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बलूचिस्तान में 30 से अधिक हमलों में मारे गए पाकिस्तानी सेना के कई सैन‍िक : बीएलए

क्वेटा, 31 मार्च (आईएएनएस)। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने मंगलवार को दावा किया कि उसने बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ 30 से अधिक समन्वित हमले किए, जिनमें कई सैनिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हो गए।

बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने एक बयान जारी कर कहा, कब्जा करने वाली पाकिस्तानी सेना के खिलाफ पूरे बलूचिस्तान में हमारे सुनियोजित हमलों का सिलसिला पूरी ताकत से जारी है। अब तक झाल मगसी, क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, वाशुक, दलबांदिन, खारान, पंजगुर और केच सहित कई इलाकों में 30 से ज्‍यादा हमले किए गए हैं। इन ऑपरेशनों में कब्जा करने वाली पाकिस्तानी सेना के कैंपों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, साथ ही राज्य-प्रायोजित डेथ स्क्वॉड के ठिकानों पर भी हमले किए गए।

उन्होंने कहा, इन ऑपरेशनों में आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कब्जा करने वाली सेना के कई सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए। दुश्मन को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इन सभी हमलों और दुश्मन को पहुंचाए गए विशिष्ट नुकसान के बारे में पूरी जानकारी जल्द ही मीडिया को जारी की जाएगी।

इससे पहले रविवार को बीएलए ने दावा किया था कि उसने 19 मार्च से 28 मार्च के बीच बलूचिस्तान के विभिन्न जि‍लों में 14 हमले किए। संगठन ने कहा कि इन ऑपरेशनों के परिणामस्वरूप कब्जा करने वाली पाकिस्तानी सेना के 18 सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने बताया कि संगठन के लड़ाकों ने प्रांत के वाशुक, खारान, कलात, मस्तुंग, सुराब, खुजदार, क्वेटा, तुरबत और बरखान इलाकों में 14 अलग-अलग ऑपरेशन किए।

उन्होंने बताया कि बीएलए के लड़ाकों ने सैन्य कैंपों, काफिलों और चौकियों पर हमले किए। लड़ाकों ने सफलतापूर्वक कई चौकियों पर कब्जा कर लिया, सैनिकों को हिरासत में ले लिया और हथियार तथा सैन्य उपकरण जब्त कर लिए।

प्रवक्ता ने यह भी बताया कि इन ऑपरेशनों के दौरान बीएलए के दो लड़ाके मारे गए। इन घटनाओं को कब्जा करने वाली सेना के साथ सीधी झड़प के रूप में वर्णित किया गया है। इसके अलावा, स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि शनिवार देर रात से बलूचिस्तान के कई जि‍लों में हाईवे, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, गैस पाइपलाइन और पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए जा रहे हैं।

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों की शुरुआत 28 मार्च की रात पंजगुर जिले से हुई, जहां बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान समर्थित सशस्त्र समूहों और सैन्य काफिलों को निशाना बनाया।

बताया गया है कि रविवार और सोमवार को भी क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, खारान सहित कई जगहों पर विस्फोट और सशस्त्र हमले हुए।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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ईरान के खिलाफ जमीनी हमला कर सकते हैं, मिशन तो हमारी शर्तों पर ही होगा खत्म: हेगसेथ

वाशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को दावा किया कि वो बूट्स ऑन द ग्राउंड के लिए तैयार हैं और संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। ये भी कहा कि अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो बम के जरिए बातचीत को अंजाम दिया जाएगा।

वाशिंगटन डीसी में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का अपडेट देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने आगामी योजनाओं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जज्बे और सैन्य ऑपशन को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दिया।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को लेकर बातचीत चल रही है और इसमें तेजी आ रही है, लेकिन साथ ही सैन्य ऑप्शन भी खुले हैं। अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी हमला (ग्राउंड इनवेजन) भी कर सकता है। हालांकि, शायद इसकी जरूरत न पड़े।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति थोड़ी अनप्रेडिक्टेबल यानी अनिश्चित रहने की है, ताकि दुश्मन अंदाजा न लगा सके कि अगला कदम क्या होगा?

उन्होंने कहा, आप कोई युद्ध तब तक न तो लड़ सकते हैं और न ही जीत सकते हैं, जब तक आप अपने विरोधी को यह बता दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं—जिसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल है।

हेगसेथ ने आगे कहा, हमारा विरोधी इस समय सोच रहा है कि ऐसे 15 अलग-अलग तरीके हैं जिनसे हम जमीनी सैनिकों के साथ उन पर हमला कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका उन विकल्पों को अमल में ला सकता है। या शायद हमें उनका इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े। शायद बातचीत से बात बन जाए। मुख्य बात यह है कि इस मामले में अप्रत्याशित बने रहें - निश्चित रूप से किसी को भी यह न पता चलने दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं।

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने भी पत्रकारों से कहा कि यूएस की सेना जिन सैन्य विकल्पों की श्रृंखला को अमल में ला सकती है, वह काफी व्यापक है।

उन्होंने कहा, मैं राष्ट्रपति के निर्णय लेने के दायरे को सीमित नहीं करना चाहूंगा, लेकिन कई ऐसी बातें हैं—जिनमें सबसे अहम बात यह है, जिस पर ईरान को गौर करना चाहिए—कि हमारे सैनिक वहां मौजूद हैं और वे एक दबाव बिंदु का काम करते हैं। इसलिए मेरा मानना ​​है कि मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए उन्हें कूटनीतिक स्तर पर इस बात पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए।

वहीं, ट्रंप के नाटो पर हमलावर रवैए को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि मिशन तो हमारी शर्तों पर ही खत्म होगा। राष्ट्रपति के शब्दों में कहें तो, इसे लेकर कोई शक नहीं है। जहां तक नाटो की बात है, यह फैसला राष्ट्रपति पर ही छोड़ दिया जाएगा। लेकिन मैं बस इतना कहूंगा कि बहुत कुछ स्पष्ट हो गया है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दुनिया को यह दिख गया है कि जब हम आजाद दुनिया की तरफ से इतने बड़े पैमाने पर कोई कोशिश करते हैं, तो हमारे सहयोगी अमेरिका के लिए क्या करने को तैयार होते हैं? उनकी मिसाइलों के रेंज में अमेरिका नहीं है। वे हमारे सहयोगियों और दूसरों तक पहुंचती हैं। फिर भी, जब हम अतिरिक्त मदद या सिर्फ बुनियादी हवाई मार्ग की अनुमति मांगते हैं, तो हमें सवालों, रुकावटों या हिचकिचाहट का सामना करना पड़ता है।

फिर हेगसेथ ने अंत में ट्रंप के ट्रुथ पोस्ट का मतलब समझाते हुए कहा कि राष्ट्रपति यही इशारा कर रहे हैं कि अगर आपके पास ऐसे देश हैं जो जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं, तो फिर आपके गठबंधन का कोई खास मतलब नहीं रह जाता है।

--आईएएनएस

केआर/

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