अमेरिकी नागरिकता व आव्रजन सेवा ने 2027 के लिए एच-1बी वीजा की निर्धारित सीमा को किया पूरा, आवेदन आज से शुरू
वॉशिंगटन, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने कहा कि उसे वित्त वर्ष 2027 के एच-1बी वीज़ा की सीमा, जिसमें उच्च डिग्री छूट (एडवांस्ड डिग्री एग्जेम्प्शन) भी शामिल है, को पूरा करने के लिए पर्याप्त इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्राप्त हो गए हैं। इसके साथ ही 1 अप्रैल से आवेदन के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
एजेंसी ने पुष्टि की कि उसने “उचित रूप से जमा किए गए पंजीकरणों में से पर्याप्त लाभार्थियों का चयन कर लिया है ताकि एच-1बी सीमा पूरी की जा सके” और जिन आवेदकों के लाभार्थी चुने गए हैं, उन्हें सूचित कर दिया गया है। केवल उन्हीं के पास, जिनका पंजीकरण चयनित हुआ है, वित्त वर्ष 2027 के लिए एच-1बी कैप आधारित याचिकाएँ दाखिल करने की पात्रता है।
एजेंसी ने कहा कि पंजीकृत आवेदक अपने ऑनलाइन यूएससीआईएस खातों के माध्यम से अपनी स्थिति की जांच कर सकते हैं।
चयनित लाभार्थियों के लिए याचिकाएँ 1 अप्रैल 2026 से दाखिल की जा सकती हैं। यूएससीआईएस ने बताया कि आवेदन की अवधि कम से कम 90 दिनों की होगी और प्रत्येक याचिका के साथ संबंधित चयन सूचना (सेलेक्शन नोटिस) की प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन सही स्थान पर या एजेंसी के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जमा करने होंगे।
एजेंसी ने दस्तावेज़ीकरण से जुड़ी एक अनुपालन शर्त भी लागू की है। प्रत्येक याचिका में पंजीकरण के दौरान दी गई पहचान और पद से संबंधित जानकारी का मेल होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं को पंजीकरण के समय उपयोग किए गए लाभार्थी के वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ का प्रमाण, साथ ही घोषित वेतन स्तर के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा।
यूएससीआईएस ने कहा कि 1 अप्रैल से वह केवल फार्म I-129 का नया संस्करण वित्त वर्ष 2027 के सभी एच-1बी आवेदनों के लिए स्वीकार करेगा।
यह घोषणा एक अतिरिक्त वित्तीय शर्त के साथ भी आई है, जो राष्ट्रपति की घोषणा से जुड़ी है। एजेंसी के अनुसार, 21 सितंबर 2025 या उसके बाद दाखिल किए गए कुछ एच-1बी आवेदनों के साथ पात्रता की शर्त के रूप में अतिरिक्त 100,000 डॉलर का भुगतान करना आवश्यक होगा।
यूएससीआईएस ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण प्रक्रिया में चयन होने का मतलब यह नहीं है कि आवेदन स्वीकृत ही हो जाएगा। याचिकाकर्ताओं को अभी भी पात्रता साबित करनी होगी और फार्म I-129 के निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
वर्ष 2027 के लिए यूएससीआईएस ने एक नई वेटेड चयन प्रणाली लागू की है, जिसके तहत आक्यूपेशनल इम्पालइमेंट एंड वेज स्टेटिक्स (ओईडब्ल्यूएस) के वेतन स्तर के आधार पर अधिक कुशल और अधिक वेतन पाने वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कांग्रेस ने वार्षिक एच-1बी सीमा 65,000 वीज़ा तय की है, जिसमें से 6800 वीज़ा एच-1बी1 कार्यक्रम के तहत चिली और सिंगापुर के साथ अमेरिकी व्यापार समझौतों के लिए आरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी संस्थानों से उच्च डिग्री रखने वाले आवेदकों के लिए 20,000 वीज़ा अलग से उपलब्ध हैं।
कुछ श्रेणियाँ इस सीमा से मुक्त रहती हैं। इनमें अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा दायर याचिकाएं और गुआम व नॉर्दर्न मारियाना द्वीपसमूह में कार्यरत कर्मचारियों से संबंधित आवेदन शामिल हैं, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2029 से पहले दाखिल किए जाएं।
एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम का व्यापक रूप से उपयोग अमेरिकी कंपनियों द्वारा विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया जाता है। खासकर तकनीक, इंजीनियरिंग और शोध के क्षेत्रों में। हर वर्ष एच-1बी वीज़ा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है।
--आईएएनएस
पीएम
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अदाणी ग्रीन एनर्जी की वित्त वर्ष 2026 में बड़ी छलांग, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में की रिकॉर्ड 5 गीगावाट से अधिक की वृद्धि
अहमदाबाद, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को कहा कि उसने वित्त वर्ष 2025–26 में 5 गीगावाट (5,051 मेगावाट) से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) क्षमता जोड़ी है। इसके साथ ही कंपनी की कुल परिचालन क्षमता बढ़कर 19.3 गीगावाट (जीडब्ल्यू) हो गई है।
यह उपलब्धि चीन को छोड़कर दुनिया में किसी भी कंपनी द्वारा एक साल में की गई सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड क्षमता वृद्धि मानी जा रही है।
नई जोड़ी गई क्षमता में 3.4 गीगावाट (3,409 मेगावाट) सौर ऊर्जा, 0.7 गीगावाट (686 मेगावाट) पवन ऊर्जा और 1 गीगावाट (956 मेगावाट) पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता शामिल है।
देश की सबसे बड़ी विशुद्ध नवीकरणीय ऊर्जी कंपनी के अनुसार, यह नई क्षमता हर साल करीब 1 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी। वहीं एजीईएल की कुल 19.3 जीडब्ल्यू की क्षमता सालाना 3.6 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को ऑफसेट करने में सक्षम होगी।
एजीईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा, 5 गीगावाट से ज्यादा नई क्षमता जोड़ना भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी देश के रूप में पहचान मिलेगी और लो-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने आगे कहा, यह उपलब्धि 2030 तक 50 गीगावाट क्षमता के हमारे लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम है। साथ ही, हम नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण समाधानों के जरिए टिकाऊ और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रहे हैं।
ज्यादातर नई क्षमता गुजरात के खावड़ा में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में जोड़ी गई है, जिसे तेज गति से विकसित किया जा रहा है।
538 वर्ग किलोमीटर में फैला यह प्रोजेक्ट पेरिस शहर के आकार से करीब पांच गुना बड़ा है। खावड़ा में 2029 तक 30 गीगावाट क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें से कंपनी अब तक 9.4 गीगावाट (9,413 मेगावाट) क्षमता स्थापित कर चुकी है।
इसके अलावा, कंपनी ने खावड़ा में 1,376 मेगावाट-घंटे (एमडब्ल्यूएच) की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) क्षमता भी शुरू की है, जो दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह काम सिर्फ 8 महीनों में पूरा किया गया, जिससे ग्रिड की स्थिरता और रिन्यूएबल एनर्जी के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी।
खावड़ा प्रोजेक्ट में एडवांस बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स का इस्तेमाल किया गया है, जो दोनों तरफ से सूरज की रोशनी लेकर बिजली बनाते हैं। साथ ही सोलर ट्रैकर्स का उपयोग कर उत्पादन को अधिकतम किया जाता है।
कंपनी ने बताया कि इसमें 5.2 मेगावाट के पवन टर्बाइन लगाए गए हैं, जो दुनिया के सबसे ताकतवर ऑनशोर टर्बाइनों में शामिल हैं। इसके अलावा, पानी रहित रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सोलर पैनल साफ करने में लगभग शून्य पानी की जरूरत पड़ती है और ऑपरेशन की दक्षता बढ़ती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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