सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर की चर्चा
दुशांबे, 1 अप्रैल (आईएएनएस) भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बुधवार को ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों और क्षेत्रीय व वैश्विक मामलों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि दुशांबे की अपनी यात्रा के दौरान, सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान के उप विदेश मंत्री इदिबेक कलंदर के साथ मिलकर भारत-ताजिकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श के पांचवें दौर की सह-अध्यक्षता भी की।
दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रों जैसे व्यापार और आर्थिक संबंध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को कवर करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा, सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
उन्होंने आगे कहा, दुशांबे में भारत-ताजिकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श का पांचवां दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और उप विदेश मंत्री इदिबेक कलंदर ने की। उन्होंने वर्तमान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की, जिसमें व्यापार और आर्थिक संबंध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संबंधों जैसे आपसी हित के क्षेत्र शामिल थे।
पिछले अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन से मुलाकात की थी।
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में कहा था, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन से बातचीत करना हमेशा सुखद अनुभव होता है। भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं, जो एक बहुत ही शुभ संकेत है।
भारत और ताजिकिस्तान के बीच संबंध पारंपरिक रूप से घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण रहे हैं। 1992 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से, दोनों देशों के बीच नियमित रूप से होने वाली उच्च-स्तरीय यात्राओं ने इन द्विपक्षीय संबंधों को और भी अधिक मजबूती प्रदान की है।
एमईए के अनुसार, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की गहरी जड़ों ने इस रिश्ते को एक नए स्तर तक विस्तारित और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत और ताजिकिस्तान के बीच सहयोग मानवीय प्रयासों के सभी पहलुओं को शामिल करता है, जिसमें सैन्य और रक्षा संबंधों पर विशेष जोर दिया जाता है।
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ईरान के हथियार कार्यक्रम से बड़े वैश्विक खतरे का डर, यूरोप तक पहुंच सकती हैं मिसाइलें : मार्को रूबियो
वॉशिंगटन, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ईरान ने ऐसी मिसाइलें बना ली हैं जो यूरोप के अंदर तक पहुंचने में सक्षम हैं। उन्होंने तेहरान के खिलाफ अमेरिका की चल रही सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए, ईरान के हथियार कार्यक्रम से पैदा होने वाले बड़े वैश्विक खतरे की चेतावनी दी।
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में रूबियो ने कहा कि ईरान की ओर से हाल ही में किए गए मिसाइल परीक्षणों ने ऐसी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है, जिन्हें पहले ईरान नकारा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ये मिसाइलें यूरोप के काफी अंदर तक पहुंच सकती हैं।
रूबियो ने फॉक्स न्यूज को बताया कि मिसाइल का यह खतरा, ईरान की ओर से अपनी सैन्य पहुंच का विस्तार करने के बड़े प्रयासों का ही एक हिस्सा है। इन प्रयासों में लंबी दूरी की ऐसी प्रणालियां विकसित करना भी शामिल है, जो अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका को भी निशाना बना सकती हैं। रूबियो ने कहा कि वे अंततः ऐसी मिसाइल हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे, जो सीधे अमेरिकी महाद्वीप तक पहुंच सके।
उन्होंने ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को उसके परमाणु महत्वाकांक्षाओं से सीधे जोड़ते हुए कहा कि दोनों मुद्दों को एक साथ ही सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेहरान ने 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धित कर लिया है और उसके पास अभी भी इतनी क्षमता मौजूद है कि वह बहुत कम समय में इसे हथियार-ग्रेड स्तर तक पहुंचा सके।
रूबियो ने आगे कहा, 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम रखने का एकमात्र कारण यही है कि इसे और संवर्धित करके 90 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए, और फिर इसका इस्तेमाल बम बनाने में किया जाए। उन्होंने ईरान पर यह आरोप भी लगाया कि उसने अपने यूरेनियम के भंडार को नष्ट करने या सौंपने के कई मौकों को ठुकरा दिया है।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक समन्वित सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ईरान को अपनी उन्नत हथियार प्रणालियों की आड़ में अपने परमाणु कार्यक्रम को छिपाने से रोकना है। इस अभियान के चार मुख्य उद्देश्य हैं: ईरान की वायु सेना और नौसेना को नष्ट करना, मिसाइल लॉन्च करने वाली प्रणालियों को निष्क्रिय करना, और ड्रोन तथा मिसाइलों का उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों को पूरी तरह से खत्म करना।
रूबियो ने कहा, हम इन चारों उद्देश्यों को पूरा करने के मामले में या तो तय समय-सीमा के अनुसार ही चल रहे हैं, या फिर उससे भी आगे चल रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी सेना अपने लक्ष्यों को हासिल करने के बहुत करीब पहुंच चुकी है।
विदेश मंत्री ने इस सैन्य अभियान को बेहद प्रभावी बताया, और इसे आधुनिक समय के सबसे बेहतरीन ढंग से संचालित किए गए सामरिक सैन्य अभियानों में से एक करार दिया।
इस सैन्य कार्रवाई के बावजूद, रूबियो ने कहा कि वॉशिंगटन अभी भी कूटनीति के रास्ते खुले रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध के बजाय बातचीत को ही प्राथमिकता देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है और इस बात की पूरी संभावना है कि दोनों के बीच सीधे तौर पर बातचीत हो सके।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि बातचीत की वजह से सैन्य लक्ष्यों में देरी नहीं होने दी जाएगी।
समुद्री सुरक्षा के मामले में, रूबियो ने आगाह किया कि ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में रुकावट डालने की कोई भी कोशिश अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगी और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम गैर-कानूनी होंगे और इस क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय होंगे।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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