ईरान ने कुवैत के पावर प्लांट को बनाया निशाना, भारतीय कर्मचारी की मौत, संयंत्र को हुआ भारी नुकसान
US-Iran War: मिडिल ईस्ट भी में अभी भी हालात बेहद खराब है. 30 दिन गुजर जाने के बाद भी जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. आज इस जंग का 31वां दिन है. इस बीच खबर आई है कि ईरान ने कुवैत के पावर प्लांट को निशाना बनाया है. इस हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी देश कुवैत के बिजली मंत्रालय ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी. मंत्रालय ने बताया कि ईरान द्वारा कुवैत के एक बिजली स्टेशन पर किए गए हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई. साथ ही साइट पर स्थित एक इमारत क्षतिग्रस्त हो गई है.
कब किया ईरान ने कुवैत के पावर प्लांट पर हमला?
कुवैत के विद्युत, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि, ईरान ने रविवार शाम को हमला किया. मंत्रालय ने इस हमले को देश पर "ईरान के आक्रमण" का हिस्सा बताया. मंत्रालय की प्रवक्ता इंजीनियर फातिमा अब्बास जौहर हयात ने एक बयान में कहा कि, "कुवैत राज्य के खिलाफ ईरान के आक्रमण के तहत एक बिजली और जल विलवणीकरण संयंत्र की इमारत पर हमला किया गया, जिससे एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई. जबकि हमले में इमारत को काफी नुकसान हुआ है.
एक महीने में कुवैत पर कितने हमले हुए?
बता दें कि मध्य पूर्व में जब से जंग की शुरुआत हुई है. कुवैत को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. कुवैत उन कई देशों में से एक है जिन्हें अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे युद्ध का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है. तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिम एशिया में विभिन्न बुनियादी ढांचों और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. एक अलग बयान में, कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि एक महीने से अधिक समय पहले शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से देश पर कुल 307 बैलिस्टिक मिसाइलें, दो क्रूज मिसाइलें और 616 ड्रोन हमले हुए हैं.
लोगों से शांति बनाए रखने की अपील
इसके साथ ही मंत्रालय के बयान में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह किया है. बयान में कुवैती निवासियों से केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध किया गया है और घटनाक्रम पर निरंतर पारदर्शी अपडेट देने का आश्वासन दिया गया. प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि बिजली और जल व्यवस्था की सुरक्षा और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता है, और सभी तकनीकी टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे पूरी दक्षता के साथ काम कर रही हैं.
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तनाव के बीच ट्रंप का एक और भड़काने वाला बयान सामने आया, कहा-खार्ग द्वीप को अपने पास रखेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर के तनाव के बीच भड़काने वाला बयान दिया है. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वह ईरान का तेल लेना चाहते हैं. इसके साथ ईरान के तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर कब्जा करना चाहते हैं. फाइनेंशियल टाइम्स में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "सच कहूं तो, मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान के तेल पर कब्जा करना है."
ट्रंप ने रविवार को 'फाइनेंशियल टाइम्स' में छपे एक इंटरव्यू में कहा है कि वह 'ईरान का तेल लेना' चाहते हैं. उन्होंने इशारा किया कि अमेरिका तेल निर्यात के मुख्य केंद्र 'खार्ग द्वीप' पर कब्जा जमा सकता है. ट्रंप का यह बयान इस इलाके में बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है. इस तरह के बयान से ट्रंप की मानसिकता सामने आती है. जहां पर वह एक ओर बातचीत का प्रस्ताव रख रहे हैं. वहीं दूसरी ओर ईरान के तेल पर कब्जे की बात खुलमखुला कर रहे हैं. इस इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह की बातचीत जारी है. इसमें पाकिस्तानी 'दूतों' के माध्यम से होने वाली बातचीत भी शामिल है. उन्होंने इन वार्ताओं को बेहतर तरह से आगे बढ़ता हुआ बताया है.
सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है
अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो ट्रंप ईरान से करीब 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने के लिए एक सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं. यह एक जटिल और जोखिम भरा मिशन माना जा रहा है. इसमें अमेरिकी सेना को कई दिनों या उससे अधिक वक्त तक देश के अंदर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है.
अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने अभी तक यह निर्णय नहीं लिया है कि इस अभियान का आदेश दिया जाए या नहीं. ट्रंप अमेरिकी सैनिकों को होने वाले खतरे पर विचार कर रहे हैं. हालांकि बिना सैन्य कार्रवाई के जीत पुख्ता होना मुमकिन नहीं है, ऐसे में वह इस फैसले को लेकर पॉजिटिव हैं, क्योंकि इससे अहम टार्गेट हासिल करने में सहायता मिल सकेगी.
पाकिस्तान पर निर्भर अमेरिका
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान, पाकिस्तान के तेल टैंकरों को स्ट्रेट आफ होर्मुज से गुजरने को लेकर सहमत हो गया है. अब इनकी संख्या को दोगुना किया जाएगा. बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबफ ने मंजूरी दी है. ट्रंप ने कहा, "कल सुबह से होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते हमें तेल से भरे 20 बड़े जहाज मिलने की उम्मीद है."
आसानी से द्वीप पर होगा कब्जा
द्वीप पर ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनके पास किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था है. हम इसे बहुत आसानी से अपने कब्ज़े में ले सकते हैं." रिपोर्ट के तहत, पेंटागन ने जमीन पर कब्जा करने और उसे अपने नियंत्रण में रखने के लिए ट्रेन्ड 10 हजार सैनिकों की तैनाती की है. शुक्रवार को करीब 3,500 सैनिक इस क्षेत्र में पहुंच गए. वहीं 2,200 अन्य मरीन के रास्ते से आए.
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