WhatsApp यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए सरकार उठाया बड़ा कदम, 1 मार्च से लागू होगा यह नियम
अगर आप WhatsApp, Telegram, Signal या Snapchat जैसे इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 मार्च से इन सभी प्लेटफॉर्म्स पर एक नया सुरक्षा नियम लागू होने जा रहा है, जिसे ‘सिम बाइंडिंग’ कहा जाता है। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने नवंबर में इन कंपनियों को यह नियम लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया था, जिसकी समय सीमा 28 फरवरी को समाप्त हो रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस डेडलाइन में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा, जिसका मतलब है कि 1 मार्च से सभी कंपनियों को इस नियम का पालन करना होगा।
आखिर क्या है सिम बाइंडिंग?
सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा फीचर है जो यह सुनिश्चित करता है कि आप जिस मोबाइल नंबर से मैसेजिंग ऐप का अकाउंट चला रहे हैं, उसका सिम कार्ड उसी डिवाइस में मौजूद और सक्रिय हो। अभी तक यह संभव था कि आप एक बार अपने नंबर से WhatsApp पर OTP के जरिए लॉगिन कर लें और फिर सिम कार्ड निकालकर भी वाई-फाई की मदद से ऐप का इस्तेमाल करते रहें। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
नए नियम के तहत:
अगर आप अपने मोबाइल से वह सिम कार्ड निकाल देते हैं जिससे आपका WhatsApp या Telegram अकाउंट लिंक है, तो ये ऐप्स उस डिवाइस पर काम करना बंद कर देंगे। ऐप को दोबारा चलाने के लिए आपको सिम कार्ड वापस फोन में डालना होगा और लॉगिन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
इस नियम को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे वित्तीय फ्रॉड, खासकर ‘सिम स्वैप’ जैसी घटनाओं को रोकना है। हाल के दिनों में साइबर अपराधी यूजर्स के सिम कार्ड का डुप्लीकेट बनवाकर या किसी तरह उनके नंबर का एक्सेस लेकर उनके मैसेजिंग ऐप्स को कंट्रोल कर लेते थे। इसके बाद वे उस अकाउंट का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए करते थे। सिम बाइंडिंग लागू होने से हैकर्स के लिए ऐसा करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा, क्योंकि ऐप चलाने के लिए फिजिकल सिम कार्ड का फोन में होना जरूरी होगा।
आम यूजर्स पर क्या होगा असर?
अधिकतर यूजर्स के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। अगर आप अपने जिस फोन में WhatsApp चला रहे हैं, उसी में संबंधित सिम कार्ड भी इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपके लिए कुछ भी नहीं बदलेगा और आपका ऐप पहले की तरह सामान्य रूप से काम करता रहेगा।
हालांकि, अगर आप अक्सर सिम कार्ड बदलते हैं या किसी दूसरे फोन में अपना सिम लगाकर अपने प्राइमरी फोन में वाई-फाई पर ऐप चलाते हैं, तो आपको असुविधा हो सकती है। सिम हटाने पर आपका ऐप अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाएगा। इसके अलावा, इन ऐप्स के वेब वर्जन (जैसे WhatsApp Web) पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। नए नियम के मुताबिक, वेब अकाउंट हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा और आपको दोबारा इस्तेमाल करने के लिए QR कोड स्कैन करके फिर से लॉग-इन करना होगा।
स्पेन में घुसने पहुंचे 60 हजार प्रवासी, 67 की मौत:मोरक्को से समुद्र में तैरकर आए थे, बॉर्डर पर सेना ने रोका तो भगदड़ मची
स्पेन में जबरन घुसने की कोशिश के दौरान 67 अफ्रीकी प्रवासियों की मौत हो गई। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, घटना तब हुई, जब गुरुवार सुबह एकसाथ हजारों लोग स्पेनिश शहर स्यूटा में घुसने की कोशिश कर रहे थे। सीमा पर पुलिस की घेराबंदी और सुरक्षा बाड़ के बीच संकरे रास्तों के कारण लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। भीड़ में दबने, दम घुटने और समुद्र में डूबने के कारण यह हादसा हुआ। इस दौरान स्पेन और मोरक्को के 100 से ज्यादा सैनिक भी घायल हो गए। स्पेनिश सरकार ने बताया कि 24 घंटे में मोरक्को की तरफ से करीब 60 हजार लोग तैरकर या पैदल चलकर स्यूटा में घुस चुके है। यह शहर की आबादी का 70% है। प्रवासियों के स्पेनिश शहर में घुसने की 6 फुटेज… मोरक्को से एकसाथ हजारों प्रवासी स्पेन में क्यों घुसे अफ्रीका और एशिया के कई देशों में गरीबी, बेरोजगारी, युद्ध और भुखमरी जैसी समस्यां हैं। लोग अपने और अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए यूरोप जाना चाहते हैं। समुद्र में सैकड़ों किलोमीटर नाव चलाने के बजाय, मोरक्को के रास्ते स्यूटा पहुंचना प्रवासियों के लिए सबसे आसान और छोटा रास्ता लगता है जैसे ही कोई प्रवासी स्यूटा की सीमा में दाखिल होता है, उस पर स्पेन और यूरोपीय संघ के कानून लागू हो जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, स्पेन सरकार उन्हें बिना सुनवाई के सीधे वापस नहीं भेज सकती। उन्हें अस्थायी राहत शिविरों में रखा जाता है, जहां वे शरण का आवेदन करते हैं। एक बार यहां के शिविरों में जगह मिलने के बाद, कानूनी प्रक्रियाओं के तहत धीरे-धीरे इन प्रवासियों को स्पेन के मेनलैंड में जाने का मौका मिल जाता है। अगर कोई व्यक्ति स्पेन पहुंच गया, तो वह वहां से फ्रांस, जर्मनी, इटली, बेल्जियम, नीदरलैंड जैसे दूसरे देशों में भी जा सकता है, क्योंकि यूरोप के इन देशों में आपस की सीमाओं पर पासपोर्ट जांच नहीं होती। स्यूटा से ही यूरोप में घुसने की सबसे ज्यादा कोशिश क्यों कोर्ट के फैसले के बाद समुद्र के रास्ते घुसने लगे प्रवासी नवंबर 2024 में एक अल्जीरियाई प्रवासी मोरक्को से तैरकर स्यूटा पहुंचने की कोशिश कर रहा था। स्पेन की सिक्योरिटी फोर्स ने उसे समुद्र में ही पकड़ लिया और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधे मोरक्को के अधिकारियों को सौंप दिया। मोरक्को पहुंचने के बाद प्रवासी ने अपने वकीलों के जरिए स्पेन की अदालत में इसे चुनौती दी। उसका कहना था कि उसके मामले की कानूनी जांच नहीं की गई। उसे शरण मांगने का मौका नहीं दिया गया और बिना सुनवाई के उसे वापस भेज दिया गया। स्पेन की सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 8 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया। दरअसल, स्पेन के इमिग्रेशन लॉ में लिखा हुआ है कि सिर्फ उन्हीं लोगों को वापस भेजा जा सकता है जो बॉर्डर पर लगी सुरक्षा रुकावटों को पार करने की कोशिश करते हैं। समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासी इस श्रेणी में नहीं आते हैं। इस फैसले के बाद समुद्र के रास्ते स्यूटा पहुंचने वाले प्रवासियों की संख्या अचानक ही बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक मानव तस्करी नेटवर्क ने इस कानूनी बदलाव को भुनाया। उन्होंने लोगों में यह मैसेज पहुंचा दिया कि अब स्पेन की पुलिस उन्हें पानी में पकड़कर तुरंत वापस नहीं ढकेल सकती। ‘अपनी आंखों के सामने 2 लोगों को मरते देखा’ मोरक्को के कई शहरों से लोग लंबा सफर तय करके सीमा तक पहुंचे। कई लोगों ने समुद्र के रास्ते सीमा पार करने की कोशिश की। अब्देलहकीम नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि वह 14 किलोमीटर पैदल पहाड़ों से होकर सीमा तक पहुंचा। वहां उसे बताया गया कि समुद्र के रास्ते जाना होगा। उसने कहा, मैं पूरी तरह पानी में डूब गया था। मैंने अपनी आंखों के सामने दो लोगों को मरते देखा। तभी मुझे अपने दो बच्चों की याद आई और मैंने वापस लौटने का फैसला किया। एक और युवक करीम ने बताया कि जब लोगों ने सुना कि कुछ लोग स्यूटा पहुंच गए हैं, तो हजारों अन्य लोग भी वहां पहुंचने के लिए निकल पड़े। प्रवासियों को रोकने के लिए स्पेन ने सेना भेजी स्पेन सरकार के अधिकारी फर्नांडो रोड्रिगेज कॉन्ट्रेरास ने कहा कि शुरुआती अनुमान के मुताबिक हजारों लोग स्यूटा में घुस आए हैं। हालात को देखते हुए स्पेन सरकार ने सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी है। सेना की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं। हवाई और नौसैनिक निगरानी भी बढ़ाई गई है। समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासियों पर नजर रखने के लिए गोताखोरों की टीमों को भी तैनात किया गया है। वहीं, यूरोपीय संघ (EU) ने भी स्पेन की मदद की पेशकश की है। मोरक्को पर जानबूझकर बॉर्डर पर सुरक्षा कमजोर रखने का आरोप कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोरक्को की सुरक्षा एजेंसियों ने शुरुआत में सख्ती नहीं दिखाई। उनका कहना है कि सीमा तक पहुंचने वाले रास्तों पर पुलिस और सुरक्षा बल मौजूद थे, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों को आगे बढ़ने से नहीं रोका गया। अगर शुरुआत में ही रोक दिया जाता, तो इतनी बड़ी संख्या में लोग स्यूटा नहीं पहुंच पाते। उनका मानना है कि मोरक्को इस संकट का इस्तेमाल स्पेन पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है। मोरक्को पिछले 80 साल से स्यूटा और मेलिला पर अपना दावा करता रहा है, जबकि स्पेन इन दोनों शहरों को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर किसी तरह की बातचीत से इनकार करता है। स्यूटा और मेलिला को लेकर स्पेन-मोरक्को में विवाद मोरक्को को 1956 में स्पेन से आजादी मिली थी। हालांकि, स्पेन ने स्यूटा और मेलिला को आजाद नहीं किया। मोरक्को का कहना है कि स्यूटा और मेलिला भी उसे वापस मिलने चाहिए। ये दोनों शहर अफ्रीकी महाद्वीप में हैं और मोरक्को का हिस्सा हैं। स्पेन का कहना है कि स्यूटा पर उसका कब्जा 350 साल से है। तब मोरक्को भी नहीं बना था। स्यूटा पर पुर्तगाल ने 1415 में कब्जा किया था। 1668 में पुर्तगाल ने इसे स्पेन को दे दिया। स्पेन ने स्यूटा छोड़ा क्यों नहीं? 1. रणनीतिक वजह स्यूटा जिब्राल्टर स्ट्रेट के पास है। यहां से भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर के बीच आने-जाने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सकती है। 2. राजनीतिक वजह यदि स्पेन स्यूटा छोड़ देता है, तो दूसरे शहर मेलिला पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे स्पेन के लिए बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा संकट पैदा हो सकता है। 3. स्थानीय लोगों की इच्छा स्यूटा के अधिकांश निवासी खुद को स्पेनिश मानते हैं। वे समृद्ध देश स्पेन के साथ ही रहना चाहते हैं। ----------------------- यह खबर भी पढ़ें… रेड सी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बना रहा सऊदी:50 देशों को न्योता भेजा; जहाजों को हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाना मकसद सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह रेड सी (लाल सागर) में जहाजों की सुरक्षा के लिए एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएगा। इसका मकसद यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से जहाजों की रक्षा करना है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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