घाटी में आतंकियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन, गांदरबल में घेराबंदी के बाद फायरिंग शुरू, सर्च ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां अराहमा के जंगली इलाकों में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ शुरू हो गई है. यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबलों ने आतंकियों की आवाजाही की सटीक खुफिया जानकारी मिलने के बाद इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चलाया था. जैसे ही सेना और पुलिस की संयुक्त टीम जंगल के ऊपरी हिस्सों में पहुंची, वहां छिपे हुए आतंकियों ने खुद को घिरता देख सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. जवानों ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद से ही पूरे इलाके में रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है.
आईजीपी कश्मीर ने खुद संभाली कमान
इस ऑपरेशन को भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस मिलकर अंजाम दे रहे हैं. सेना की चिनार कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखने पर जब चुनौती दी गई, तो आतंकियों ने हमला कर दिया. हालात की गंभीरता को देखते हुए कश्मीर के आईजीपी (IGP) खुद मौके पर पहुंच गए हैं और ऑपरेशन की सीधी निगरानी कर रहे हैं. घने जंगल और पहाड़ी इलाका होने के कारण ऑपरेशन में काफी सावधानी बरती जा रही है ताकि आतंकियों को भागने का कोई मौका न मिले. सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है.
उरी सेक्टर में भी मारा गया था आतंकी
आपको बता दें कि यह मुठभेड़ ऐसे समय में हो रही है जब कुछ ही हफ्ते पहले बारामूला जिले के उरी सेक्टर में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की थी. 14 और 15 मार्च की दरम्यानी रात को उरी के बुच्छर इलाके में घुसपैठ की कोशिश कर रहे एक पाकिस्तानी आतंकवादी को सेना और पुलिस ने मार गिराया था. उस समय भी पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि सीमा पार से घुसपैठ की साजिश रची जा रही है. उरी में मारे गए आतंकी के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ था, जिसमें एके राइफल, पिस्तौल और अन्य युद्धक सामग्री शामिल थी.
सर्च ऑपरेशन अभी भी है जारी
गांदरबल के अराहमा जंगल में चल रही इस मुठभेड़ के बीच सुरक्षाबल बेहद सतर्क हैं. अधिकारियों का कहना है कि हमारा मुख्य उद्देश्य इलाके को पूरी तरह से आतंक मुक्त करना है. जंगल का इलाका होने के कारण अतिरिक्त सुरक्षाबलों को भी बैकअप के लिए बुलाया गया है. सेना और पुलिस को शक है कि जंगल में दो से तीन आतंकी छिपे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी आतंकी वहां से निकल न पाए. घाटी में पिछले कुछ दिनों से सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और आतंकियों के हर नापाक मंसूबे को नाकाम करने के लिए लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं.
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'साथ नहीं दिया तो संकट में मदद की उम्मीद न रखें', ईरान मुद्दे पर ट्रंप का सख्त संदेश
वॉशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने प्रमुख पश्चिमी सहयोगी देशों फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इन देशों पर ईरान के खिलाफ वॉशिंगटन की कार्रवाई का समर्थन न करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि भविष्य के संकटों में अमेरिका उनकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा।
फ्रांस की आलोचना करते हुए कहा कि उसने इजरायल जा रहे और सैन्य साजो-सामान से लदे अमेरिकी विमानों को अपने क्षेत्र से उड़ने की अनुमति नहीं दी। साथ ही उन्होंने ईरान संघर्ष पर यूनाइटेड किंगडम के रुख को लेकर भी उस पर निशाना साधा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, फ्रांस देश ने इजरायल जा रहे उन विमानों को अपने क्षेत्र से उड़ने नहीं दिया, जो सैन्य साजो-सामान से लदे हुए थे। फ्रांस ने ईरान के मामले में बिल्कुल भी मदद नहीं की, जिसे हमने सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है। अमेरिका इस बात को हमेशा याद रखेगा।
ये टिप्पणियां नाटो के पुराने सहयोगी देशों के प्रति ट्रंप के तेवरों में आई एक बड़ी तल्खी को दर्शाती हैं। वॉशिंगटन इस बात से नाराज है कि ईरान के खिलाफ उसके अभियानों में यूरोपीय देशों से उसे उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला है।
ट्रंप ने उन देशों को भी एक कड़ा संदेश दिया, जिनकी ऊर्जा आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण बाधित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है।
उन्होंने कहा कि वे सभी देश जिनको होर्मुज स्ट्रेट की वजह से जेट ईंधन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए मेरे पास सुझाव है। अमेरिका से खरीदें, हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है। या फिर थोड़ी हिम्मत जुटाएं, होर्मुज स्ट्रेट तक जाएं।
उन्होंने आगे कहा कि जो सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई में हिस्सा लेने को तैयार नहीं हैं, उन्हें अब अमेरिका के समर्थन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
ट्रंप ने कहा, आप लोगों को अब अपने लिए खुद लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब आपकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारे मुश्किल वक्त में हमारे साथ खड़े नहीं हुए।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिका की कार्रवाई के चलते ईरान पहले ही काफी कमजोर हो चुका है।
उन्होंने लिखा, ईरान असल में पूरी तरह से तबाह हो चुका है। मुश्किल काम पूरा हो चुका है। अब जाइए और अपना तेल खुद हासिल कीजिए।
इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि मध्य पूर्व में सैन्य रणनीति और जिम्मेदारी साझा करने को लेकर वाशिंगटन और उसके यूरोपीय साझेदारों के बीच दूरी बढ़ रही है।
फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम पारंपरिक रूप से नाटो में अमेरिका के प्रमुख सहयोगी रहे हैं और खाड़ी क्षेत्र सहित सुरक्षा मामलों में करीबी तालमेल रखते आए हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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