगा। इसके लिए, विधानसभा के बजट सेशन में आज (गुरुवार को) ही हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होगा। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने यह बिल बीते कल ही सदन में टेबल किया है। आज इसे चर्चा के बाद पारित किया जाना है। इसके बाद संशोधन विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही के ड्रग्स तस्करी में शामिल लोगों के पंचायत चुनाव लड़ने पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। प्रधान की कुर्सी भी जाएगी प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक- पंचायत जनप्रतिनिधि (प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद) चुने जाने के बाद भी यदि कोई चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया गया और उस पर आरोप तय हो जाते है तो ऐसी स्थिति में भी उसकी कुर्सी जाएगी। ग्रामसभाओं के कोरम में भी बदलाव करने जा रही सरकार राज्य सरकार पंचायतों में होने वाली ग्राम सभाओं के कोरम में भी बदलाव करने जा रही है। वर्तमान में कोरम के लिए 25 प्रतिशत परिवारों की मौजूदगी जरूरी है। प्रस्तावित संशोधन में कुल परिवारों की जगह कुल वोटरों की उपस्थिति का प्रावधान होगा। नया प्रावधान जुड़ने के बाद कुल वोटरों में से 10 फीसदी की मौजूदगी के बाद ग्राम सभा का कोरम पूरा माना जाएगा। सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाएगा। ऐसे लोगों को भी सरकार अयोग्य घोषित करने जा रही है। जिन लोगों पर पंचायत के ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहेंगे। यह संशोधन पंचायतों में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि साफ-सुथरी छवि वाले ईमानदार लोग चुनाव जीतकर आए। हिमाचल की 3600 पंचायतों में होने हैं चुनाव हिमाचल की लगभग 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव होने है। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। राज्य में 60 हजार से ज्यादा लोग पंचायत चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा कानून में किया जा रहा यह संशोधन काफी संख्या में लोगों को प्रभावित करेगा।
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