ईरान के भीतर सक्रिय अल-कायदा सदस्य अमेरिकी टारगेट लिस्ट में: पीट हेगसेथ
वॉशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने आतंकवाद के मोर्चे पर सख्ती और बढ़ा दी है। पेंटागन के ताजा बयान में कहा गया कि ईरान के भीतर सक्रिय अल-कायदा से जुड़े तत्व अब अमेरिकी निशाने पर हैं।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के बावजूद अमेरिका का ध्यान आतंकवाद-रोधी कार्रवाई पर बना हुआ है।
उन्होंने कहा, “अल-कायदा अब भी हमारा दुश्मन है और ईरान में हमारी टारगेट लिस्ट में बहुत से लोग शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस संगठन से जुड़ा है और ईरानी क्षेत्र से काम कर रहा है, तो उसे वैध लक्ष्य माना जाएगा। अगर वे अल-कायदा को शरण दे रहे हैं, तो वे निश्चित रूप से उस सूची में शामिल होंगे।
ये टिप्पणियां अल-कायदा नेतृत्व के ठिकानों और इस संभावना को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में आईं कि क्या ऐसे लोग ईरान के भीतर सक्रिय हो सकते हैं।
हेगसेथ ने अमेरिकी लक्ष्यों के व्यापक दायरे पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान में हमारी टारगेट लिस्ट में बहुत से लोग हैं, जिससे संकेत मिलता है कि आतंकवाद-रोधी प्राथमिकताएं सैन्य योजनाओं का हिस्सा बनी हुई हैं।
पेंटागन ने कहा कि ऐसे आकलन अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत उन खतरों को ट्रैक और निष्क्रिय किया जाता है जो अमेरिकी बलों और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने संकेत दिया कि ईरान की सैन्य संरचना पर दबाव जारी है, जिससे उग्रवादी समूहों की गतिविधियों के लिए जगह और सीमित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि हम प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों, पुर्जों के भंडारण स्थलों और अनुसंधान सुविधाओं के खिलाफ सटीक हमले जारी रखे हुए हैं।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी अभियान स्थापित प्रक्रियाओं के तहत चलाए जाते हैं।
केन ने कहा, “हमारे पास कई प्रक्रियाएं और प्रणालियां हैं, जिनके जरिए नागरिकों होने वाले जोखिम से लेकर कानूनी पहलुओं तक सभी बातों पर सावधानीपूर्वक विचार करते हैं… और हमेशा वैध लक्ष्यों पर ही हमला किया जाता है।”
इन बयानों से संकेत मिलता है कि यह संघर्ष पारंपरिक सैन्य उद्देश्यों से आगे बढ़कर ईरानी क्षेत्र में सक्रिय गैर-राज्य तत्वों के खिलाफ कार्रवाई तक फैल सकता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
पाकिस्तान में महिलाओं के प्रसव के बाद शिशुओं को बेचने वाले क्लिनिक का भंडाफोड़
इस्लामाबाद, 31 मार्च (आईएएनएस)। हाल ही में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर जिले में सराई मुगल के पास शेखमान में एक छापे के दौरान एक क्लिनिक का खुलासा हुआ, जहां कथित रूप से कमजोर महिलाओं की डिलीवरी कराई जाती थी और उनके बच्चों को मुनाफे के लिए बेचा जाता था।
छापे की कार्रवाई के बाद गिरफ्तारियां की गईं और क्लिनिक को बंद कर दिया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह इस नेटवर्क का केवल एक छोटा हिस्सा था, जो निगरानी की कमी से फल-फूल रहा था।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के लेख के अनुसार, पाकिस्तान में अक्सर तीन महत्वपूर्ण कमजोरियों का शोषण किया जाता है। जो महिलाएं सामाजिक कलंक का सामना करती हैं, विशेषकर अविवाहित माताएं, उन्हें गोपनीयता में रहना पड़ता है, जिससे निगरानी कम होती है और शोषण का खतरा बढ़ जाता है। संगठित दलाल इन परिस्थितियों से लाभ उठाते हैं, जिससे आपूर्ति और मांग लगातार जारी रहती है।
लेख के अनुसार, इसे रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप और समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों को शिशु तस्करी के मामलों को संगठित आपराधिक गतिविधि के रूप में देखना चाहिए।
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, क्लिनिकों और मामलों की जांच न केवल लाइसेंस और प्रमाण-पत्रों के लिए की जानी चाहिए, बल्कि संदिग्ध प्रसव के पैटर्न और व्यापक नेटवर्क से संबंधों की भी जांच की जानी चाहिए। जांच में सभी प्रतिभागियों की पहचान करनी चाहिए, जिसमें खरीदार और सुविधा प्रदान करने वाले शामिल हैं, और वित्तीय तथा लॉजिस्टिक लिंक का पता लगाना चाहिए। जोखिम में पड़ी महिलाओं को गोपनीय सहायता प्रणाली और विनियमित गोद लेने की व्यवस्था तक पहुंच की आवश्यकता है।
कलंक को कम करने और शोषण की शीघ्र रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। इसके अलावा, एक समर्पित कानून प्रवर्तन कार्यबल की आवश्यकता है, जिसकी एकमात्र जिम्मेदारी ऐसे नेटवर्कों को ध्वस्त करना हो, जिसके लिए उनके संचालन का मानचित्रण करके सभी संबंधित व्यक्तियों और संबंधों का पता लगाया जा सके। इसके बाद इन नेटवर्कों में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और दंडित किया जाना चाहिए।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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