Hill Stations: शिमला-मनाली से हटकर इन 3 हिल स्टेशनों पर बिताएं सुकून भरी छुट्टियां, दोस्तों के साथ बनाएं प्लान
Hill Stations In India: गर्मियों का मौसम आते ही छुट्टियों की प्लानिंग शुरू हो जाती है और अक्सर लोग शिमला, मनाली या नैनीताल जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों की ओर रुख करते हैं। लेकिन अगर आप इस बार शांति, ताजी हवा और नेचर के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो भीड़-भाड़ से दूर ये 3 हिल स्टेशन आपके लिए परफेक्ट हैं। यहां आप दोस्तों के साथ सुकून भरी छुट्टियां मना सकते हैं, ट्रेकिंग कर सकते हैं, प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं और रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं। आइए जानते हैं इन खास हिल स्टेशनों के बारे में।
कौसानी, उत्तराखंड
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए मशहूर है और इसे अक्सर “भारत का स्विट्जरलैंड” कहा जाता है। यहां से हिमालय की प्रमुख चोटियां जैसे त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली साफ दिखाई देती हैं। घने चीड़ के जंगलों और हरियाली से भरे चाय के बागानों के बीच बसा यह छोटा सा गांव उन लोगों के लिए आदर्श है, जो शांति और प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं।
शोझा, हिमाचल प्रदेश
कुल्लू जिले में स्थित शोझा एक शांत और कम व्यस्त हिल स्टेशन है। यह जलोड़ी पास के पास स्थित है और अपनी पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला और पुराने मंदिरों के लिए जाना जाता है। यहां की हरियाली और शांत वातावरण आपको शहर की भागदौड़ से दूर आराम और सुकून का अनुभव कराएंगे।
पब्बर वैली, हिमाचल प्रदेश
शिमला से थोड़ी दूरी पर स्थित पब्बर वैली अभी भी अधिकांश पर्यटकों की नजरों से दूर है। यह घाटी अपने सेब के बागानों, कल-कल बहती पब्बर नदी और घने देवदार के जंगलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां आप ट्रेकिंग, फिशिंग और कैंपिंग का आनंद ले सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि पब्बर वैली अभी भी हिल स्टेशन के रूप में कम जानी-पहचानी है।
रूस का आरोप,'अमेरिका- इजरायल नहीं चाहते ईरान और अरब देशों के बीच संबंध रहें सामान्य'
मास्को, 31 मार्च (आईएएनएस)। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का आरोप है कि अमेरिका-इजरायल शांति की इच्छा नहीं रखते हैं। उन्होंने रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल की एक बैठक में दावा किया कि अमेरिका और इजरायल, ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सामान्य रिश्ते (नॉर्मलाइजेशन) नहीं चाहते हैं।
उन्होंने कहा, अमेरिका और इजरायल, ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य होने से रोक रहे हैं, और 2010 में रूस की पहल पर किए गए सामूहिक खाड़ी सुरक्षा प्रस्ताव को कमजोर कर रहे हैं।
लावरोव ने कहा कि क्षेत्र में चल रहे “रेजीम चेंज” (तख्तापलट) के पीछे असली मकसद तेल और गैस संसाधनों पर कब्जा हासिल करने की बेताब कोशिश है। लावरोव ने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह संकट पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है और एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो सकता है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ये भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, ट्रंप कहते हैं कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कोई परवाह नहीं है। बर्बर तरीके से शहर उजाड़े जा रहे हैं। अस्पतालों पर हमले हो रहे हैं। ऐसे हालात में हम और हमारे सहयोगियों के अलावा किसी को भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों की परवाह नहीं है।
इससे पहले रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गल्फ देशों के अपने समकक्षों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस कर बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और संघर्ष विराम को रूरी बताया। उन्होंने तत्काल रूप से इस युद्ध को रोकने की अपील की। लावरोव ने कहा कि रूस, गल्फ देशों के साथ घनिष्ठ तालमेल बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, जिससे जल्द से जल्द संघर्ष विराम सुनिश्चित किया जा सके।
लावरोव ने न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया वर्ल्ड ऑर्डर पुनर्गठन दौर से गुजर रही है, जिससे उम्मीद है कि एक नए बहुध्रुवीय विश्व का निर्माण होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी पुनर्गठन बिखरा हुआ और अव्यवस्थित लग रहा है।
--आईएएनएस
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