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मध्य पूर्व में तनाव का असर! वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर बंद

मुंबई, 30 मार्च (आईएएनएस)। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 और निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,331.40 पर था।

बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक (4.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (3.49 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.37 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.84 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.80 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (2.72 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ( 2.58 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (2.50 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (2.39 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,447.80 अंक या 2.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,650 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 416.20 अंक या 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,203.80 पर था।

सेंसेक्स पैक में 30 में केवल दो शेयर हरे निशान में बंद हुए।

बजाज फाइनेंस, एसबीआई, इंडिगो, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हुए।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 10 लाख करोड़ रुपए कम होकर 412 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 422 लाख करोड़ रुपए था।

बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव का बढ़ना है, जिसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोरी हुई है।

एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 26 के आखिरी दिन बाजार की शुरुआत गैप डाउन के साथ हुई है और हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी हुई, लेकिन ऊपरी स्तर से लगातार बिकवाली ने बाजार में गिरावट को बढ़ावा दिया। इससे दिन के अंत में निफ्टी 2.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 22,200 से लेकर 22,150 के आसपास है और अगर यहां से गिरावट बढ़ती है तो निफ्टी 22,000 और फिर 21,800 तक जा सकता है। हालांकि, 22,450-22,500 रुकावट का स्तर है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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आधा नर और आधा मादा वैज्ञानिकों मिला एक ऐसा केकड़ा, आखिर कैसे हुआ?

केरल के समुद्री इलाके में वैज्ञानिकों को एक ऐसा जीव मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. यह एक दुर्लभ केकड़ा है जो वेला कारली प्रजाति से ताल्लुक रखता है. पहली नजर में यह आम केकड़ों जैसा ही दिखता है, लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसकी जांच की तो पता चला कि यह आधा नर और आधा मादा है. कुदरत के इस अनोखे रूप को देखकर रिसर्च करने वाली टीम भी दंग रह गई. समुद्री जीवों की दुनिया में इस तरह के मामले बहुत ही कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इस खोज को बेहद खास माना जा रहा है.

क्या है गाइनेन्ड्रोमोर्फिज्म की स्थिति?

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस केकड़े में गाइनेन्ड्रोमोर्फिज्म नाम की एक दुर्लभ स्थिति पाई गई है. इसका मतलब यह है कि एक ही जीव के शरीर में नर और मादा दोनों के अंग और विशेषताएं मौजूद हैं. इस केकड़े का शरीर बिल्कुल बीच से दो हिस्सों में बंटा हुआ है. इसके एक तरफ के हिस्से में नर के गुण हैं और दूसरी तरफ के हिस्से में मादा के लक्षण दिखाई देते हैं. यह स्थिति इतनी सटीक है कि केकड़े के रंग और बनावट में भी दोनों लिंगों का फर्क साफ नजर आता है. आमतौर पर केकड़ों या अन्य जीवों में लिंग का निर्धारण स्पष्ट होता है, लेकिन इस केस में जेनेटिक बदलाव की वजह से यह चमत्कार हुआ है.

रूटीन रिसर्च के दौरान हुई खोज

इस अनोखे केकड़े की खोज कोई योजना बनाकर नहीं की गई थी. वैज्ञानिक अपनी रूटीन फील्ड विजिट पर थे और समुद्री जैव विविधता का जायजा ले रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर इस वेला कारली केकड़े पर पड़ी. इसकी बनावट और शरीर के रंगों में जो अंतर था, उसने तुरंत सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया. जब इसे लैब में ले जाकर बारीकी से देखा गया, तब जाकर इस बात की पुष्टि हुई कि यह कोई साधारण केकड़ा नहीं बल्कि एक दुर्लभ जैविक घटना का उदाहरण है. वैज्ञानिकों का कहना है कि केकड़ों जैसी प्रजातियों में ऐसी स्थिति करोड़ों में से किसी एक के साथ ही होती है.

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विज्ञान के लिए क्यों है यह जरूरी?

इस खोज से वैज्ञानिकों को जीव विज्ञान और खास तौर पर जेनेटिक बदलावों को समझने में बड़ी मदद मिल सकती है. यह केकड़ा इस बात का सबूत है कि कुदरत में विकास के दौरान किस तरह के बदलाव आ सकते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे यह समझने में आसानी होगी कि जीवों में लिंग का निर्धारण कैसे होता है और उसमें किस तरह की गड़बड़ी आने पर इस तरह के परिणाम निकलते हैं. इसके साथ ही यह खोज केरल के समुद्री तटों पर मौजूद जबरदस्त बायोडायवर्सिटी को भी दुनिया के सामने लाती है. यह दिखाता है कि हमारे समंदर में अभी भी ऐसे कई राज छिपे हैं जिनके बारे में हमें बहुत कम जानकारी है.

भविष्य की रिसर्च और जानकारी

फिलहाल इस केकड़े पर और भी रिसर्च की जा रही है. वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस तरह के बदलाव किसी खास पर्यावरणीय कारण से हुए हैं या यह केवल एक संयोग है. इस तरह के दुर्लभ जीवों का मिलना यह भी बताता है कि हमें अपने इकोसिस्टम को बचाने की कितनी जरूरत है. अगर हम अपने समंदर और वहां रहने वाले जीवों को सुरक्षित रखते हैं, तभी विज्ञान को इस तरह की नई जानकारियां मिलती रहेंगी. 

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