नोएडा में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर अब बड़ी अपडेट सामने आई है और यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के मुताबिक यहां से व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत अगले डेढ़ से दो महीने के भीतर हो सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि आज से गिनती शुरू करते हुए करीब 45 से 60 दिनों के अंदर नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ान सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। बता दें कि यह परियोजना लंबे समय से तैयारियों के दौर में थी और अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
गौरतलब है कि उड़ान संचालन शुरू होने से पहले सुरक्षा से जुड़े कुछ जरूरी औपचारिक काम पूरे करना अनिवार्य होता है। मौजूद जानकारी के अनुसार नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो को हवाई अड्डे के लिए सुरक्षा कार्यक्रम को मंजूरी देनी होती है। इसी के तहत सुरक्षा व्यवस्था, जांच प्रक्रिया, प्रवेश नियंत्रण और आपात स्थिति से निपटने की योजना तय की जाती है।
अधिकारियों के मुताबिक, जब तक यह सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलती, तब तक हवाई अड्डे से जुड़े कर्मचारियों और अन्य हितधारकों को प्रवेश पास जारी नहीं किए जा सकते। यही कारण है कि संचालन शुरू होने की प्रक्रिया इस मंजूरी पर निर्भर मानी जा रही है।
वहीं, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड से जुड़े अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने भी पुष्टि की है कि अगले 45 दिनों के भीतर सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे साफ है कि परियोजना तेजी से अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार शुरुआती दौर में हवाई अड्डे से घरेलू और मालवाहक उड़ानें एक ही रनवे से संचालित की जाएंगी। गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत बाद में चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
यह हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह दिल्ली क्षेत्र के हवाई यातायात दबाव को भी कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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देश की अर्थव्यवस्था को लेकर मार्च 2026 में एक हल्का बदलाव देखने को मिल रहा है और अब इसके संकेत भी सामने आने लगे हैं। हाल ही में जारी वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बाहरी झटकों का असर उत्पादन लागत बढ़ने, आपूर्ति में बाधा और अलग-अलग क्षेत्रों पर दबाव के रूप में सामने आ रहा है। बता दें कि साल की शुरुआत में मजबूत प्रदर्शन के बाद अब आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी नरमी के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 तक देश की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत बनी हुई थी। मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों पर अच्छे संकेत देखने को मिले थे। मंत्रालय के मुताबिक, घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में निवेश और नीतिगत समर्थन ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी थी।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार जारी था, जबकि वाहन बिक्री और डिजिटल लेनदेन जैसे उपभोग संकेतकों में भी स्थिर बढ़त दर्ज की गई थी। इसके अलावा इस्पात और सीमेंट उत्पादन में बढ़ोतरी ने यह भी दिखाया कि निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में रफ्तार बनी हुई थी।
हालांकि, मार्च में हालात कुछ बदलते नजर आए हैं। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसके चलते ई-वे बिल जनरेशन में कमी और उत्पादन संकेतकों में नरमी जैसे संकेत सामने आए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, लागत बढ़ना इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। खासतौर पर ऊर्जा, परिवहन और बीमा से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी ने उत्पादन पर दबाव डाला है। जिन क्षेत्रों की निर्भरता आयातित कच्चे माल पर ज्यादा है, वहां यह असर और ज्यादा देखने को मिल रहा है।
इसके बावजूद, घरेलू मांग अभी भी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। वाहन पंजीकरण और डिजिटल भुगतान में बढ़त इसका संकेत देते हैं, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को लेकर कुछ नरमी के संकेत जरूर मिले हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, खुदरा महंगाई दर में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू हो गई है, जिसमें खाद्य पदार्थों की कीमतें मुख्य भूमिका निभा रही हैं। हालांकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा असर अभी महंगाई में दिखाई नहीं दिया है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। मंत्रालय ने इसे आगे के लिए एक संभावित जोखिम बताया है।
कुल मिलाकर, शुरुआती महीनों में मजबूत रही भारतीय अर्थव्यवस्था अब बाहरी परिस्थितियों के कारण हल्की गति में आ रही है, लेकिन घरेलू मांग की मजबूती इसे संतुलन में बनाए रखने का काम कर रही है।
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