Xiaomi का नया स्मार्टफोन Redmi Note 15 SE 5G को कल यानी 2 अप्रैल 2026 को भारत में लॉन्च होने जा रहा है। यह फोन अपनी बड़ी 5,800mAh बैटरी, 50MP प्राइमरी कैमरा और 48 महीने तक लैग-फ्री परफॉर्मेंस के लिए खासतौर पर तैयार किया गया है।
इस स्पेशल एडिशन फोन में 45W फास्ट चार्जिंग, डुअल रियर कैमरा सेटअप और स्टाइलिश कलर ऑप्शन जैसे Carbon Black, Crimson Reserve और Frosted White शामिल हैं। इसके अलावा, यह Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट से लैस है, जो स्मूद और पावरफुल परफॉर्मेंस सुनिश्चित करता है। लॉन्च के बाद यह हैंडसेट Flipkart पर बेचा जाएगा।देखिए आने वाले Redmi Note 15 SE 5G की कीमत-फीचर्स और अन्य सभी डिटेल्स।
Redmi Note 15 SE 5G स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स (संभावित) Redmi Note 15 SE 5G के लिए सपोर्टेड माइक्रोसाइट के अनुसार, इस हैंडसेट में 5,800mAh की बैटरी दी जाएगी, जो कंपनी के अनुसार एक बार चार्ज करने पर 44 घंटे से अधिक इस्तेमाल की जा सकेगी। इसके अलावा, यह 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा। इससे पुष्टि होती है कि इस फोन की बैटरी, स्टैंडर्ड Redmi Note 15 5G की 5,520mAh बैटरी से बड़ी होगी।
कंपनी ने पुष्टि की है कि यह स्पेशल एडिशन भारत में Flipkart के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। Redmi Note 15 SE 5G Carbon Black, Crimson Reserve (Red) और Frosted White कलर वेरिएंट में आएगा। Crimson Reserve वेरिएंट में वीगन लेदर बैक पैनल होगा और इसकी मोटाई 7.82mm है।
फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा, जो स्क्वायरकल्ड डेको के अंदर रखा गया है। इसमें 50MP MasterPixel प्राइमरी शूटर होगा, जो 4K वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है। ध्यान देने वाली बात है कि स्टैंडर्ड एडिशन में 108MP प्राइमरी कैमरा और 8MP अल्ट्रावाइड कैमरा दिया गया है।
प्रोसेसिंग और परफॉर्मेंस Redmi Note 15 SE 5G को ऑक्टा-कोर Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट द्वारा संचालित किया जाएगा, जो स्टैंडर्ड Redmi Note 15 5G में भी इस्तेमाल होता है। कंपनी का कहना है कि फोन में 48 महीने तक लैग-फ्री परफॉर्मेंस मिलेगी। इसके अलावा, इसमें GPU में 10% बूस्ट और CPU में 30% बूस्ट का दावा किया गया है। बता दें, Redmi Note 15 SE 5G भारत में 2 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा।
हर साल 02 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है। यह बच्चों के मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक गंभीर समस्या है। जिसका असर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। लेकिन समय रहते बच्चों में इसके लक्षणों की पहचान और इलाज किया जाए, तो उनमें काफी हद तक सुधार आने की संभावना हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म का शिकार होता है, जिसके लिए दैनिक जीवन के काम करना और नाम सुनते ही जवाब देने में विफलता या लोगों से अलग-थलग रहने की समस्या हो सकती है।
दुनियाभर में बढ़ती इस तरह की समस्या के खतरों को कम करने के लिए हर साल 02 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस मनाया जाता है। इसमें ऑटिस्टिक विकारों के शिकार व्यक्तियों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के उपाय करने और बच्चों में इसके खतरे को कम करने के बारे में लोगों को जागरुक करना है।
जानिए क्या है ऑटिज्म
बता दें कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है। जो इस बात को प्रभावित करती है कि एक व्यक्ति का दूसरों के साथ व्यवहार कैसा है। इस बीमारी के शिकार लोगों में बातचीत के कौशल और सामाजिक संपर्क में समस्याएं होने लगती हैं। इस विकार की वजह से दैनिक जीवन के सामान्य कार्यों और व्यवहार को करने तक में परेशानी हो सकती है।
वहीं एएसजी के लक्षण बचपन में दिखने लगते हैं। अक्सर बच्चों में जन्म के पहले साल में ही ऑटिज्म के लक्षणों की पहचान की जा सकती है। 18 से 24 महीने की उम्र में यह विकार बढ़ी हुई समस्याओं के रूप में नजर आने लगती है।
बच्चों में होने वाली दिक्कतें
कुछ बच्चों में जन्म के पहले साल में इसके लक्षण साफ तौर पर नजर आने लगते हैं। जैसे बच्चे का आई कॉन्टैक्ट कम होना, बार-बार किसी बात को रटते रहना, नाम सुनने की प्रतिक्रिया में कमी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस होना आदि।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार वाले कुछ बच्चों को सीखने आदि में परेशानी होती है। वहीं कुछ बच्चों में सामान्य से कम बुद्धि के लक्षण होते हैं। इस विकार वाले अन्य बच्चों में सामान्य से उच्च बुद्धि हो सकती है। वह जल्दी सीखते हैं औऱ रोजमर्रा की जिंदगी में जो भी जानते हैं, उसको संप्रेषित करने और प्रयोग करने में परेशानी हो सकती है।
समस्याएं
ऐसे काम करना जो खुद को नुकसान पहुंचा सकती है, जैसे सिर पीटना या काटना।
दिनचर्या के एक खास रूटीन में रमा होना और थोड़े सा बदलाव होने पर परेशान हो जाना।
समन्वय के साथ समस्याएं होना, जैसे पैर की उंगलियों पर चलना या फिर शरीर का बैलेंस बनाने में समस्या होना।
ध्वनि, प्रकाश या स्पर्श के प्रति असामान्य रूप से संवेदनशील होना।
सामाजिक या भाषा कौशल में कठिनाई होना।
डॉक्टरों की लें मदद
जन्म के पहले-दूसरे साल में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार के लक्षण दिखने लग जाते हैं। अगर आप अपने बच्चे के विकास के बारे में चिंतित हैं, या फिर आपको संदेह है कि आपके बच्चे को ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से चर्चा करें। वैसे तो ऑटिज्म के लिए कोई खास इलाज नहीं है पर थेरेपी और अन्य उपायों के जरिए इन लक्षणों में सुधार करके जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है।
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