सरकार टीनएजरों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाएगी? [Social Media Ban for Teenagers?] | Aao Baat Karein
डीडब्ल्यू हिंदी और उर्दू के खास शो आओ बात करें के नए सीजन में आपका स्वागत है. इस शो में हम बात करते हैं उन मुद्दों की जो भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों के लोगों के लिए अहम हैं. इस शो को होस्ट करेंगी रितिका और किरन जमान, और हर दूसरे हफ्ते, इन दोनों के साथ आप से मिलेंगे दो एक्सपर्ट - एक भारत और एक पाकिस्तान से. इस एपिसोड में हम एक बहुत ही जरूरी और दिलचस्प मुद्दे पर बात करेंगे -16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी. भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या बच्चों को कम उम्र में सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए, ताकि वे सोशल मीडिया के नुकसान, गलत कंटेंट और मानसिक दबाव से बच सकें. कुछ लोग मानते हैं कि इससे बच्चों की पढ़ाई और मानसिक सेहत बेहतर हो सकती है, जबकि कुछ कहते हैं कि पूरी तरह बैन लगाना सही नहीं है, बल्कि सही गाइडेंस ज्यादा जरूरी है. सिर्फ भारत और पाकिस्तान ही नहीं, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम में इस मुद्दे पर बहस जारी है. ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस ने तो इसे लागू भी कर दिया है. कई जगहों पर बच्चों के लिए सख्त नियम बनाने, पैरेंटल कंट्रोल बढ़ाने और सोशल मीडिया कंपनियों पर जिम्मेदारी डालने की बात हो रही है. इस एपिसोड में हम समझेंगे कि क्या ऐसा बैन जरूरी है, और अगर हां, तो किस हद तक. अगर ऐसा बैन लागू होता है तो इसके क्या नतीजे हो सकते हैं? क्या बच्चे सच में इस लत से निजात पा सकेंगे, या फिर वे सोशल मीडिया को छुपकर इस्तेमाल करेंगे? क्या इससे उनकी सीखने की आजादी पर असर पड़ेगा? आइए, इस मुद्दे को ऐसे समझते हैं जैसे किसी बैठक में आपसे आपके दोस्त बात कर रहे हों. आओ बात करें के पहले एपिसोड में हम बात करेंगे कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी होनी चाहिए या नहीं? #AaoBaatKarein #IndiaPakPodcast #Social MediaBan #Socialmedia #banOnSocialMedia #TeenagersOnSocialMedia #Reddit #Facebook #Instagram #TeenagersOfInstagram Should Social Media be banned for kids under 16? Let’s talk on it!
ये हैं महिषासुर के वंसज, मां दुर्गा को मानते हैं दुश्मन, नवरात्रि के 9 दिन जमकर मनाते हैं शोक
चैत्र नवरात्र खत्म हो चुके है. नौ दिन माता रानी की उपासना के बाद लोगों ने माता को विदाई दी. इन नौ दिनों तक लोग मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं. लेकिन झारखंड में एक ऐसी जनजाति रहती है, जो इन नौ दिनों मातम मनाते हैं. क्या है ये पूरा मामला?
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