असम चुनाव: PM मोदी ने कार्यकर्ताओं को दिया बूथ जीतने का मंत्र, AI वाले फर्जी वीडियो से बचने की सलाह
Assam Assembly Election 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 30 मार्च को असम के बीजेपी कार्यकर्ताओं से संवाद किया किया। उन्होंने कहा कि राज्य में बीजेपी-एनडीए की हैट्रिक के लिए हर कार्यकर्ता जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। पीएम ने कहा कि असम में गठबंधन को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है, लेकिन चुनाव जीतने के लिए 'बूथ शक्ति' को और मजबूत करना अनिवार्य है।
अस्थिरता के दौर को न भूलें
राज्य के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने से पहले असम ने अस्थिरता का लंबा दौर देखा है। उन्होंने पहली बार मतदान करने वाले युवाओं (First-time voters) से अपील की कि वे कांग्रेस शासन के दौरान की अव्यवस्था को याद रखें। पीएम ने चेतावनी दी कि एक छोटी सी चूक असम को फिर से दशकों पीछे धकेल सकती है।
AI से बने फर्जी वीडियो से रहें सावधान
चुनाव के इस मौसम में पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को एक नई चुनौती- AI-जनित फर्जी वीडियो (AI-generated fake videos) के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कर भ्रामक खबरें फैलाई जा सकती हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है। पीएम ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे जनता को ऐसी साजिशों के प्रति जागरूक करें।
नितिन नबीन ने कहा- फिर बनेगी बीजेपी सरकार
इससे पहले रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एक चुनावी रैली में दावा किया कि असम में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर हैट्रिक लगाएगी। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकारों पर विकास के बजाय वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि जनता अब उस "काले अध्याय" को दोबारा नहीं दोहराएगी।
असम में कब है चुनाव?
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा। चुनावों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। बता दें कि 2023 में हुए परिसीमन (Delimitation) के बाद यह राज्य का पहला विधानसभा चुनाव है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
CCTV Camera Ban in India: सावधान! अप्रैल से बैन हो जाएंगे चीनी CCTV कैमरे, डेटा सुरक्षा को लेकर केंद्र का सख्त कदम
भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की डेटा गोपनीयता को सर्वोपरि रखते हुए चीनी सीसीटीवी कैमरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। अप्रैल देश में TP-Link, Hikvision और Dahua जैसी बड़ी चीनी कंपनियों के कैमरों की बिक्री पर रोक लग सकती है।
यह फैसला उन चिंताओं के बीच लिया गया है जिनमें यह अंदेशा जताया गया था कि इन कैमरों के जरिए भारतीय डेटा विदेशी सर्वरों, विशेषकर चीन को भेजा जा रहा है। सरकार का मानना है कि संवेदनशील स्थानों पर लगे ये कैमरे जासूसी का जरिया बन सकते हैं।
सुरक्षा ऑडिट और नए कड़े मानक
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सीसीटीवी कैमरों के लिए नए सुरक्षा मानक तय किए हैं। अब केवल उन्हीं कैमरों को बाजार में अनुमति दी जाएगी जो भारतीय सुरक्षा मानकों (BIS) पर खरे उतरेंगे और जिनका डेटा स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रहेगा।
चीनी कैमरों में अक्सर 'बैकडोर' की शिकायतें आती रही हैं, जिसके जरिए हैकर्स या विदेशी एजेंसियां लाइव फीड तक पहुँच बना सकती हैं। सरकार अब इन कैमरों का विस्तृत सुरक्षा ऑडिट कराएगी और बिना प्रमाणीकरण के किसी भी चीनी हार्डवेयर को सरकारी या निजी इस्तेमाल के लिए अनुमति नहीं मिलेगी।
भारतीय बाजार और चीनी कंपनियों पर असर
भारत का सीसीटीवी बाजार वर्तमान में काफी हद तक चीनी ब्रांड्स के कब्जे में है। TP-Link और Hikvision जैसे नाम किफायती होने के कारण घरों और छोटे व्यवसायों में काफी लोकप्रिय हैं। सरकार के इस फैसले से इन कंपनियों को तगड़ा वित्तीय झटका लगना तय है।
हालांकि, इस प्रतिबंध का दूसरा पहलू यह है कि इससे 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू सीसीटीवी निर्माताओं को बड़ा अवसर मिलेगा। सरकार स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं भी ला सकती है ताकि बाजार में कैमरों की कमी न हो।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
अप्रैल से लागू होने वाले इन नियमों के बाद उपभोक्ताओं को कैमरा खरीदते समय उसकी तकनीक और मूल देश की जांच करनी होगी। पुराने लग चुके कैमरों के बारे में फिलहाल सरकार ने हटाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है, लेकिन भविष्य में सुरक्षा अपडेट्स और सर्विस को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सुरक्षा के लिहाज से भारतीय या विश्वसनीय वैश्विक ब्रांड्स की ओर रुख करना ही बेहतर विकल्प होगा। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकती है ताकि आम जनता को किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे।
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