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भारत में 43 डिग्री तक नॉर्मल, जापान के शेर भी नहीं सह पा रहे 40 डिग्री टॉर्चर, 3 ने तोड़ दिया दम

Japan Heatwave Lions Died: जिस देश में कभी एसी की जरूरत नहीं पड़ी और जहां लोग सदाबहार मौसम के आदी हैं, वहां अगर गर्मी 38-40 डिग्री पहुंच जाए तो हाल क्या होगा? जापान में इस वक्त ऐसा ही हो रहा है और इंसान छोड़िए जानवरों से भी ये बदलाव सहा नहीं जा रहा है. जापान के चिड़ियाघर में अब तक 3 शेरों की मौत हो चुकी है.

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Viral News: अमिताभ बच्चन के ट्वीट पर क्यों भड़के यूज़र्स? फ्रांस की FIFA वर्ल्ड कप 2026 टीम को लेकर छिड़ी बहस

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या टीवी शो नहीं, बल्कि फ्रांस की FIFA वर्ल्ड कप 2026 टीम को लेकर किया गया एक पोस्ट है। X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई उनकी टिप्पणी ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है, जहां कुछ लोग उनके समर्थन में नजर आए तो बड़ी संख्या में यूज़र्स ने इसे लेकर आपत्ति जताई।

अमिताभ बच्चन ने अपने पोस्ट में फ्रांस की टीम के खिलाड़ियों की नस्लीय पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए लिखा कि टीम में 11 खिलाड़ियों में से 10 अश्वेत और एक श्वेत खिलाड़ी है। उन्होंने इसके साथ "अश्वेतों की ताकत" भी लिखा। पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और देखते ही देखते यह चर्चा का बड़ा विषय बन गया।

क्यों चर्चा में है यह मामला?

  • अमिताभ बच्चन का X पोस्ट वायरल हुआ।
  • फ्रांस की फुटबॉल टीम की नस्लीय विविधता पर बहस छिड़ी।
  • खिलाड़ियों की पहचान, राष्ट्रीयता और प्रतिनिधित्व को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।
  • समर्थकों और आलोचकों के बीच राय बंटी हुई दिखाई दी।

खिलाड़ियों की पहचान को लेकर उठे सवाल

कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने अभिनेता की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि किसी राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों की पहचान उनकी त्वचा के रंग से नहीं, बल्कि उनकी राष्ट्रीयता और खेल प्रतिभा से की जानी चाहिए। आलोचकों का कहना था कि फ्रांस की टीम को केवल नस्लीय आधार पर देखना उसकी वास्तविक पहचान और विविधता को नजरअंदाज करना है।

वहीं कुछ यूज़र्स ने याद दिलाया कि फ्रांस दशकों से एक बहु-सांस्कृतिक समाज रहा है, जहां विभिन्न मूल और समुदायों से आने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनते रहे हैं। टीम के कई खिलाड़ी अफ्रीकी या कैरेबियाई मूल के परिवारों से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उनका जन्म और पालन-पोषण फ्रांस में हुआ है और वे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

पुरानी बहस फिर हुई तेज

अमिताभ बच्चन के पोस्ट के बाद फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की नस्लीय और सांस्कृतिक विविधता को लेकर पुरानी बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई। इससे पहले भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के दौरान फ्रांस की टीम की संरचना और खिलाड़ियों की पृष्ठभूमि को लेकर बहस होती रही है।

हालांकि कुछ लोगों ने अभिनेता का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने केवल एक तथ्यात्मक अवलोकन साझा किया था और उसका उद्देश्य किसी समुदाय या खिलाड़ी की पहचान पर सवाल उठाना नहीं था। दूसरी ओर, कई यूज़र्स का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे संवेदनशील विषयों पर टिप्पणी करते समय शब्दों के चयन में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

फिलहाल इस मुद्दे पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। एक वर्ग इसे सामान्य टिप्पणी मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे खिलाड़ियों की पहचान को नस्ल तक सीमित करने वाला बयान बता रहा है। यही वजह है कि अमिताभ बच्चन का यह पोस्ट लगातार चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।

फ्रांस की टीम क्यों मानी जाती है दुनिया की सबसे मजबूत फुटबॉल टीमों में से एक?

विवाद के बीच यह भी जानना जरूरी है कि फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम दुनिया की सबसे सफल टीमों में गिनी जाती है। 'ले ब्लूज' (Les Bleus) ने 1998 में घरेलू मैदान पर और 2018 में रूस में FIFA वर्ल्ड कप का खिताब जीता था। 2022 वर्ल्ड कप में भी टीम फाइनल तक पहुंची, जहां उसे अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा।

फ्रांस की टीम लंबे समय से अपनी बहुसांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती रही है। अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों ने देश को कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब दिलाए हैं। टीम ने 1984 और 2000 में UEFA यूरो चैंपियनशिप भी जीती थी। वर्तमान दौर में किलियन एम्बाप्पे, एंटोनी ग्रिजमैन और अन्य स्टार खिलाड़ियों के कारण फ्रांस को हर बड़े टूर्नामेंट का प्रबल दावेदार माना जाता है।

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  Sports

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