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चीन- खाली फ्लैट खरीद परिजनों की अस्थियां रखने पर बैन:कब्रिस्तान महंगा होने पर लोग प्रोपर्टी खरीद रहे थे, उसमें अस्थियां रखते थे

चीन की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत लोग अपने परिजनों की राख को खाली अपार्टमेंट में नहीं रख पाएंगे। इसे ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कानून कहा जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक कब्रिस्तानों के अलावा कहीं और शव दफनाने या मकबरे बनाने पर भी रोक होगी बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कब्रिस्तान लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में ‘गुहुई फांग’ यानी ऐसे फ्लैट्स का चलन बढ़ गया है, जहां लोग अपने परिजनों की अस्थियां रखते हैं। तेजी से शहरीकरण और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण शहरों में कब्रिस्तान की जमीन कम होती जा रही है और उनकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। प्रॉपर्टी खरीदना, कब्रिस्तान खरीदने से सस्ता चीन में हाल के वर्षों में घरों की कीमतें काफी गिरी हैं और 2021 के मुकाबले 2025 तक करीब 40% तक कम हो गई हैं। लोग इसक फायदा उठा रहे हैं। खाली फ्लैट खरीदकर उसमें राख रखना, महंगे कब्रिस्तान या अंतिम संस्कार के खर्च से सस्ता पड़ता है। इन खाली फ्लैट्स को लोग एक तरह से पूजा स्थल में बदल देते हैं, जहां मोमबत्तियां, लाल रोशनी और अलग-अलग पीढ़ियों की अस्थियां सजा कर रखी जाती हैं। चीनी मीडिया के मुताबिक, ऐसे फ्लैट्स की पहचान अक्सर बंद परदों या पूरी तरह सील की गई खिड़कियों से होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अंतिम संस्कार का खर्च जापान के बाद चीन में दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा है। चीन में कब्रिस्तान की जगह आमतौर पर सिर्फ 20 साल की लीज पर मिलती है, जबकि घरों के लिए 70 साल के इस्तेमाल का अधिकार मिलता है। इसी वजह से कई लोग अब कब्रिस्तान की बजाय फ्लैट को ज्यादा बेहतर विकल्प मानने लगे हैं। हालांकि अंतिम संस्कार के लिए फ्लैट खरीदने से शहरों में हाउसिंग व्यवस्था गड़बड़ा रही है। इससे बाजार का संतुलन बिगड़ने का खतरा भी है। सरकार नहीं चाहती कि घरों का इस तरह से इस्तेमाल किया जाए। शव दफनाने की कीमत- 20 से 40 लाख रुपए नया कानून 31 मार्च से लागू हो गया है। यह 6 अप्रैल को होने वाले छिंगमिंग त्योहार से ठीक पहले है। इस त्योहार में लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की सफाई करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। राजधानी बीजिंग में एक सामान्य कब्र की कीमत करीब 1.5 लाख युआन (लगभग 20 लाख रुपए) से शुरू होकर 3 लाख युआन (करीब 40 लाख रुपए) तक जाती है। यह बीजिंग के हिसाब से भी काफी महंगा है। वहीं, बीजिंग के चांगपिंग तियानशो कब्रिस्तान में दफनाने की कीमत करीब 10,000 युआन से 2 लाख युआन (1.3 लाख से 26 लाख रुपए) तक है। इसे दफन का इको फ्रेंडली विकल्प माना जाता है। इसमें जमीन कम घेरने वाले तरीके अपनाए जाते हैं। जैसे बिना बड़े कब्रिस्तान प्लॉट के दफन, पेड़ों के पास या सामूहिक जगहों पर दफनाना। इसमें महंगे पत्थर, बड़ी जगह या स्थायी स्मारक नहीं होते, इसलिए यह सस्ता पड़ता है। सोशल मीडिया पर नए कानून को लेकर सवाल सोशल मीडिया पर लोग इस कानून को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चीन में सोशल मीडिया वीबो पर इससे जुड़ा हैशटैग 70 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। एक व्यक्ति ने वीबो पर लिखा, “अगर कब्रिस्तान सस्ते होते, तो कोई ऐसा क्यों करता?” एक यूजर ने लिखा, “कौन जाकर चेक करेगा? क्या हर अस्थि कलश में GPS लगाया जाएगा?” वहीं दूसरे ने कहा, “छूट मिलने के बाद भी कब्रिस्तान की जगह बहुत महंगी है।” एक अन्य यूजर ने कहा, “इन नियमों को लागू करने वाले कैसे पता लगाएंगे कि फ्लैट में सिर्फ राख रखी गई है? और ऐसे मामलों से कैसे निपटेंगे?” चीन में तेजी से बढ़ रही बुजुर्ग आबादी चीन में तेजी से बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर मौतों की संख्या पर दिख रहा है। 2025 में करीब 1.13 करोड़ लोगों की मौत हुई, जबकि 2015 में यह संख्या करीब 98 लाख थी। यानी 10 साल में मौतों का आंकड़ा काफी बढ़ गया है। वहीं दूसरी तरफ जन्म दर लगातार गिर रही है। 2025 में सिर्फ करीब 79 लाख बच्चों का जन्म हुआ। इसका मतलब है कि देश में मरने वालों की संख्या, जन्म लेने वालों से काफी ज्यादा हो गई है। इससे आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। इस स्थिति का एक बड़ा असर जमीन पर भी पड़ रहा है। शहरों में कब्रिस्तान के लिए जगह कम होती जा रही है, खासकर शंघाई जैसे बड़े और घनी आबादी वाले शहरों में। जमीन महंगी भी है और सीमित भी। इसी वजह से सरकार और स्थानीय प्रशासन “इकोलॉजिकल बुरियल” यानी पर्यावरण के अनुकूल अंतिम संस्कार के तरीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। इसमें ऐसे तरीके शामिल हैं जिनमें कम जमीन लगती है या जमीन की जरूरत ही नहीं पड़ती। जैसे- शंघाई में समुद्र में अस्थि विसर्जन तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में पहली बार ऐसे मामलों की संख्या 10 हजार से ज्यादा पहुंच गई। यह दिखाता है कि लोग अब पारंपरिक कब्र की बजाय सस्ते और कम जगह वाले विकल्प अपना रहे हैं।

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अमेरिका और यूरोप की तरह अब पंजाब में महज 6 मिनट में पुलिस सहायता मिलेगी- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

Punjab News: पंजाब में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने संगरूर में 508 अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहनों (ईआरवी) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. ये वाहन डायल-112 सेवा के तहत राज्य के सभी 28 पुलिस जिलों में तैनात किए जाएंगे, जिससे आपातकालीन स्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया समय में तेजी आएगी.

क्या है सरकार का लक्ष्य?

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य विकसित देशों की तर्ज पर पुलिस सहायता को और तेज बनाना है. नई व्यवस्था के तहत पुलिस अब लगभग 6 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचने का प्रयास करेगी. इन वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग, डैश कैमरा और मोबाइल डेटा सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकें लगाई गई हैं, जिससे निगरानी और प्रतिक्रिया दोनों बेहतर होंगी.

पुलिस की कार्यक्षमता में सुधार

सीएम मान ने बताया कि पिछले चार वर्षों में पुलिस वाहनों और आधुनिकीकरण पर करीब 327 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है. इसके परिणामस्वरूप पुलिस की कार्यक्षमता में सुधार हुआ है और कानून-व्यवस्था को मजबूती मिली है. डायल-112 पर रोजाना करीब 15,000 कॉल आती हैं, जिनमें से लगभग 1,500 मामलों में तुरंत वाहन भेजे जाते हैं. पहले जहां प्रतिक्रिया समय 30-45 मिनट था, अब इसे घटाकर 13-14 मिनट कर दिया गया है.

नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने नशे के खिलाफ चल रहे अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और सजा दर 87 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने समाज से भी अपील की कि ऐसे तत्वों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए, ताकि इस समस्या से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके.

उन्होंने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि टाटा स्टील द्वारा पंजाब में बड़े निवेश की योजना बनाई जा रही है, जो राज्य की बेहतर सुरक्षा व्यवस्था को दर्शाता है.

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी खास पहल

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है. राज्य में एक विशेष सड़क सुरक्षा फोर्स बनाई गई है, जिसमें 1,597 प्रशिक्षित कर्मी और 144 आधुनिक वाहन शामिल हैं. यह फोर्स 4,200 किलोमीटर लंबे दुर्घटना-प्रभावित हाईवे पर तैनात है. इसके चलते सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 48 प्रतिशत तक कमी आई है.

ऐसे होगा पुलिस का बुनियादी ढांचा मजबूत 

पुलिस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर पुलिस स्टेशन के पास कम से कम एक वाहन उपलब्ध हो. इसके अलावा विशेष इकाइयों को भी मजबूत किया गया है, जिसमें एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स को नए वाहन दिए गए हैं. महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी अलग से कदम उठाए गए हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध कराना शामिल है.

भर्ती के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय

भर्ती के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय रही है. वर्ष 2022 से अब तक 12,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है. मार्च 2026 में भी नई भर्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है, जिससे पुलिस बल को और मजबूत किया जाएगा.

पुलिसिंग में जल्द AI का होगा उपयोग

मुख्यमंत्री ने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जल्द ही पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जाएगा, जिससे अपराध नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था और प्रभावी बनेगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम कर रही है और जनता के पैसे का उपयोग विकास कार्यों में किया जा रहा है. शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और बुनियादी ढांचे में सुधार सरकार की प्राथमिकता है.

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केंद्र सरकार ने ऋषिकेश बाईपास को 4-लेन बनाने की दी मंजूरी, तीन साल में पूरा होगा काम, CM धामी के प्रयास हुए सफल

ऋषिकेश बाईपास को 4-लेन बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ₹1105.79 करोड़ की मंजूरी दे दी है। दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लगातार प्रयासों और केंद्र सरकार से की गई पैरवी के बाद भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दे दी है। … Wed, 01 Apr 2026 20:25:39 GMT

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