मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का काउंटडाउन, क्या 18 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा ईरान-इजरायल संघर्ष?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. मिलिट्री एक्सपर्ट्स और रणनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि 14 से 18 अप्रैल के बीच यह युद्ध अपने अंजाम तक पहुंच सकता है. युद्ध के अंतिम 3 से 5 दिन सबसे ज्यादा भयावह होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी पूरी सैन्य ताकत झोंकने की तैयारी में हैं. इजरायल की ओर से 'यूज-इट-ओर-लोज-इट' की रणनीति अपनाई जा सकती है, जिसमें मिसाइल और अन्य घातक हथियारों का अधिकतम इस्तेमाल किया जाएगा.
350 टारगेट लॉक और जेडी वेंस की भूमिका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व और इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के बीच गहरी रणनीतिक सहमति बनी है. चर्चा है कि जेडी वेंस के रणनीतिक संकेतों के बाद इजरायल ने ईरान के भीतर 350 महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए लॉक कर लिया है. हालांकि सैन्य अभियानों का अंतिम फैसला आईडीएफ कमांड का ही होता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन का समर्थन इजरायल के हौसले बढ़ा रहा है. ईरान के पास फिलहाल 300 मिसाइलों का रिजर्व और करीब 70-80 मोबाइल लॉन्चर्स होने का अनुमान है. इजरायल का दावा है कि वह ईरान की हमला करने की क्षमता को काफी हद तक कम कर चुका है.
यूरेनियम निकालने का हाई-रिस्क ऑपरेशन
इस युद्ध की सबसे चौंकाने वाली कड़ी ईरान के परमाणु भंडार से जुड़ी है. ऐसी खबरें हैं कि इजरायल एक अत्यंत गुप्त और जोखिम भरा ऑपरेशन चलाकर ईरान से 400-600 किलो संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) निकालने की योजना बना रहा है. यह मिशन सफल रहा तो ईरान की परमाणु शक्ति बनने की कोशिशों को दशकों पीछे धकेल दिया जाएगा. रणनीतिकारों का मानना है कि इजरायल ईरान के 'खार्ग आइलैंड' जैसे तेल केंद्रों को निशाना बनाने के बजाय परमाणु ठिकानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि वैश्विक तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा न हो.
नाटो से बाहर हो सकता है अमेरिका
वैश्विक राजनीति में एक और बड़ा भूचाल 'द टेलीग्राफ' अखबार की रिपोर्ट से आया है. खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को नाटो (NATO) से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. इस फैसले का सीधा असर यूरोप की सुरक्षा और रूस-यूक्रेन युद्ध पर पड़ेगा. ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और नाटो देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने के दबाव के बीच यह फैसला दुनिया का नक्शा बदल सकता है. ट्रंप और नेतन्याहू का आपसी तालमेल इस समय ईरान के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार कर रहा है.
इजरायल में तबाही का मंजर
जमीनी हकीकत की बात करें तो ईरान ने इजरायल के भीतर भारी तबाही मचाई है. न्यूज नेशन के रिपोर्टर ने ग्राउंड जीरो से जानकारी दी है कि ईरान की मल्टी-वॉरहेड मिसाइलों के गिरने से रिहायशी इलाकों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं. इजरायल का मिसाइल डिफेंस सिस्टम यानी आयरन डोम और एरो मिसाइल डिफेंस कई हमलों को रोकने में कामयाब रहे हैं, लेकिन एक साथ सैकड़ों मिसाइलों के हमले (Saturation Attack) के कारण कुछ मिसाइलें सुरक्षा घेरे को भेदने में सफल रही हैं. फिलहाल पूरे इजरायल में मिसाइल हमलों का अलर्ट जारी है और लोग बंकरों में शरण लेने को मजबूर हैं.
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