'हाथ थामे, NO Flash Please...'हार्दिक की एक्स वाइफ के बेटे अगस्त्य की ढाल बनी माहिका शर्मा, भीड़ से ऐसे बचाया- VIDEO
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Som Pradosh Vrat Katha: आज सोम प्रदोष व्रत पर पूजा के समय जरूर पढ़े इस कथा का पाठ, भगवान शिव होंगे प्रसन्न
Som Pradosh Vrat Katha: आज यानी 30 मार्च 2026, सोमवार को सोम प्रदोष का व्रत रखा जा रहा है. सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ सोम प्रदोष व्रत कथा सुनने या पढ़ने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. साथ ही सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. आइए यहां पढ़ते हैं सोम प्रदोष व्रत की कथा.
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Som Pradosh Vrat Ki Katha In Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब एक नगर में एक ब्राह्मणी रहा करती थी. वो बेहद गरीब थी. वो भिक्षा मांगकर अपना और अपने बच्चे का गुजारा करती थी. एक बार उसे नदी किनारे एक घायल बच्चा मिला. वो कोई साधारण बच्चा नहीं था, बल्कि विदर्भ का राजकुमार था. उसके माता-पिता को मारकर उसका राज्य छीन लिया गया था.
ब्राह्मणी राजकुमार को अपने घर लेकर आ गई और अपने बेटे की तरह उसका पालन-पोषण करने लगी. कुछ समय बाद वो दोनों बालकों को लेकर ऋषि शांडिल्य के आश्रम में ले गई. जहां ऋषि से उनकी मुलाकात हुई. ऋषि ने ब्राह्मणी और दोनों बालकों को सोम प्रदोष व्रत रखने और उसकी कथा पढ़ने को कहा. ऋषि की आज्ञा मानकर ब्राह्मणी और बालकों ने पूरी निष्ठा से सोम प्रदोष व्रत रखा और कथा पढ़ी.
कुछ समय बाद, बड़ा होने पर राजकुमार की मुलाकात गंधर्व कन्या से हुई. कन्या का नाम अंशुमति था. राजकुमार और अंशुमती को एक-दूसरे से प्रेम हो गया. जब गंधर्व राज को विदर्भ के राकुमार की सच्चाई पता चली तो उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया. विवाह के बाद, राजकुमार को गंधर्व सेना की मदद से अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया.
राजकुमार ने उस ब्राह्मणी और उसके बेटे को राजमहल में स्थान दिया. सोम प्रदोष व्रत और कथा के प्रभाव से राजकुमार को उसका राज्य मिला और ब्राह्मणी की गरीबी सदा के लिए दूर हो गई.
सोम प्रदोष व्रत का महत्व (Som Pradosh Vrat Significance)
सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा पाने का एक अत्यंत कल्याणकारी और मंगलकारी व्रत है. यह व्रत सोम (सोमवार) और त्रयोदशी तिथि के संयोग से बनता है, जो मानसिक शांति, आरोग्य, संतान सुख, पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए उत्तम माना जाता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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