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टीवी प्रसारण की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अहम

भारत में ‘राष्ट्रीय प्रसारण दिवस’ प्रत्येक 23 जुलाई को मनाया जाता है। सूचना विधाओं के लिहाज से आज का दिन रेडियो क्रांति और प्रसारण का प्रतीक भी है। दिवस की शुरुआत वर्ष-1927 में हुई थी जिसका आज का 99 वां संस्करण है। सर्वविदित है कि 23 जुलाई 1927 को ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी’ नाम से एक प्राइवेट संस्था ने ‘बॉम्बे रेडियो क्लब’ स्टेशन से हिंदुस्तान में पहला प्रसारण किया गया था जो ब्रिटिश औपनिवेशिक हुकूमत द्वारा लाइसेंस प्राप्त थी। कुछ वर्षों बाद 'ऑल इंडिया रेडियो' और फिर आकाशवाणी के रूप में स्थापित हुई। वैसे, विधिवत रूप से प्रसारण मंच का शुभारंभ 8 जून 1936 से हुआ था। इसी दिन से विविध भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों को एक सूत्र में पिरोने का चलन आरंभ हुआ। आकाशवाणी का नाम प्रसिद्व रचनाधर्मी ‘एमबी गोपालस्वामी’ द्वारा दिया गया था, जो संस्कृत शब्द से गढ़ा गया था। जिसका शाब्दिक मतलब होता है ‘आकाश से आवाज’। इस शब्द को आधिकारिक रूप से 1935 में मैसूर में भारत के पहले निजी रेडियो स्टेशन की स्थापना के वक्त इस्तेमाल हुआ, जिसे बाद में भारत सरकार ने सार्वजनिक और आधिकारिक रूप से सरकारी रेडियो के लिए प्रयोग किया।
  
प्रसार भारती के नाम से प्रचलित भारतीय प्रसारण तंत्र आज विश्व का बससे बड़ा ब्राॅडकास्ट डिविजन है। 15 सिंतबर 1959 को, दिल्ली स्थित आॅल इंडिया रेडियो के स्टूडियों में, भारत का पहला टीवी चैनल शुरू किया गया था जो आज ‘दूरदर्शन’ यानी डीडी न्यूज के नाम से प्रसिद्व है। प्रसारण के विस्तार पर अगर नजर डालें, तो वर्तमान में आकाशवाणी के कुल 591 रेडियो के्रंद्र और प्रसारण के 230 स्टेशन संचालित हैं। वहीं, सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ो के अनुसार, भारत में इस समय 908 निजी सैटेलाइट टीवी न्यूज चैनल सार्वजनिक प्रसारण सेवा में हैं। इनमें 40 फीसदी यानी करीब 350-400 के बीच केवल समाचार श्रेणी के हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी के अलावा विभिन्न राज्यस्तरीय भाषाओं में संचालित हैं। निजी प्रसारण में आगमन सबसे पहले 1992 में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ से हुआ, उसके बाद तो निजी क्षेत्र में प्रसारणों की बाढ़ आ गई। करीब 3 हजार से अधिक नए लाइसेंसों के लिए मंत्रालय में आवेदन आवेदित हैं। 

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भारत में प्रसारण का कलर 25 अप्रैल 1982 में बदला गया। यहीं से रंगीन टीवी की शुरुआत हुई, वरना इससे पहले तक पर्दा सफेद ही था। ये वह वक्त था जब दिल्ली में एशियाई खेलों का महाकुंभ आरंभ होना था। तब तेजी से वैश्विक स्तर पर मांग उठ रही थी कि खेलों का प्रसारण रंगीन पर्दे पर किया जाए। इसके बाद ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ के दौर का अंत हुआ और टीवी का पर्दा रातों-रात कलरफुल हो गया। टीवी प्रसारण का मतलब होता है ऑडियो और वीडियो सामग्री को विधुत चुम्बकीय तरंगों जैसे केबल, सैटेलाइट या इंटरनेट के जरिए जन जन तक पहुंचाना। प्रसारण आज के समय में सभी के जीवन का हिस्सा बन गया है। प्रसारण ऐसी संचार प्रणाली है जो दर्शकों को घर बैठे न्यूज से लेकर मनोरंजन के सभी माध्यमों को परोसता है। हालांकि, तकनीकी विकास के साथ प्रसारण विधाओं में काफी बदलाव हुआ है। अब दर्शक केबल या सैटेलाइट यंत्रों पर ही निर्भर नहीं रहते। दर्शक डाटा खर्च करके मोबाइल से ही हर प्रकार के प्रसारण का लुफ्त उठा लेते हैं। फिर चाहे, मैच हो या समाचार।
  
प्रसारण के क्षेत्र में अब इंटरनेट, डिजिटल और ओटीटी ने और विस्तार कर दिया है। सरकार सालाना प्रसारण से विज्ञापनों और फ्रीडिश से करीब 1200 से 1600 करोड़ रूपए कमाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रसार भारती का कुल राजस्व 1643 करोड़ था जिसमें से प्रमुख हिस्सा सरकारी डीटीएच प्लेटफार्म का था। साल 2025 के शीतकालीन सत्र में लोकसभा में सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय द्वारा बताया गया था कि आॅल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने निजी विज्ञापनों से तीन साल यानी 2022 से 2025 के बीच कुल 587.78 करोड़ कमाए। वहीं, 2025-2026 के अतं तक 650 करोड़ कमाने का लक्ष्य प्रसार भारती ने रखा हुआ है। ये ऐसा लक्ष्य है जिसे भी आसानी से हासिल किया जा सकता है।

राष्ट्र निर्माण में प्रसारण की जो स्वर्णिम यात्रा सदियों पहले आरंभ हुई थी वह आज भी निरंतर जारी है। प्रसारण का क्षेत्र जनमानस के मन के तारों को छूता है। प्रसारण के जरिए ही बदलती तकनीकों के साथ संवाद भी निरंतर जारी हैं। केंद्र सरकार ने फ्री और निशुल्क चैनलों का वर्गीकरण भी बीते कुछ सालों से किया है, ताकि कोई भी दर्शक प्रसारण के रस से अछूता न रहे। ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ ऐसा प्रसारण नारा है जिसमें किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता। प्रसारण परिंदों की भांति है जिसकी कोई सीमा और बंदिशें नहीं? केंद्र सरकार प्रसारण में नए रस घोलने के लिए हमेशा कुछ न कुछ बदलाव करती है। मंनोरंजन के नए-नए कार्यक्रमों का शुभारंभ और समाचार की प्रस्तुतीकरण में समय-समय पर बदलाव किया जाता है, ताकी दर्शक बोर न हों। वर्ष-2012 से भारत सरकार ने मनोरंजन, समाचार, खेल, खेतीबाड़ी आदि क्षेत्रों में प्रसारण के विस्तार को बढ़ाया हैं। फ्री-डिश बिना किसी मासिक शुल्क के करीब 400 से अधिक चैनल शहरी-ग्रामीण दर्शकों को मुहैया करवाता है। यही कारण है भारतीय प्रसारण आज विश्व का बससे बड़ा प्रसारण क्षेत्र बनकर उभरा है।

- डॉ. रमेश ठाकुर
सदस्य, राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (NIPCCD), भारत सरकार!

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Gupt Navratri 2026: 10 Mahavidyas की साधना का महापर्व शुरू, गृहस्थ नोट करें Shubh Muhurat और नियम

हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व मां शक्ति की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हर साल यह पर्व चार बार मनाया जाता है। जिसमें दो नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं। तो वहीं दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। माघ और आषाढ़ महीने में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि की शुरूआत 15 जुलाई 2026 से हुई है। तो वहीं इसकी समाप्ति 23 जुलाई 2026 को होगी।

गुप्त नवरात्रि के दौरान व्यक्तिगत और गोपनीय साधना को अधिक महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि यह नवरात्रि तांत्रिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन गृहस्थ लोग भी कुछ नियमों के पालन के साथ इन नवरात्रि का लाभ ले सकते हैं।

घटस्थापना मुहूर्त

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी की 15 जुलाई को घटस्थापना के साथ इस पर्व की शुरूआत होगी। आज कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 05:33 मिनट से लेकर सुबह 10:09 मिनट तक है। वहीं 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि है, इस दिन गुप्त नवरात्रि की समाप्ति होगी।

पूजन विधि

सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद घर के ईशान कोण को साथ करें। फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थापित करें। एक पात्र में मिट्टी डालकर इसमें जौ बोए जाते हैं। फिर तांबे या मिट्टी के कलश में जल, अक्षत, सिक्का और एक सुपारी डालकर आम के पत्ते लगाएं और इसके ऊपर नारियल स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर मां दुर्गा से अपनी मनोकामना का संकल्प लें।

पूजा के नियम

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-उपासना की जाती है। दस महाविद्याओं में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। ऐसे में गृहस्थ लोग मां मातंगी, मां कमला और मां भुवनेश्वरी की पूजा कर सकते हैं। अन्य देवियों की उग्र साधनाएं बिना गुरु के नहीं करना चाहिए।

गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष सावधानियां रखनी चाहिए। इस दौरान की जाने वाली पूजा सामान्य भक्ति से अलग होती है। इनके लिए कठोर नियमों का पालन करना जरूरी होता है। पूरे 9 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसे तामसिक चीजों से दूरी बनानी चाहिए।

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LPL 2026 Final: हार गई जहीर खान की टीम, 3 बार चूकने वाली गॉल आखिर बनी चैंपियन, 95 गेंदों में खेल खत्म

गॉल गैलेंट्स को इससे पहले 3 अलग-अलग फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें से जाफना किंग्स ने भी उसका दिल तोड़ा था. मगर इस बार गॉल ने पुराने सारे हिसाब बराबर करते हुए ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया. Sat, 08 Aug 2026 23:48:03 +0530

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