RCB कितनी तारीख को खेलेगी IPL 2026 में अपना दूसरा मैच? नोट कर लीजिए डेट और टाइम
IPL 2026 का आगाज हो चुका है, जिसके ओपनिंग मैच में डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने सनराइजर्स हैदराबाद को एकतरफा अंदाज में हराया और 6 विकेट से जीत दर्ज की. इस जीत के साथ ही आरसीबी ने टूर्नामेंट में अपनी जीत का खाता भी खोल लिया. चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए उस मैच में विराट कोहली ने धुंआधार बल्लेबाजी की, तो वहीं डेब्यूडेंट जैकब डफी ने 3 विकेट चटकाए. ऐसे में अब सभी फैंस को आरसीबी के दूसरे मैच का बेसब्री से इंतजार होगा. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में RCB दूसरा मैच कब और किसके खिलाफ खेलेगी.
IPL 2026 में RCB दूसरा मैच कब खेलेगी?
IPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु अपना दूसरा मैच 5 अप्रैल को खेलने मैदान पर उतरेगी. ये मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ आरसीबी के होम ग्राउंड एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा.
कितने बजे शुरू होगा वो मैच?
RCB अपना दूसरा मुकाबला चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खेलने वाली है. जहां, एक ओर होंगे रजत पाटीदार, तो वहीं दूसरी तरफ होगी ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी वाली CSK. ये मैच 5 अप्रैल को शाम 7.30 बजे से खेला जाएगा.
IPL 2026 की RCB ने की है विजयी शुरुआत
इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने विजयी आगाज किया है. टूर्नामेंट का ओपनिंग मैच सनराइजर्स हैदराबाद और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेला गया था, जिसे आरसीबी ने 6 विकेट से जीत दर्ज कर ली. इस जीत के साथ ही RCB ने 2 अंक हासिल किए और 69 रनों की नाबाद पारी खेलने वाले विराट कोहली के पास ऑरेन्ज कैप अपने नाम की है.
RCB VS CSK Head to Head
इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच अब तक कुल 35 मुकाबले खेले गए हैं, जिसमें 13 मैच आरसीबी ने जीते हैं, तो वहीं 21 मैचों में सीएसके ने बाजी मारी है. एक मैच बेनतीजा रहा है. हेड टू हेड में चेन्नई का पलड़ा भारी लग रहा है.
यहां देखें RCB का पूरा शेड्यूल
| मैच | तारीख | दिन | मुकाबला | स्थान | समय |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 28 मार्च | शनिवार | RCB vs SRH | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 2 | 5 अप्रैल | रविवार | RCB vs CSK | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 3 | 10 अप्रैल | शुक्रवार | RR vs RCB | गुवाहाटी | 7:30 PM |
| 4 | 12 अप्रैल | रविवार | MI vs RCB | मुंबई | 7:30 PM |
| 5 | 16 अप्रैल | गुरुवार | RCB vs DC | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 6 | 20 अप्रैल | सोमवार | GT vs RCB | अहमदाबाद | 7:30 PM |
| 7 | 24 अप्रैल | शुक्रवार | RCB vs KKR | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 8 | 27 अप्रैल | सोमवार | PBKS vs RCB | चंडीगढ़ | 7:30 PM |
| 9 | 30 अप्रैल | गुरुवार | RCB vs LSG | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 10 | 3 मई | रविवार | SRH vs RCB | हैदराबाद | 7:30 PM |
| 11 | 7 मई | गुरुवार | CSK vs RCB | चेन्नई | 7:30 PM |
| 12 | 10 मई | रविवार | RCB vs RR | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 13 | 14 मई | गुरुवार | RCB vs MI | बेंगलुरु | 7:30 PM |
| 14 | 18 मई | सोमवार | LSG vs RCB | लखनऊ | 7:30 PM |
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पाकिस्तान की नई 'महत्वाकांक्षा': आर्थिक संकट में भी फाइटर जेट्स निर्यात करने का प्लान
इस्लामाबाद, 29 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कराह रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, गरीबी और रोजगार समेत कई मोर्चों पर स्थिति बेहद दयनीय है। लेकिन ऐसे ही समय में पाकिस्तान के हुक्मरान खुद को लड़ाकू विमानों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
नासिर खट्टक, जो चीन-पाकिस्तान क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, ने अफगान डायस्पोरा नेटवर्क में एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। इसमें बताया गया कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय कई बुनियादी चुनौतियों से जूझ रही है—ऊर्जा संकट, कमजोर लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे लगातार दबाव बना रहे हैं। ऐसे माहौल में सरकार का खुद को एक बड़े फाइटर जेट निर्यातक के रूप में स्थापित करने का प्रयास एक विरोधाभास के रूप में सामने आ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान ने करीब 10 अरब डॉलर के रक्षा निर्यात समझौते किए, जिनमें चीन के साथ मिलकर विकसित जेएफ-17 थंडर और मश्शाक ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल हैं। सरकार इन सौदों को आर्थिक सुधार और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के एक बड़े जरिये के रूप में पेश कर रही है, लेकिन यह रणनीति उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई जाती है।
असल समस्या यह है कि जेएफ-17 जैसे फाइटर जेट पूरी तरह स्वदेशी नहीं हैं। इनके कई महत्वपूर्ण पुर्जे चीन, रूस और ब्रिटेन से आयात किए जाते हैं, जिनके लिए विदेशी मुद्रा में भुगतान करना पड़ता है।
इसका मतलब यह है कि निर्यात से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा वापस बाहरी आपूर्तिकर्ताओं को चला जाता है, जिससे शुद्ध लाभ सीमित रह जाता है। इसके अलावा, कुछ रक्षा सौदों में लिबिया जैसे देशों के साथ जुड़ाव की भी बात सामने आई है जो यूएनएससी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स और वैधता दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।
रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि पाकिस्तान अपनी व्यापक आर्थिक अस्थिरता को दूर करने के लिए सैन्य क्षेत्र पर अधिक निर्भरता दिखा रहा है, जबकि अतीत में यह मॉडल सफल नहीं रहा है।
2025 के बजट में रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि की गई, जबकि कुल सरकारी खर्च में कटौती देखने को मिली, जो प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में यह धारणा कि जेट निर्यात देश को कर्ज संकट या आईएमएफ बेलआउट से राहत दिला देगा, काफी हद तक अतिशयोक्तिपूर्ण मानी जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखें तो उच्च महंगाई, बढ़ता कर्ज और बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता जैसे कारक पहले ही अर्थव्यवस्था को कमजोर बनाए हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक ढांचा काफी हद तक “एलीट कैप्चर” से प्रभावित है, जहां नीतियां सीमित प्रभावशाली वर्ग के हितों के अनुसार तय होती हैं। ऐसे में रक्षा निर्यात को आर्थिक समाधान के रूप में पेश करना आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने जैसा भी माना जा सकता है।
रिपोर्ट दावा करती है कि पाकिस्तान फाइटर जेट निर्यात के जरिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती हासिल करने की बात कर रहा है, जमीनी हकीकत यह है कि यह रणनीति कई संरचनात्मक कमजोरियों से घिरी हुई है और इससे व्यापक आर्थिक सुधार की उम्मीद करना फिलहाल यथार्थवादी नहीं दिखता।
--आईएएनएस
केआर/
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