उदयपुर के गांवों से निकले तैराक, 15 दिन के शिविर में निखरा हुनर, अब सपनों को मिल रही नई उड़ान और पहचान
Swimming training camp Udaipur : झीलों की नगरी उदयपुर में तैराकी अब केवल शौक नहीं, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य का माध्यम बनती जा रही है. महाराणा प्रताप खेलगांव में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय शिविर ने 150 चयनित खिलाड़ियों को पेशेवर प्रशिक्षण का मंच दिया है, जहां उनका हुनर निखर रहा है. राजस्थान सरकार की “पंच गौरव” पहल के तहत जिलेभर से आए 741 प्रतिभागियों में से इन प्रतिभाओं का चयन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों की है. गांवों के तालाब और नदियों से निकलकर अब ये खिलाड़ी स्विमिंग पूल में तकनीक, स्टैमिना और सुरक्षा के साथ तैराकी सीख रहे हैं. यह पहल न केवल खेल कौशल को मजबूत कर रही है, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास में भी अहम भूमिका निभा रही है, जिससे ये युवा अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए तैयार हो रहे हैं.
जयपुर के मोती डूंगरी मंदिर में खास प्रसाद: पंचामृत से बनता है च्यवनप्राश, भक्तों को मिलता है आयुर्वेदिक लाभ
Jaipur Mata Dungri Mandir: मोती डूंगरी मंदिर में एक अनोखी और 42 साल पुरानी परंपरा आज भी निभाई जा रही है, जिसमें पंचामृत अभिषेक से तैयार विशेष च्यवनप्राश भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. यह च्यवनप्राश करीब 35 प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बनाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. मंदिर में यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि आयुर्वेदिक ज्ञान का भी प्रतीक है. भक्त इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण कर खुद को धन्य महसूस करते हैं. यह परंपरा जयपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाती है, जहां भक्ति के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष प्रसाद को पाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.
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