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1 अप्रैल से एफएंडओ पर बढ़ेगा एसटीटी, लंबे समय में सीमित प्रभाव

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2025-26 मंगलवार को समाप्त होने वाला है, ऐसे में निवेशक कई नए बदलावों के लिए तैयार हो रहे हैं, जिनमें संशोधित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) के नियम भी शामिल हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित बदलावों के बाद ब्रोकर्स, ट्रेडर्स और डिमैट अकाउंट धारकों में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) पर एसटीटी में हुई बढ़ोतरी को लेकर चिंता देखी जा रही है। खासतौर पर ऑप्शंस पर शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है।

नए नियमों के तहत फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एसटीटी बढ़ने से निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर उन फंड्स पर जो हाई-फ्रीक्वेंसी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर निर्भर हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद हुए इन बदलावों से एक्टिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी। हाल के आंकड़े भी दिखाते हैं कि जनवरी 2026 में ही एफपीआई ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है, जो वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और करेंसी दबाव का संकेत है।

ऐसे में एसटीटी बढ़ने से टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म और डेरिवेटिव-आधारित विदेशी निवेश के लिए भारत थोड़ा कम आकर्षक बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा, क्योंकि उनके फैसले कंपनी की कमाई, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता जैसे कारकों पर आधारित होते हैं।

कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बढ़ी हुई ट्रेडिंग लागत के कारण कुछ वैश्विक निवेश एशिया के अन्य बाजारों जैसे अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जहां एआई से जुड़े निवेश बढ़ रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एसटीटी बढ़ने से सरकार के टैक्स कलेक्शन में वृद्धि हो सकती है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम पर थोड़ा दबाव आ सकता है और एफपीआई की भागीदारी धीमी हो सकती है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि 1 अप्रैल से लागू यह बढ़ोतरी कुछ निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही है। इससे खासतौर पर रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर असर पड़ेगा, क्योंकि उनकी ट्रेडिंग लागत बढ़ जाएगी।

हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव अल्पकालिक ही रहेगा। शुरुआती गिरावट के बाद ट्रेडिंग गतिविधियां सामान्य हो जाती हैं और लंबे समय में बाजार का रुख ज्यादा नहीं बदलता।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अमेरिका-इजरायल की मदद करने वाले ईरानी नागरिकों को मिलेगी मौत की सजा, दो पर कसा शिकंजा

तेहरान, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर किसी ने भी यूएस-इजरायल को तस्वीरें या किसी भी तरह की जानकारी भेजी तो उसे मौत की सजा दी जाएगी। ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने यह जानकारी दी है।

असगर जहांगीर ने कहा, अमेरिका या इजरायल को कोई भी जानकारी देने पर मौत की सजा हो सकती है।

अमेरिका ने अपने ताजा हमले में ईरान के तेल भंडार को निशाना बनाया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के वीडियो को भी साझा किया। इसके बाद ही ईरान की तरफ से यह फैसला सामने आया है।

जहांगीर ने ईरानी मीडिया में सामने आए एक बयान में कहा कि पिछले अक्टूबर में पास हुए एक बेहतर जासूसी कानून के तहत, दुश्मन सरकारों (अमेरिका और इजरायल) को कोई फोटो या वीडियो भेजने पर सारा सामान जब्त करने और मौत की सजा हो सकती है।

जहांगीर ने कहा, “जब तबाही वाले क्षेत्र की फोटो ली जाती है, तो दुश्मन को बताया जाता है कि टारगेट सही जगह पर है। ऐसी जानकारी देना दुश्मन के साथ इंटेलिजेंस में सहयोग करने जैसा ही है।”

ईरान के अधिकारियों ने पहले अमेरिका और इजरायल को जानकारी भेजने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही इस मामले में ईरानी सरकार ने कार्रवाई करते हुए दो अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिए। इन पर कथित तौर पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे।

तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बल ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर अमेरिका-इजरायली जासूसी सर्विस को संवेदनशील जगहों की जानकारी भेजने के आरोप लगाए गए।

तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि दोनों ने कथित तौर पर सुरक्षित जगहों की जानकारी देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी ली थी। उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्वी अजरबैजान प्रांत के ओस्कू इलाके से हिरासत में लिया गया और न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस हफ्ते की शुरुआत में देश में पैरामिलिट्री इराकी फोर्स के काफिले का स्वागत करने के बाद इराक के लोगों का शुक्रिया अदा किया है। पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा, “इराकी मुस्लिम लोग इस गलत लड़ाई में ईरान के साथ बहादुरी से खड़े रहे। यह रवैया जगह की मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और साझा धार्मिक मूल्यों की वजह से है। मैं इराकी लोगों, अधिकारियों और लड़ाकों से दिल से हाथ मिलाता हूं।”

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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