'तुम बिना कपड़ों के पूजा करो, मेरी तरह करोड़पति बन जाओगी,' कानपुर में अंधविश्वास के चलते ससुर ने बहू शर्मनाक हरकत
कानपुर से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विवाहिता ने अपने ससुराल वालों पर तंत्र-मंत्र के नाम पर प्रताड़ना, मारपीट और दहेज मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
आधी रात की पूजा और अजीब नियम
पीड़िता के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल का माहौल बदल गया. उसने बताया कि आधी रात के बाद घर में तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा शुरू होती थी. सास और ससुर का दावा था कि इसी पूजा की वजह से परिवार को संपत्ति और सफलता मिली है, इसलिए इसमें शामिल होना जरूरी है.
महिला का आरोप है कि इस पूजा में शामिल होने के लिए उसे ऐसे नियम बताए गए, जो उसके लिए अस्वीकार्य थे. उसने इसका विरोध किया और साफ मना कर दिया.
विरोध करने पर बढ़ा दबाव
पीड़िता का कहना है कि जब उसने इन गतिविधियों में हिस्सा लेने से इनकार किया, तो उस पर दबाव बनाया गया. उसने आरोप लगाया कि पति और ससुर ने उसके साथ जबरदस्ती की और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. ससुर ने कहा कि 'बिना कपड़ों के पूजा करोगी तो करोड़पति बन जाओगी मेरी तरह.'
महिला ने यह भी बताया कि उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. इसके बाद उसे जबरन पूजा में शामिल किया गया.
मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप
शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर महिला के साथ मारपीट भी की गई. उसने बताया कि उसे चप्पलों से पीटा गया और कहा गया कि उसके ऊपर किसी तरह का ‘प्रभाव’ है, जिसे दूर करना जरूरी है. पीड़िता का दावा है कि यह एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि लगातार ऐसा होता रहा. इससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा.
दहेज की मांग ने बढ़ाई परेशानी
मामले में दहेज का एंगल भी सामने आया है. महिला ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने उससे दो करोड़ रुपये और एक किलो सोना लाने की मांग की. उसका कहना है कि उसके परिवार ने शादी में पहले ही भारी खर्च किया था, ऐसे में यह मांग पूरी करना संभव नहीं था.
पति पर भी गंभीर आरोप
पीड़िता ने अपने पति पर भी साथ न देने का आरोप लगाया है. उसने कहा कि जब उसने मदद मांगी, तो पति ने उसका साथ नहीं दिया और हमेशा अपने माता-पिता का पक्ष लिया. इससे उसकी स्थिति और भी कठिन हो गई.
मायके लौटकर दर्ज कराई शिकायत
लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर महिला जनवरी 2025 में अपने मायके लौट आई. वहां उसने अपने परिवार को पूरी घटना बताई, जिसके बाद पुलिस से संपर्क किया गया. हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई और समझौते की कोशिशें होती रहीं. बाद में मामला दर्ज किया गया.
पुलिस जांच जारी
महिला थाने में दर्ज एफआईआर में पति, सास, ससुर, देवर समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला न सिर्फ घरेलू हिंसा बल्कि अंधविश्वास और दहेज प्रथा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है। फिलहाल जांच जारी है और सच सामने आने का इंतजार है.
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1 अप्रैल से एफएंडओ पर बढ़ेगा एसटीटी, लंबे समय में सीमित प्रभाव
नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2025-26 मंगलवार को समाप्त होने वाला है, ऐसे में निवेशक कई नए बदलावों के लिए तैयार हो रहे हैं, जिनमें संशोधित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) के नियम भी शामिल हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित बदलावों के बाद ब्रोकर्स, ट्रेडर्स और डिमैट अकाउंट धारकों में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) पर एसटीटी में हुई बढ़ोतरी को लेकर चिंता देखी जा रही है। खासतौर पर ऑप्शंस पर शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है।
नए नियमों के तहत फ्यूचर्स पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी को 0.10 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एसटीटी बढ़ने से निकट अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर उन फंड्स पर जो हाई-फ्रीक्वेंसी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बजट के बाद हुए इन बदलावों से एक्टिव ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी। हाल के आंकड़े भी दिखाते हैं कि जनवरी 2026 में ही एफपीआई ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है, जो वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और करेंसी दबाव का संकेत है।
ऐसे में एसटीटी बढ़ने से टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म और डेरिवेटिव-आधारित विदेशी निवेश के लिए भारत थोड़ा कम आकर्षक बन सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि के निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा, क्योंकि उनके फैसले कंपनी की कमाई, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता जैसे कारकों पर आधारित होते हैं।
कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बढ़ी हुई ट्रेडिंग लागत के कारण कुछ वैश्विक निवेश एशिया के अन्य बाजारों जैसे अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जहां एआई से जुड़े निवेश बढ़ रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एसटीटी बढ़ने से सरकार के टैक्स कलेक्शन में वृद्धि हो सकती है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम पर थोड़ा दबाव आ सकता है और एफपीआई की भागीदारी धीमी हो सकती है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि 1 अप्रैल से लागू यह बढ़ोतरी कुछ निवेशकों के लिए चौंकाने वाली रही है। इससे खासतौर पर रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर असर पड़ेगा, क्योंकि उनकी ट्रेडिंग लागत बढ़ जाएगी।
हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव अल्पकालिक ही रहेगा। शुरुआती गिरावट के बाद ट्रेडिंग गतिविधियां सामान्य हो जाती हैं और लंबे समय में बाजार का रुख ज्यादा नहीं बदलता।
--आईएएनएस
डीबीपी
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