Health Insurance Claim Rejection: इन 5 गलतियों की वजह से खारिज हो सकता आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम
Health Insurance Claim Rejection: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना सिर्फ पहला कदम है। असली परीक्षा तब होती है, जब इलाज के लिए पॉलिसी का इस्तेमाल करने और क्लेम लेने की जरूरत पड़ती। कई बार पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम का भुगतान नहीं हो पाता। इसकी वजह हमेशा यह नहीं होती कि बीमा कंपनी भुगतान नहीं करना चाहती।
कई मामलों में इलाज पॉलिसी की शर्तों के तहत कवर नहीं होता या पॉलिसी खरीदते समय जरूरी जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई होती। ऐसे में कुछ सामान्य गलतियों से बचकर क्लेम रिजेक्शन की आशंका कम की जा सकती।
मेडिकल हिस्ट्री छिपाना
क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी नहीं देना। कुछ लोग प्रीमियम बढ़ने या पॉलिसी न मिलने के डर से अपनी पुरानी बीमारी या इलाज की जानकारी छिपा लेते। कई बार लोग यह भी सोचते हैं कि कोई बीमारी इतनी अहम नहीं है कि उसका जिक्र किया जाए। लेकिन बाद में बीमा कंपनी को प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज या पुराने इलाज की जानकारी मिलने पर क्लेम खारिज हो सकता। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय अपनी मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी देना हमेशा बेहतर।
वेटिंग पीरियड पूरा होने से पहले क्लेम करना
हेल्थ इंश्योरेंस में कई बीमारियों और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के लिए वेटिंग पीरियड होता। पॉलिसी एक्टिव होने के बावजूद हर बीमारी का इलाज तुरंत कवर नहीं होता। अगर वेटिंग पीरियड पूरा होने से पहले संबंधित बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
पॉलिसी में शामिल न होने वाले इलाज का खर्च
हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ एक्सक्लूजन होते हैं। इनमें पॉलिसी के अनुसार कॉस्मेटिक सर्जरी, एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट, फर्टिलिटी से जुड़े कुछ इलाज और कुछ गैर-चिकित्सीय खर्च शामिल हो सकते हैं। इसलिए पॉलिसी की एक्सक्लूजन लिस्ट पहले ही पढ़ना जरूरी है।
दस्तावेजों में गलती या कमी
अधूरे क्लेम फॉर्म, गलत जानकारी या जरूरी दस्तावेज समय पर जमा न करने से भी परेशानी हो सकती है। डिस्चार्ज समरी, अस्पताल के बिल, डॉक्टर की पर्ची और डायग्नोस्टिक रिपोर्ट जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।
नेटवर्क अस्पताल और प्री-ऑथराइजेशन की अनदेखी
कैशलेस इलाज के लिए अस्पताल का बीमा कंपनी के नेटवर्क में होना जरूरी हो सकता। कुछ प्रक्रियाओं के लिए इलाज से पहले बीमा कंपनी की मंजूरी भी जरूरी होती है। इन शर्तों को पूरा नहीं करने पर कैशलेस क्लेम में दिक्कत आ सकती है।
अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए और आपको लगे कि फैसला गलत है, तो बीमा कंपनी को लिखित में शिकायत दें और पॉलिसी की शर्तों की दोबारा जांच करें। समाधान न मिलने पर कंपनी के ग्रिवांस रिड्रेसल सेल से संपर्क किया जा सकता है।
हेल्थ इंश्योरेंस का फायदा तभी सही तरीके से मिलता है, जब पॉलिसी की शर्तों को पहले से समझा जाए, मेडिकल जानकारी ईमानदारी से दी जाए और जरूरी दस्तावेज व्यवस्थित रखे जाएं।
(प्रियंका कुमारी)
NEET PG 2026: नीट पीजी करेक्शन विंडो आज से हुई शुरू, 28 जुलाई तक फॉर्म में कर सकेंगे सुधार; जानें पूरी डिटेल्स
NEET PG 2026 correction window open: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, नीट पीजी 2026 के लिए आवेदन सुधार प्रक्रिया आज यानी 25 जुलाई 2026 से शुरू हो गई है। जिन उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक अपना आवेदन सबमिट किया था, वे अब अपने फॉर्म में जरूरी बदलाव कर सकते हैं।
इस करेक्शन फैसिलिटी का लाभ उठाने की अंतिम तारीख 28 जुलाई 2026 तय की गई है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑफलाइन मोड के जरिए मिलने वाले किसी भी करेक्शन रिक्वेस्ट पर विचार नहीं किया जाएगा।
फॉर्म में क्या-क्या सुधारा जा सकता है?
इस करेक्शन पीरियड के दौरान उम्मीदवारों को कुछ चुनिंदा फील्ड्स में बदलाव करने की अनुमति दी गई है। आवेदक अपनी जन्मतिथि (Date of birth), लिंग (Gender), श्रेणी यानी कैटेगरी (SC/ST/OBC/General), पीडब्ल्यूडी (PwD) स्टेटस, ईडब्ल्यूएस (EWS) स्टेटस और अपनी शैक्षणिक योग्यता (Academic qualifications) से जुड़ी जानकारी को अपडेट कर सकते हैं।
किन जानकारियों में बदलाव नहीं किया जा सकता?
बोर्ड (NBEMS) ने साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि कुछ खास डिटेल्स को नॉन-इडीटेबल रखा गया है, यानी उनमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इनमें उम्मीदवार का नाम, कैटेगरी (नोट: संभवतः री-इटरेशन अनुसार जो डिटेल्स लॉक हैं), ईमेल आईडी, राष्ट्रीयता (Nationality), परीक्षा शहर (Exam city) और मोबाइल नंबर शामिल हैं। इन विवरणों को बदला नहीं जा सकेगा, इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अन्य पात्र क्षेत्रों को ही सावधानी से सुधारें।
एप्लीकेशन फॉर्म में सुधार करने का आसान तरीका
उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके अपने आवेदन फॉर्म में संशोधन कर सकते हैं:
- सबसे पहले आधिकारिक एनबीईएमएस वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं।
- इसके बाद "Examinations" सेक्शन में जाकर "NEET PG" का चयन करें।
- अब "Applicant Login" पर क्लिक करें और अपने क्रेडेंशियल्स दर्ज करके साइन इन करें।
- इसके बाद जरूरी बदलाव करें और हर अपडेट के बाद "Save and Next" पर क्लिक करें।
- अपने संशोधित किए गए एप्लीकेशन फॉर्म की पूरी जानकारी को ध्यानपूर्वक दोबारा जांच लें।
- अंत में अपडेटेड फॉर्म को सबमिट करें और भविष्य के संदर्भ के लिए उसकी एक कॉपी डाउनलोड कर सुरक्षित रख लें।
किसी समस्या पर कहां करें संपर्क?
करेक्शन प्रक्रिया के दौरान यदि किसी उम्मीदवार को कोई परेशानी आती है, तो वे एनबीईएमएस के हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए उम्मीदवार रविवार और राजपत्रित छुट्टियों (gazetted holidays) को छोड़कर बाकी सभी दिन सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच फोन नंबर +91 7996165333 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा आवेदक लॉगइन करने के बाद मिलने वाले 'Helpdesk' टैब के जरिए भी अपनीquery या समस्या दर्ज करा सकते हैं।
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