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Parineeti-Raghav Wedding: आज होगी परिणीति-राघव की शादी, Kejriwal- Bhagwant Mann पहुंचे Udaipur

Parineeti-Raghav Wedding: आज होगी परिणीति-राघव की शादी, Kejriwal- Bhagwant Mann पहुंचे UdaipurParineeti-Raghav Wedding: Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal also arrived to attend the wedding of Aam Aadmi Party MP Raghav Chadha and film actress Parineeti Chopra in Udaipur, Rajasthan.Parineeti-Raghav Wedding: राजस्थान के उदयपुर में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा और फिल्म अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पहुंचे.

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Vishwakhabram: Eastern Europe में India मचायेगा धमाल, समझिये Moldova, North Macedonia और Romania की यात्रा पर क्यों जा रही हैं President Droupadi Murmu?

भारत की विदेश नीति में पूर्वी यूरोप का महत्व लगातार बढ़ रहा है और इसी दिशा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 19 से 25 जुलाई 2026 तक मोल्दोवा, उत्तर मैसेडोनिया और रोमानिया की राजकीय यात्रा एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने आज राष्ट्रपति की तीन देशों की यात्रा की घोषणा की। यह यात्रा भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह यूरोप में अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक प्रभाव का विस्तार करना चाहता है। तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा भारत के लिए इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि मोल्दोवा और उत्तर मैसेडोनिया की यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा होगी, जबकि रोमानिया में तीन दशक से अधिक समय बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति का दौरा हो रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मु मोल्दोवा में राष्ट्रपति माइया सांडू के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी, संसद अध्यक्ष इगोर ग्रोसू से मुलाकात करेंगी, मोल्दोवा-भारत संसदीय मैत्री समूह से संवाद करेंगी, भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगी तथा भारतीय समुदाय से भी मिलेंगी। इसके बाद उत्तर मैसेडोनिया में राष्ट्रपति गोरदाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा, प्रधानमंत्री ह्रिस्टियान मिकोस्की और संसद नेतृत्व के साथ वार्ता होगी। राष्ट्रपति वहां संसद को भी संबोधित करेंगी और भारत-उत्तर मैसेडोनिया बिजनेस फोरम में भाग लेंगी। यात्रा के अंतिम चरण में रोमानिया में राष्ट्रपति निकुशोर दान, अंतरिम प्रधानमंत्री इलीए बोलोजान, सीनेट एवं प्रतिनिधि सभा के शीर्ष नेतृत्व तथा संसदीय मैत्री समूह के साथ बैठकें होंगी। राष्ट्रपति भारत-रोमानिया बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगी और भारतीय समुदाय से संवाद करेंगी।

देखा जाये तो यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पूर्वी यूरोप वैश्विक भू-राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया है। भारत इस क्षेत्र में संतुलित और बहुआयामी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। मोल्दोवा और रोमानिया यूक्रेन के पड़ोसी देश हैं, जबकि उत्तर मैसेडोनिया बाल्कन क्षेत्र में यूरो-अटलांटिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में इन देशों के साथ संबंधों का विस्तार भारत को यूरोप में अपनी रणनीतिक पहुंच मजबूत करने का अवसर देगा।

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रोमानिया यूरोपीय संघ का प्रभावशाली सदस्य है और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में हो रही प्रगति के बीच उसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दूसरी ओर, उत्तर मैसेडोनिया यूरोपीय संघ की सदस्यता का उम्मीदवार है और बाल्कन क्षेत्र में भारत के लिए प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकता है। मोल्दोवा कृषि, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संपर्क और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।

इस यात्रा का एक बड़ा रणनीतिक संदेश यह भी है कि भारत केवल पश्चिमी यूरोप तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूर्वी यूरोप के उभरते साझेदारों के साथ भी दीर्घकालिक संबंध स्थापित करने की नीति पर काम कर रहा है। रक्षा, साइबर सुरक्षा, ऊर्जा, आपूर्ति श्रृंखला, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इससे भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ आधारित विदेश नीति को भी नई मजबूती मिलेगी।

भारत-मोल्दोवा संबंध


भारत ने 1991 में मोल्दोवा को मान्यता दी और 1992 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए। दोनों देशों के संबंध सदैव सौहार्दपूर्ण रहे हैं तथा बहुपक्षीय मंचों पर मोल्दोवा ने भारत का समर्थन किया है। वर्ष 1993 में छह महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें व्यापार, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है और भारतीय निर्यात में दवाइयां, रसायन, मशीनरी, मोबाइल उपकरण, वस्त्र और इंजीनियरिंग उत्पाद प्रमुख हैं। भारतीय कंपनियां ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाओं में भी सक्रिय हैं। कोविड-19 महामारी, सूखा, बाढ़ तथा यूक्रेन संकट के दौरान भारत ने मानवीय सहायता प्रदान कर भरोसेमंद साझेदार होने का परिचय दिया। लगभग 900 भारतीय, जिनमें अधिकांश मेडिकल छात्र हैं, मोल्दोवा में रह रहे हैं। योग, हिंदी, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। राष्ट्रपति की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

भारत-उत्तर मैसेडोनिया संबंध


भारत और उत्तर मैसेडोनिया के संबंध मैत्रीपूर्ण रहे हैं तथा दोनों देशों के बीच कोई द्विपक्षीय विवाद नहीं है। भारत ने मैसेडोनिया की अंतरराष्ट्रीय मान्यता के शुरुआती दौर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय यात्राओं में तेजी आई है। 2023 में विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी और उत्तर मैसेडोनिया के विदेश मंत्री बुयार उस्मानी की यात्राओं ने संबंधों को नई गति दी। दोनों देशों के बीच व्यापार में रसायन, इस्पात, वस्त्र, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपोनेंट प्रमुख हैं। उत्तर मैसेडोनिया भारतीय निवेशकों के लिए कम कर व्यवस्था और यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच के कारण आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है। आईटीईसी, योग, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति की यात्रा आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ बाल्कन क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी मजबूत करेगी।

भारत-रोमानिया संबंध


भारत और रोमानिया के बीच 1948 से राजनयिक संबंध हैं और 2023 में दोनों देशों ने 75 वर्ष पूरे किए। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में विदेश मंत्रियों की नियमित मुलाकातों और व्यापक साझेदारी संबंधी संयुक्त घोषणा ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई दी है। व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत से पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, दवाइयां, रसायन और वस्त्र निर्यात होते हैं, जबकि रोमानिया से मशीनरी, इस्पात, ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और औद्योगिक उत्पाद आयात किए जाते हैं। विप्रो, इंफोसिस, एचसीएल, सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज़ और जेनपैक जैसी भारतीय कंपनियां वहां सक्रिय हैं। लगभग नौ हजार भारतीय समुदाय, जिनमें बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हैं, रोमानिया में रह रहे हैं। सांस्कृतिक सहयोग, योग, आयुर्वेद, शिक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में रोमानिया की भागीदारी दोनों देशों की बढ़ती निकटता का प्रमाण है।

बहरहाल, स्पष्ट है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की यह तीन देशों की यात्रा केवल राजकीय शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती वैश्विक रणनीति, यूरोप में बढ़ते प्रभाव और नए आर्थिक-सामरिक साझेदारों की तलाश का सशक्त संकेत है। यदि प्रस्तावित सहयोग योजनाएं ठोस परिणामों में बदलती हैं, तो यह यात्रा पूर्वी यूरोप में भारत की दीर्घकालिक उपस्थिति को नई दिशा देने वाली ऐतिहासिक पहल सिद्ध हो सकती है।

-नीरज कुमार दुबे

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