Upcoming Cars: नई स्कोडा स्लाविया फेसलिफ्ट में डिजाइन और फीचर्स में क्या मिलेगा खास?
Upcoming Cars: चेक कार निर्माता स्कोडा भारतीय बाजार में अपनी मिड-साइज सेडान Skoda Slavia को जल्द ही फेसलिफ्ट अपडेट के साथ पेश करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस लोकप्रिय सेडान में डिजाइन और फीचर्स के स्तर पर कई बदलाव कर सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक लॉन्च को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है
Skoda Slavia Facelift में होंगे ये बदलाव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Slavia Facelift में एक्सटीरियर डिजाइन को अपडेट किया जा सकता है। इसमें नई डिजाइन वाली हेडलाइट्स, फ्रंट बंपर, ग्रिल, अलॉय व्हील्स और अपडेटेड टेल लाइट्स मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, कार के इंटीरियर में भी बदलाव किए जा सकते हैं।
नई Slavia में अपडेटेड इंफोटेनमेंट सिस्टम, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, नया डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और ज्यादा आरामदायक वेंटिलेटेड सीट्स जैसे फीचर्स दिए जा सकते हैं। इसके साथ ही बेहतर रिवर्स कैमरा, ADAS और 360 डिग्री कैमरा जैसे नए फीचर्स भी शामिल किए जाने की संभावना है।
इंजन में नहीं होगा बड़ा बदलाव
Skoda Slavia Facelift के इंजन विकल्पों में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसमें मौजूदा मॉडल की तरह ही 1.0 लीटर और 1.5 लीटर पेट्रोल इंजन दिए जा सकते हैं। हालांकि, ट्रांसमिशन में अपडेट किया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें मैनुअल गियरबॉक्स के साथ 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिल सकता है।
कब होगी लॉन्च?
Skoda ने अभी तक Slavia Facelift की लॉन्च डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सेडान के फेसलिफ्ट मॉडल को 18 अगस्त के आसपास भारतीय बाजार में लॉन्च किया जा सकता है।
कितनी होगी कीमत?
कंपनी ने अभी कीमतों का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, उम्मीद है कि नए फीचर्स और अपडेट्स के कारण Skoda Slavia Facelift की कीमत मौजूदा मॉडल की तुलना में कुछ हजार रुपये तक ज्यादा हो सकती है।
(मंजू कुमारी)
भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्याख्यान: 'जो शिक्षा और शिक्षा नीति संस्कारों को विस्तार ना दे सके, वो व्यर्थ है'; बोले डॉ. हिमांशु द्विवेदी
वाराणसी, 25 जुलाई। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य को संवेदनशील बनाने और उसके संस्कारों को विस्तार देने की प्रक्रिया भी है। भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर हुए विमर्श में वक्ताओं ने शिक्षा में संस्कार, समान अवसर और स्वायत्तता जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया।
हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शिक्षा में किए जा रहे नए नीतिगत बदलावों के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इनका लक्ष्य मनुष्य को संवेदनशील बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो शिक्षा और शिक्षा नीति संस्कारों को विस्तार ना दे सके वो व्यर्थ है।” डॉ. द्विवेदी ने पौराणिक और धार्मिक कथाओं के उदाहरणों के जरिए अपने तर्कों को विस्तार देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया।
बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने शिक्षा की प्रशासनिक और आर्थिक स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कैंपस में सभी को समान रूप से शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने आजादी के बाद से वर्तमान समय तक की शिक्षा नीतियों की समीक्षा करते हुए उनके विभिन्न पहलुओं की विवेचना भी की।
प्रो. गुरुप्रसाद सिंह ने स्वागत वक्तव्य और विषय प्रवेश के दौरान शिक्षा में सहकार के अर्थ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “जिस शिक्षा की अवधारणा को हम आत्मसात करना चाहते हैं वो संस्कारों के बगैर अधूरी है।”
अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र ने शब्दन फाउंडेशन के सहयोग से ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ विषय पर यह व्याख्यान आयोजित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने की। संचालन डॉ. शिवेंद्र राणा ने किया, जबकि अश्विनी सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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