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पाकिस्तान फिर शर्मसार! PSL में बॉल टेंपरिंग करते पकड़े गए 2 खिलाड़ी, क्या लगेगा शाहीन और फखर पर बैन?

PSL : पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर शर्मसार हो गया है. वैसे पाकिस्तान के लिए दुनिया के सामने बेइज्जती होना कोई नहीं बात नहीं है. देश में आए दिन कुछ न कुछ ऐसा होता ही रहता है जो पाकिस्तान को शर्मसार कर देता है. अब क्रिकेट के मैदान से भी एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को शर्मसार कर दिया है. पाकिस्तान के दो खिलाड़ियों पर बॉल टेंपरिंग का आरोप लगा है. 

पाकिस्तान फिर हुआ शर्मसार

दरअसल, पाकिस्तान में इन दिनों PSL 2026 खेला जा रहा है. इस टूर्नामेंट में 29 मार्च को लाहौर कलंदर्स बनाम कराची किंग्स के बीच पाकिस्तान सुपर लीग का 6वां मैच खेला गया. इस मैच में बॉल टेंपरिंग का मामला सानना आया है. इस पूरे मामले में पाकिस्तान के वनडे कप्तान शाहीन अफरीदी और सलामी बल्लेबाज फखर जमान का नाम सामने आया है.

पाकिस्तान में बॉल टेंपरिंग की घटना कोई नहीं बात नहीं है. ऐसा पाकिस्तान के खिलाड़ियों के साथ पहले भी हो चुका है लेकिन अब जिस लीग की तुलना भारत की इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल से की जाती है, उस पीएसएल में ऐसा हुआ है. पीएसएल में विदेशी खिलाड़ी भी खेलने के लिए आते हैं. ऐसे में पाकिस्तान अपनी बेइज्जती लगातार दुनिया के सामने करा रहा है. 

क्या है पूरा मामला 

इस पूरी घटना के बाद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर रमीज राजा ने लाहौर कलंदर्स के कप्तान शाहीन अफरीदी से पूछा कि, बॉल टेम्परिंग की वजह से आखिर में आपसे बॉल ले ली गई, तो इस पर आपके क्या विचार हैं. इन आरोपों के बारे में शाहीन ने कहा कि, 'मुझे इस बारे में नहीं पता और हम देखेंगे कि यह कैमरे में है या नहीं और फिर बात करेंगे कि यह क्या है. असल में ये क्या है'.

 

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अमेरिकी कांग्रेस में ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर नाराजगी, सैनिकों और युद्ध शक्तियों में टकराव जारी

वाशिंगटन, 30 मार्च (आईएएनएस)। ईरान में ग्राउंड पर सेना तैनात करने की संभावना को लेकर अमेरिका के सीनेटरों में गहरी चिंता है। अमेरिका के वरिष्ठ नेताओं ने बढ़ते खतरों, साफ मकसद और कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत पर जोर दिया है।

मीडिया में सैन्य कार्रवाई बढ़ने की खबरों के बीच यह बहस और तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि हजारों और अमेरिकी सेवा सदस्य मिडिल ईस्ट पहुंच रहे हैं, क्योंकि लड़ाई में एक नया मोर्चा खुल रहा है।”

डेमोक्रेटिक सीनेटर एंडी किम ने और ज्यादा सैन्य दखल के खिलाफ चेतावनी दी और इस पल को हाल के दिनों में सबसे अहम पलों में से एक बताया। उन्होंने सीएनएन से कहा, “हम ईरान में जमीन पर अमेरिकी सैनिक नहीं भेज सकते।” इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा कदम बहुत जोखिम भरा ऑपरेशन होगा।

किम ने मिशन की रणनीतिक स्पष्टता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह “सिर्फ इसे लंबा खींचेगा और ऐसे समय में खतरा बढ़ाएगा जब हमने पहले ही इतने सारे सैनिकों को खतरे में देखा है।”

उन्होंने सैन्य संघर्ष की समाप्ति के लिए एक तय रुपरेखा की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, यह एक लगातार बदलता हुआ मकसद है, जो सरकार की युद्ध रणनीति को लेकर सांसदों के बीच बड़ी बेचैनी को दिखाता है।

हालांकि, रिपब्लिकन ने सरकार के तरीके का बचाव किया और ट्रंप सरकार के फैसले को ईरान की क्षमताओं का मुकाबला करने के लिए जरूरी बताया। हाउस मेजॉरिटी लीडर स्टीव स्कैलिस ने कहा कि न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम से जुड़े खतरों को खत्म करने पर फोकस बना हुआ है।

स्कैलिस ने एबीसी न्यूज को बताया, यही असली खतरा है जो वे अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए पैदा करते हैं, जिसे खत्म करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप काम कर रहे हैं। इस ऑपरेशन को शुरू करने का जो लक्ष्य था, उसपर पहुंच रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार ने दोनों पार्टियों को शामिल करते हुए क्लासिफाइड ब्रीफिंग के जरिए कांग्रेस से बातचीत की थी।

हालांकि, ट्रंप सरकार के इस फैसले को लेकर केवल डेमोक्रेट्स ही नहीं, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी मतभेद है। कांग्रेस सदस्य नैन्सी मेस ने सीएनएन को बताया कि सैनिकों को भेजने का कोई भी फैसला प्रतिनिधियों से ही लेना होगा। उन्होंने कहा, अगर हम ऐसा करने जा रहे हैं, तो कांग्रेस के पास आएं और सही अधिकारियों से ऐसा करवाएं।

मेस ने मानवीय नुकसान के बारे में भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, मुझे हमारे सैनिकों और हमारे बेटे-बेटियों पर युद्ध के असर की चिंता है, जिन्हें हम युद्ध में भेज रहे हैं।

डेमोक्रेटिक कांग्रेसी सुहास सुब्रमण्यम ने भी कांग्रेस की निगरानी की मांग दोहराई। उन्होंने सीएनएन से कहा, “राष्ट्रपति को अब कांग्रेस में आना चाहिए, खासकर जमीनी सेना भेजने के लिए।”

सीनेटरों में यह राजनीतिक मतभेद अमेरिका के लक्ष्यों को लेकर बड़ी अनिश्चितता को दिखाता है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या फोकस ईरान की न्यूक्लियर क्षमता को खत्म करना है, मिसाइल सिस्टम को टारगेट करना है या शासन बदलना है।

--आईएएनएस

केके/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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