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Pranit More controversy: 'मेरी सोच वैसी नहीं... एंटरटेनमेंट के लिए बोला था' FIR के बाद 370 की बिरयानी वाले हिमांशु ने तोड़ी चुप्पी

370 biryani controversy: कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा में आए हिमांशु जांगड़ा ने पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने एक वीडियो के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और जो कुछ उन्होंने मंच पर कहा, वह केवल मनोरंजन के लिए था।

हिमांशु ने लोगों से अपील की कि उनकी बात को खुले मन से सुना जाए और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की जाए।

"स्थिति पहले से काफी खराब हो चुकी है"
विवाद के बाद अपनी मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए हिमांशु ने कहा कि पिछले कुछ दिनों ने उनकी जिंदगी को काफी प्रभावित किया है। उनके मुताबिक, शुरुआत में उनके परिवार और गांव के लोगों को इस मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे यह बात उनके रिश्तेदारों तक पहुंच गई।

उन्होंने बताया कि जब उनके परिवार को इस विवाद का पता चला तो चिंता बढ़ गई। हिमांशु का दावा है कि मामले के बाद उन्हें नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा और कानूनी नोटिस जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

"मैंने इम्प्रोवाइज्ड स्टोरी बताई थी"
हिमांशु ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जो कहानी मंच पर सुनाई थी, वह कोई वास्तविक घटना नहीं थी। उनके अनुसार, स्टैंड-अप कॉमेडी और क्राउडवर्क सेशन के दौरान कई लोग इसी तरह के किस्से साझा कर रहे थे, जिसके बाद उन्होंने भी उसी माहौल में एक कहानी को अपने अंदाज में पेश किया।

उन्होंने कहा कि उस वक्त उनका मकसद केवल लोगों का मनोरंजन करना था और उनके बयान को उनकी सोच या मानसिकता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

प्रणित और ऑडियंस की वजह से और हौसला मिला
हिमांशु ने यह भी स्वीकार किया कि मंच पर मौजूद लोगों और शो के होस्ट की प्रतिक्रिया ने उन्हें आगे बात बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें लगा कि दर्शक इसे मजाक के तौर पर ले रहे हैं, इसलिए उन्होंने बातचीत को उसी दिशा में जारी रखा।

शो में जाने का है अफसोस
हिमांशु ने माना कि शुरुआत में उन्होंने पूरे मामले को एक मजाक के रूप में लिया था और उन्हें लगा था कि यह उनके लिए चर्चा में आने का मौका बन सकता है। लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके शब्द कई लोगों को आहत कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए आपत्तिजनक मानी जा सकती है, जिसका उन्हें अब खेद है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
हिमांशु जांगड़ा का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक क्राउडवर्क वीडियो में उनकी एक टिप्पणी वायरल हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद उन्हें भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।

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डाबर के '100% शुद्ध' दावे वाले प्रोडक्ट पर रोक:FSSAI ने शहद-घी समेत कई सामान बेचना बैन किया; 15 दिन में रिपोर्ट मांगी

डॉबर के कई प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इनमें शहद और गाय का घी भी शामिल है। ये प्रोडक्ट 100% शुद्धता के दावे के साथ बेचे जा रहे थे। यह रोक खाने-पीने के सामानों के मानक तय करने वाली सरकारी संस्था FSSAI ने लगाई है। फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इन दावों को गुमराह करने वाला बताया है। इस पर डाबर से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। सोमवार 3 अगस्त को FSSAI ने सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी है। FSSAI की जांच में क्या पता चला FSSAI के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों पर भ्रामक दावे पाए गए थे। इनमें '100% नेचुरल', '100% प्योर', '100% प्योरिटी गारंटेड', '100% ऑर्गनिक' और '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' जैसे लेबल शामिल थे। FSSAI का कहना है कि '100 प्रतिशत' दावों का यह उपयोग FSS विनियम, 2018 का उल्लंघन करता है। ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं। नियमों के अन्य बड़े उल्लंघन पहले भी दिया गया था नोटिस FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर को नोटिस जारी कर ऐसे भ्रामक ‘100%’ दावों को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी ने कोई कदम नहीं उठाया। इसके बाद FSSAI को यह कड़ा प्रोहिबिशन (बैन) ऑर्डर जारी करना पड़ा। अब डाबर को 15 दिनों के अंदर यह बताना होगा कि उन्होंने FSSAI के आदेश के बाद क्या कदम उठाए हैं। भास्कर नॉलेज '100%' के दावे के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी FSSAI के अनुसार '100%' शब्द की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 में कोई तय परिभाषा नहीं है। इसलिए '100% नेचुरल', '100% प्योर', '100% प्योरिटी गारंटीड' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावे लोगों को गुमराह कर सकते हैं। इसी वजह से FSSAI ने फूड कंपनियों को ऐसे दावे करने से बचने की सलाह दी है। नियमों के मुताबिक किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा सच, स्पष्ट और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। अगर कोई कंपनी भ्रामक या बिना सबूत के दावा करती है, तो FSSAI उसे नोटिस भेज सकता है, लेबल बदलने का आदेश दे सकता है, उत्पाद की बिक्री रोक सकता है और दूसरी कार्रवाई भी कर सकता है। पहले भी आए ऐसे मामले 1. पतंजलि (2024: सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक विज्ञापनों पर कड़ी टिप्पणी की थी। कंपनी और उसके अधिकारियों को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी। अदालत के निर्देश के बाद कई विज्ञापन वापस लिए गए। 2. 'हेल्थ ड्रिंक' विवाद (2024): FSSAI ने स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस में 'Health Drink' नाम की कोई कानूनी श्रेणी नहीं है। इसके बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने 'Health Drink' कैटेगरी हटाकर ऐसे उत्पादों को उनकी उपयुक्त श्रेणी में दिखाना शुरू किया। ----------------- ये खबर भी पढ़ें… वॉट्सएप ने संदिग्ध यूजर्स के अकाउंट रिव्यू में डाले: बिना किसी वार्निंग के सभी फीचर्स ब्लॉक; कंपनी बोली- कभी-कभी हमसे गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में कई यूजर्स के अकाउंट्स 24 घंटे के लिए रिव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़ें…

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