पश्चिम एशिया संकट में भारत की भूमिका की सराहनीय: यूएई राजदूत
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। भारत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजदूत अब्दुलनासेर अलशाली ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट में नई दिल्ली की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत की गहरी क्षेत्रीय भागीदारी और रचनात्मक कूटनीतिक परंपरा उसकी आवाज को काफी वजन देती है।
राजदूत अब्दुलनासेर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ टेलीफोनिक बातचीत को एक भाईचारे के इशारे के रूप में देखा गया और यह दोनों नेताओं के बीच दशकों से विकसित करीबी संबंधों को दर्शाता है।
आईएएनएस से खास बातचीत में अलशाली ने कहा, इस संकट में भारत की भूमिका की पहले ही काफी सराहना हो चुकी है। हमले शुरू होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पहले विश्व नेताओं में से थे जिन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को फोन किया था। उस फोन कॉल को भाईचारे के एक कार्य के तौर पर और उन दो नेताओं के बीच के निजी बंधन के प्रतिबिंब के तौर पर देखा गया, जिन्होंने एक दशक से भी ज्यादा समय से इस साझेदारी को मिलकर बनाया है।
उन्होंने कहा, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2817 का समर्थन किया और इसे 135 देशों के साथ सह-प्रायोजित किया। यह संकल्प एक शक्तिशाली संदेश देता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय राज्य संप्रभुता पर हमलों या नागरिकों और महत्वपूर्ण अवसंरचना के जानबूझकर लक्ष्य बनाने को बर्दाश्त नहीं करेगा। भारत एक प्रमुख शक्ति है और वेस्ट एशियाई क्षेत्र में इसके गहरे संबंध हैं, और इसकी आवाज उसकी मजबूत और रचनात्मक कूटनीतिक परंपरा की विश्वसनीयता के माध्यम से महत्व रखती है।
जब उनसे पूछा गया कि ईरान-इज़रायल युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को वे कैसे देखते हैं, तो अलशाली ने कहा कि 28 फरवरी से, ईरान ने यूएई और उसके पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवादी आक्रामकता का एक लगातार अभियान चलाया है।
उन्होंने बताया कि 29 मार्च तक 414 बैलिस्टिक मिसाइलों, 15 क्रूज मिसाइलों और 1,914 ड्रोन ने यूइई को निशाना बनाया है।
बातचीत में उन्होंने बताया, जो खास तौर पर परेशान करने वाला है, वह यह है कि ये हमले उन देशों के खिलाफ नहीं हैं जो ईरान के साथ संघर्ष में शामिल हैं, बल्कि इसके पड़ोसी देशों पर हैं, जिनका लगातार प्रयास रहा है कि संघर्ष को बढ़ावा न मिले।
जब उनसे पूछा गया कि क्या यूएई इरानी हमलों के जारी रहने पर पलटवार करेगा, तो राजदूत ने कहा कि देश ने इस संकट के दौरान सावधानीपूर्ण, संतुलित और रणनीतिक संयम का पालन किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यूएई के पास अपने क्षेत्र की रक्षा और आक्रामकता को रोकने का संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत पूरा और वैध अधिकार है, और वह अपने क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। साथ ही अपने नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
अलशाली ने कहा, इरान ने जानबूझकर मिसाइलें और ड्रोन नागरिक अवसंरचना, आवासीय इमारतें, हवाई अड्डे और अन्य नागरिक सुविधाओं की ओर लक्षित किए हैं। इन हमलों में जान-माल की हानि हुई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य और गैरकानूनी है। इसके साथ ही यूएई सशस्त्र बलों ने अपने देश की हवाई सीमा और क्षेत्र की रक्षा में असाधारण तत्परता दिखाई।
उन्होंने कहा कि खुले आक्रामकता के बावजूद, यूएई की स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है। राष्ट्रीय संस्थाएं उच्चतम स्तर की तत्परता के साथ काम कर रही हैं, महत्वपूर्ण क्षेत्र बिना बाधा के संचालित हो रहे हैं, और दैनिक जीवन सामान्य रूप से जारी है।
यूएई के राजदूत ने यह भी कहा कि नागरिकों, निवासियों और आगंतुकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे कोई समझौता नहीं कर सकता।
अलशाली ने कहा, हमारा दृष्टिकोण हमेशा कूटनीति की ओर रहा है, लेकिन कूटनीति में पारस्परिकता की आवश्यकता होती है। इरान गैस और तेल के क्षेत्रों और नागरिक अवसंरचना पर मिसाइलें नहीं छोड़ सकता और साथ ही शांति की तलाश का दावा कर सकता है। यूएई की संप्रभुता, इसकी क्षेत्रीय अखंडता और यहां सभी की सुरक्षा गैर-वार्ता योग्य हैं।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन 2026: रूसी उप विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी की उम्मीद जताई
मॉस्को, 31 मार्च (आईएएनस)। मॉस्को में इस वर्ष के अंत में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की उम्मीद जताई है।
रूस की प्रमुख समाचार एजेंसी तास के अनुसार, रुडेंको ने कहा, “इस साल रूस-भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की बारी रूस की है। हमें उम्मीद है कि भारतीय प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण का लाभ उठाते हुए, सुविधाजनक समय पर रूस की आधिकारिक यात्रा करेंगे।”
उन्होंने कहा कि रूस और भारत के लिए विभिन्न स्तरों पर नियमित और व्यवस्थित संपर्क बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
पिछले दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की एक महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा की थी। यह यात्रा राष्ट्रीय राजधानी में दो दिनों तक चली, जिसमें शिखर स्तर की वार्ता, औपचारिक कार्यक्रम और कई द्विपक्षीय चर्चाएं शामिल थीं। इन चर्चाओं में रक्षा, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
इस दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ औपचारिक वार्ता की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-रूस साझेदारी की स्थिति की समीक्षा की।
इसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया। ऊर्जा, परमाणु शक्ति, व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी में सहयोग पर विशेष जोर दिया गया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में एक भोज का आयोजन किया था।
2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार रूस गए थे। पहली बार जुलाई में 22वें रूस-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए और बाद में अक्टूबर में कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए।
रूस भारत का एक पुराना और भरोसेमंद साझेदार रहा है। भारत-रूस संबंधों का विकास भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2000 में ‘भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी’ की घोषणा के बाद से दोनों देशों के संबंधों में गुणात्मक सुधार हुआ है। राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।
2010 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस रणनीतिक साझेदारी को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया गया था।
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
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