पाकिस्तान में महिलाओं के प्रसव के बाद शिशुओं को बेचने वाले क्लिनिक का भंडाफोड़
इस्लामाबाद, 31 मार्च (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले में सराई मुगल के पास शेखमान में एक छापे के दौरान एक क्लिनिक का खुलासा हुआ, जहां कथित रूप से कमजोर महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती थी और उनके बच्चों को मुनाफे के लिए बेचा जाता था।
छापे की कार्रवाई के बाद गिरफ्तारियां की गईं और क्लिनिक को बंद कर दिया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह इस नेटवर्क का केवल एक छोटा हिस्सा था, जो निगरानी की कमी से फल-फूल रहा था।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के लेख के अनुसार, पाकिस्तान में अक्सर तीन महत्वपूर्ण कमजोरियों का शोषण किया जाता है। जो महिलाएं सामाजिक कलंक का सामना करती हैं, विशेषकर अविवाहित माताएं, उन्हें गोपनीयता में रहना पड़ता है, जिससे निगरानी कम होती है और शोषण का खतरा बढ़ जाता है। संगठित दलाल इन परिस्थितियों से लाभ उठाते हैं, जिससे आपूर्ति और मांग लगातार जारी रहती है।
लेख के अनुसार, इसे रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप और समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को शिशु तस्करी के मामलों को संगठित आपराधिक गतिविधि के रूप में देखना चाहिए।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, क्लिनिकों और मामलों की जांच न केवल लाइसेंस और प्रमाण-पत्रों के लिए की जानी चाहिए, बल्कि संदिग्ध प्रसव के पैटर्न और व्यापक नेटवर्क से संबंधों की भी जांच की जानी चाहिए। जांच में सभी प्रतिभागियों की पहचान करनी चाहिए, जिसमें खरीदार और सुविधा प्रदान करने वाले शामिल हैं, और वित्तीय तथा लॉजिस्टिक लिंक का पता लगाना चाहिए। जोखिम में पड़ी महिलाओं को गोपनीय सहायता प्रणाली और विनियमित गोद लेने की व्यवस्था तक पहुंच की आवश्यकता है।
कलंक को कम करने और शोषण की शीघ्र रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। इसके अलावा, एक समर्पित कानून प्रवर्तन कार्यबल की आवश्यकता है, जिसकी एकमात्र जिम्मेदारी ऐसे नेटवर्कों को ध्वस्त करना हो, जिसके लिए उनके संचालन का मानचित्रण करके सभी संबंधित व्यक्तियों और संबंधों का पता लगाया जा सके। इसके बाद इन नेटवर्कों में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और दंडित किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
त्रिपुरा: अगरतला में किया गया लगातार दो किडनी ट्रांसप्लांट
अगरतला, 31 मार्च (आईएएनएस)। अगरतला के सरकारी गोविंद बल्लभ पंत मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने राज्य के इतिहास में पहली बार लगातार दो किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बिधान गोस्वामी ने कहा कि यह उपलब्धि मुख्यमंत्री माणिक साहा के प्रयासों से संभव हो पाई है, जो खुद एक डेंटल सर्जन हैं और स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं।
सोमवार और मंगलवार को छठा और सातवां किडनी ट्रांसप्लांट पूरा होने के साथ अब इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कुल 7 सफल किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं।
सभी मामलों में डोनर और मरीज दोनों की हालत स्थिर और अच्छी बताई जा रही है।
हाल के दोनों ट्रांसप्लांट अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज और गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किए गए। इसमें मणिपुर के इंफाल स्थित एक निजी अस्पताल और रिसर्च संस्थान के विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया गया।
डॉ. गोस्वामी ने बताया कि पहले ट्रांसप्लांट अलग-अलग किए जाते थे, लेकिन पहली बार राज्य में लगातार दो दिनों में दो सफल ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है।
सोमवार को दक्षिण त्रिपुरा के बैखोरा के 36 वर्षीय व्यक्ति का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ, जिसमें उसे उसके 33 वर्षीय बचपन के दोस्त ने किडनी दान की।
मंगलवार को पश्चिम त्रिपुरा के चंपकनगर के 33 वर्षीय व्यक्ति का ट्रांसप्लांट किया गया, जिसे उसके 59 वर्षीय पिता ने किडनी दान की।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सभी डोनर और मरीज फिलहाल स्थिर हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
ये ऑपरेशन नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किए, जिसमें मणिपुर के विशेषज्ञों का भी सहयोग रहा।
डॉ. गोस्वामी ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छठा ट्रांसप्लांट सोमवार सुबह शुरू हुआ और करीब 6 घंटे में पूरा हुआ, जबकि सातवां ट्रांसप्लांट मंगलवार सुबह शुरू होकर लगभग 5 घंटे में संपन्न हुआ।
अधिकारियों का कहना है कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि त्रिपुरा में पहला किडनी ट्रांसप्लांट 8 जुलाई 2024 को किया गया था, जबकि पांचवां ट्रांसप्लांट 4 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक हुआ था।
इस बीच, त्रिपुरा सरकार ने राज्य में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए एम्स, नई दिल्ली से मार्गदर्शन और सहयोग मांगा है।
पिछले साल जून में एम्स, नई दिल्ली के निदेशक एम. श्रीनिवास के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज, गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा किया था, ताकि राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन किया जा सके। यह दौरा मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुरोध पर किया गया था।
--आईएएनएस
एएमटी/डीएससी
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