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क्या ईरान ने डाल दिए हथियार? ट्रंप बोले- 'नए राष्ट्रपति ने मांगा युद्धविराम, लेकिन मेरी शर्तें कड़ी हैं'

दुनिया के सबसे ताकतवर नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने अंदाज में पूरी दुनिया को चौंका दिया है. 1 अप्रैल को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक ऐसी जानकारी साझा की, जिससे मिडल ईस्ट के महायुद्ध में एक नया मोड़ आता दिख रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति ने उनसे संपर्क किया है और जंग रोकने के लिए 'युद्धविराम' यानी सीजफायर की गुहार लगाई है. ट्रंप ने इस नए ईरानी राष्ट्रपति की तारीफ करते हुए उन्हें अपने पुराने नेताओं के मुकाबले कम कट्टर और ज्यादा बुद्धिमान बताया है. हालांकि, ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वे इतनी आसानी से हमले रोकने वाले नहीं हैं. उन्होंने शांति के बदले ऐसी शर्त रख दी है, जो ईरान के लिए गले की फांस बन सकती है.

होर्मुज की खाड़ी पर अड़े ट्रंप

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में बहुत ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि सीजफायर पर विचार तभी होगा, जब होर्मुज स्ट्रेट यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित कर दिया जाएगा. ट्रंप का कहना है कि जब तक यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता, तब तक अमेरिकी सेना ईरान को तबाह करना जारी रखेगी. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो वे ईरान को वापस 'पाषाण युग' यानी स्टोन एज में धकेल देंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह मटियामेट करने की कसम खा चुका है. ट्रंप की इस धमकी ने दुनिया भर के एक्सपर्ट्स को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि होर्मुज का रास्ता पूरी दुनिया के तेल सप्लाई के लिए लाइफलाइन माना जाता है, जो इस वक्त ईरान के कंट्रोल में है.

28 फरवरी से दहक रहा है मिडिल ईस्ट

मिडल ईस्ट में इस भीषण तबाही की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी. 28 फरवरी से लेकर अब तक यह इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है. इस जंग की शुरुआत तब हुई जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर एक साथ बड़े हमले किए थे. जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए थे. इसके जवाब में ईरान ने भी सैकड़ों मिसाइलों से पलटवार किया, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल गई. पिछले एक महीने में हजारों लोग मारे गए हैं और अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर इसका असर दिखने लगा है. ट्रंप ने पहले ही संकेत दिए थे कि वे इस जंग को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहते और 2 से 3 हफ्तों में इसे खत्म कर देंगे. आज का उनका यह बयान उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

क्या ईरान में बदल गया है शासन?

ट्रंप के इस बयान में सबसे रहस्यमयी बात 'ईरान का नया शासन' और 'नया राष्ट्रपति' है. अभी तक ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी नेतृत्व परिवर्तन की खबर नहीं आई है, लेकिन ट्रंप का यह कहना कि नया राष्ट्रपति पहले वालों से अलग है, कई तरह के सवाल खड़े करता है. क्या ईरान के भीतर कोई तख्तापलट हुआ है या फिर युद्ध की मार झेलते हुए वहां के सुप्रीम लीडर ने किसी नए चेहरे को आगे कर दिया है? ट्रंप ने फिलहाल किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन उनके शब्दों से लग रहा है कि पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है. अगर वाकई ईरान का नेतृत्व बदल गया है, तो यह इस जंग का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

ईरान ने किया खारिज

राष्ट्रपति ट्रंप अपनी शर्तों को लेकर बहुत जिद्दी माने जाते हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका मकसद अब सिर्फ जीत नहीं, बल्कि ईरान की ओर से पैदा होने वाले खतरों को हमेशा के लिए खत्म करना है. होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करना अमेरिका के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले रहे हैं. ट्रंप का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को हमेशा के लिए स्वतंत्र कर देता है, तभी वे अपनी सेना को पीछे हटने का आदेश देंगे. अब सबकी नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं. क्या ईरान अपनी हार मानकर ट्रंप की शर्तें मान लेगा या फिर वह एक आखिरी और सबसे भयावह लड़ाई के लिए तैयार होगा? ट्रंप ने 2-3 हफ्तों की जो डेडलाइन दी है, उसे देखते हुए अप्रैल का यह महीना दुनिया के इतिहास के लिए बहुत अहम होने वाला है. वहीं, ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि ऐसी कोई बात नहीं हुई है. 

ये भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का काउंटडाउन, क्या 18 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा ईरान-इजरायल संघर्ष?

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पीआईबी की एफसीयू ने 2,900 से अधिक फैक्‍ट चेक जारी किए, फर्जी सूचनाओं पर लगी लगाम

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) के अंतर्गत फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) ने अब तक कुल 2,913 फैक्ट-चेक पब्लिक किए हैं और इससे फर्जी सूचनाओं के प्रसार पर लगाम लगाने में मदद मिली है। जानकारी सरकार की ओर से बुधवार को दी गई।

सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ.एल.मुरुगन ने लोकसभा में कहा कि एफसीयू केंद्र सरकार से संबंधित फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं की पहचान करती है। अधिकृत स्रोतों से समाचारों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के बाद, एफसीयू अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सही जानकारी प्रकाशित करती है। इसके अतिरिक्त, यह नागरिकों को संदिग्ध सामग्री की पुष्टि के लिए रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे गलत सूचनाओं से निपटने में जनभागीदारी मजबूत होती है।

एफसीयू ने भारत सरकार से संबंधित कई फर्जी दावों की पहचान की है, जिनमें डीपफेक, एआई-जनरेटेड और भ्रामक वीडियो, नोटिफिकेशन, पत्र और वेबसाइट शामिल हैं। अब तक कुल 2913 फैक्ट-चेक प्रकाशित किए जा चुके हैं। सभी फैक्ट-चेक पीआईबी फैक्ट चेक के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जैसे कि एक्‍स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, थ्रेड्स और व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध हैं।

केंद्र मंत्री के मुताबिक के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने ऑनलाइन प्रसारित हो रही गलत सूचनाओं और भारत विरोधी बयानों की सक्रिय रूप से पहचान की। इसने झूठे दावों से संबंधित तथ्‍यों की जांच करने, प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने और सटीक सार्वजनिक संवाद सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कार्रवाई की, जिससे भ्रामक और भारत विरोधी बयानों के प्रसार को रोकने में मदद मिली। मंत्रालय ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डिजिटल मीडिया पर 1,400 से अधिक ऐसे यूआरएल को ब्लॉक करने के निर्देश भी जारी किए।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, डिजिटल मीडिया पर समाचार और समसामयिक मामलों के प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड सामग्री के प्रकाशकों के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 (आईटी नियमावली, 2021) एक आचार संहिता के साथ-साथ ऐसे प्रकाशकों द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय संस्थागत प्रणाली का प्रावधान करता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कौन हैं हमाम हुसैन...जिसने दूध बेचकर घर चलाया, कुश्ती के सपने को जिंदा रख जीता गोल्ड मेडल

who is Hamam Hussain: पहलवान हमाम हुसैन जब पांच साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था. उसके बाद उन्होंने मुफलिसी में अपनी जिंदगी काटी. उन्होंने दूध बेचकर घर चलाया और अपनी कुश्ती के सपने को जिंदा रखा. आज उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर अपने सपने को साकार किया. Wed, 1 Apr 2026 21:35:55 +0530

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