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अमेरिका-ईरान युद्ध से सोने में 17 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट, एक महीने में 14 प्रतिशत से अधिक लुढ़का

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते सोने में मार्च में 17 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है और इस दौरान कीमती घातु करीब 14.5 प्रतिशत सस्ती हो गई है।

इससे पहले सोने में इतनी बड़ी गिरावट करीब 17 वर्ष पहले देखी गई थी, जब अक्टूबर 2008 में सोने का दाम करीब 16.8 प्रतिशत कम हो गया है।

मौजूदा समय में कॉमेक्स पर सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के आसपास है, जो कि इस महीने की शुरुआत में सोना 5,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास था।

जानकारों का कहना है कि सोने में आई तेज गिरावट की वजह मुनाफावसूली, डॉलर इंडेक्स में तेजी आना, बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और कच्चे तेल जैसी अन्य कमोडिटी में तेजी आना था। इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर सोने पर दबाव बनाने का काम किया।

जानकारों ने आगे बताया कि पिछले चार वर्षों में सोने के व्यापार का तरीका बदल गया है।

उन्होंने कहा, “यूक्रेन युद्ध से पहले, सोने की कीमत बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के विपरीत होती थी; यानी जब ये सूचकांक गिरते थे तो सोने की कीमत बढ़ती थी, और जब ये सूचकांक बढ़ते थे तो सोने की कीमत गिरती थी।”

उन्होंने आगे कहा, “यूक्रेन युद्ध के बाद की अवधि ने इन संबंधों को पूरी तरह से उलट दिया, विशेष रूप से 2025 और 2026 की शुरुआत में जब सोने की कीमत में बहुत तेजी से वृद्धि हुई थी।”

ईरान युद्ध के बाद, सोने ने अपने अधिक पारंपरिक संबंधों को फिर से अपना लिया है।

उन्होंने कहा, “बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर दोनों में वृद्धि हुई है, तब सोने ने इन मापदंडों के प्रति अपनी पारंपरिक विपरीत संवेदनशीलता प्रदर्शित की है, जिसके परिणामस्वरूप इसकी कीमत में गिरावट आई है।”

हालांकि, बीते एक साल में सोने में रिकॉर्ड रैली देखने को मिली है। डॉलर में सोने का दाम बीते एक साल में 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है। वहीं, छह महीने में सोने में करीब 18 प्रतिशत की तेजी देखी गई है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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रोजमर्रा की ये आदतें धीरे-धीरे दिमाग को पहुंचा रही नुकसान, जानें कैसे बिगाड़ रही आपकी ब्रेन हेल्थ

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक स्वास्थ्य यानी ब्रेन हेल्थ को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हम रोजाना कई ऐसी आदतें अपनाते हैं जो देखने में सामान्य लगती हैं, लेकिन धीरे-धीरे हमारे दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डालती रहती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिमाग सिर्फ सोचने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के कामकाज को नियंत्रित करता है। ऐसे में अगर इसकी सेहत प्रभावित होती है, तो इसका असर हमारी याददाश्त, ध्यान, फैसले लेने की क्षमता और मानसिक संतुलन पर साफ दिखाई देता है।

रिसर्च के अनुसार, सबसे बड़ी समस्या है नींद की कमी। जब कोई व्यक्ति लगातार पर्याप्त नींद नहीं लेता, तो दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। इससे याददाश्त कमजोर होने लगती है और नई चीजें सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है। वैज्ञानिक बताते हैं कि नींद के दौरान दिमाग खुद को रिपेयर करता है और जरूरी जानकारी को व्यवस्थित करता है। ऐसे में नींद की कमी सीधे तौर पर ब्रेन फंक्शन को कमजोर करती है।

खानपान भी ब्रेन हेल्थ में अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा मीठा या हाई शुगर वाली चीजें खाने से इंफ्लेमेशन बढ़ सकता है, जिसका असर दिमाग पर भी पड़ता है। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक ज्यादा शुगर लेने से याददाश्त और सोचने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है।

धूम्रपान भी दिमाग के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। सिगरेट में मौजूद जहरीले तत्व शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई को कम कर देते हैं। इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है, क्योंकि दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लगातार धूम्रपान करने से दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और कई बार स्थायी नुकसान भी हो सकता है।

इसी तरह, अत्यधिक शराब का सेवन भी ब्रेन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादा शराब पीने से दिमाग के न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं। इससे सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता कमजोर हो सकती है। लंबे समय तक यह आदत बनी रहे तो मानसिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जब हम ज्यादा समय तक बैठे रहते हैं और शरीर को एक्टिव नहीं रखते, तो दिमाग तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है। इससे दिमाग को जरूरी पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।

लगातार तनाव में रहना भी दिमाग के लिए नुकसानदायक है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ने लगता है। यह हार्मोन दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो याददाश्त और सीखने की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। इससे मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

आज के डिजिटल दौर में स्क्रीन टाइम का बढ़ना भी एक बड़ी चिंता बन गया है। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी के सामने ज्यादा समय बिताने से न सिर्फ आंखों पर असर पड़ता है, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। इससे दिमाग को पूरा आराम नहीं मिल पाता और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

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